
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ को सुप्रीम कोर्ट ने गैरकानूनी करार दिया है।
वॉशिंगटन: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीति पर मु्ल्क के सुप्रीम कोर्ट ने पानी फेर दिया है। यूएस सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को अपना फैसला सुनाते हुए ट्रंप प्रशासन द्वारा दुनिया भर के देशों पर लगाए गए ग्लोबल टैरिफ को गैरकानूनी घोषित कर दिया। कोर्ट ने साफ कहा कि राष्ट्रीय आपातकाल के लिए बने एक फेडरल कानून का इस्तेमाल करके इस तरह के बड़े व्यापारिक प्रतिबंध या टैरिफ नहीं लगाए जा सकते। बता दें कि फेडरल कानून वह कानून है जो किसी देश की केंद्रीय सरकार बनाती है। यह कानून पूरे देश में लागू होता है और हर राज्य तथा हर नागरिक पर एक समान तरीके से लागू होता है।
क्या होगा इस फैसले का असर?
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को ट्रंप की ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है। इस फैसले से अमेरिका के व्यापारिक साझेदारों को बड़ी राहत मिल सकती है, जिनमें भारत और चीन जैसे बड़े देश शामिल हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि इससे वैश्विक बाजार में स्थिरता आएगी और व्यापार युद्ध जैसी स्थिति पर रोक लग सकती है। बता दें कि अमेरिका में सुप्रीम कोर्ट का फैसला अंतिम होता है। ट्रंप किसी कार्यकारी आदेश के जरिए कोर्ट के फैसले को रद्द नहीं कर सकते। अगर वे ऐसा करने की कोशिश करेंगे, तो इसे असंवैधानिक माना जाएगा और अदालतों में उन्हें फिर से मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है।
अब ट्रंप के पास क्या हैं विकल्प?
ट्रंप सीधे कोर्ट को चुनौती नहीं दे सकते, लेकिन वे टैरिफ लगाने के लिए अन्य रास्तों का इस्तेमाल कर सकते हैं। ट्रंप की पार्टी रिपब्लिकन का संसद में बहुमत है, इसलिए वे एक नया कानून पास करवा सकते हैं जो उन्हें ये टैरिफ लगाने की शक्ति दे दे। कोर्ट ने 1977 के इमरजेंसी एक्ट (IEEPA) के इस्तेमाल को गलत बताया है, इसलिए अब ट्रंप सेक्शन 301 के तहत राष्ट्रीय सुरक्षा खतरे (नेशनल सिक्योरिटी थ्रेट) के नाम पर टैरिफ लगा सकते हैं। यह सेक्शन पहले स्टील और एल्यूमिनियम पर इस्तेमाल हो चुका है। इसके अलावा, सेक्शन 301 ट्रेड एक्ट 1974 के अनुसार अनुचित व्यापार प्रथाओं (अनफेयर ट्रेड प्रैक्टिस) का हवाला देकर ट्रंप टैरिफ लगा सकते हैं। यह सेक्शन पहले से चीन पर इस्तेमाल होता रहा है।
