nitin gadkari dream to make high class road in india and think to reduce road accidents in highwayअगर नितिन गडकरी का ये सपना हो गया साकार, किसी के घर का दीपक नहीं होगा दुर्घटना का शिकार, पढ़ें रिपोर्ट


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Photo:PTI नितिन गडकरी

Nitin Gadkari Updates: आज जहां दुनिया के कई देश मंदी के चपेट में आ चुके हैं तो वहीं भारत इससे खुद को सुरक्षित रखने के लिए तरह-तरह के कदम उठाने में लगा हुआ है। केंद्र सरकार के सभी मंत्री अपने-अपने स्तर पर सरकारी योजनाओं को नई दिशा देने में लगे हुए हैं। इसी बीच देश में तेज गति से दौड़ रही सड़क परियोजनाओं में जान फुंकने वाले केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने मंगलवार को कहा कि देश भर में हर साल करीब 1.5 लाख लोगों की जान लेने वाले सड़क हादसों से बचने के लिए अभी बहुत कुछ किए जाने की जरूरत है। अपने मंत्रालय की विभिन्न परियोजनाओं के मुआयने के लिए जम्मू कश्मीर के दौरे पर गए गडकरी ने वहां संवाददाताओं से कहा कि सड़क सुरक्षा एक अहम मुद्दा है और इस पर अभी बहुत कुछ करने की जरूरत है। हर साल करीब पांच लाख सड़क हादसे होते हैं जिनमें करीब 1.5 लाख लोगों की मौत हो जाती है। 

सुधार के लिए कई कदम उठाए जा रहे

गडकरी ने कहा कि सड़क हादसों के मामले में भारत दुखद रूप से सबसे आगे है और इस स्थिति में सुधार के लिए कई कदम उठाए जा रहे हैं। लेकिन अब भी बहुत कुछ करना बाकी है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाकर और पानी में एयरबोट चलाकर पेट्रोल और डीजल को देश से निकाल बाहर करना उनका सपना है। गडकरी ने सक्रिय राजनीति से संन्यास लेने की मंशा जताने संबंधी बयान पर स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि उनका ऐसा कोई इरादा नहीं है। उनका कहना था कि मैं किसानों के लिए कई परियोजनाएं चला रहा हूं जो जैविक खेती, जैव ईंधन, हथकरघा एवं हस्तशिल्प से जुड़ी हुई हैं। मेरे उस बयान को दुर्भाग्य से इस रूप में समझ लिया गया कि मेरी योजना राजनीति से संन्यास लेने की है।

हाल ही में पहुंचे थे टनल का निरीक्षण करने

जम्मू-कश्मीर पहुंचे केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि -26 डिग्री सेल्सियस में लोगों ने यहां पर काम किया। कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा। इस प्रोजेक्ट में हमने जिस आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया है उससे टनल को बनाने में 5000 करोड़ तक कम खर्च हुए हैं। गडकरी ने कहा कि सुरंग परियोजना को पांच बार टेंडर निकाला गया था और पांचवीं बार न केवल परियोजना आवंटित की गई, बल्कि 12 हजार करोड़ से कम करके 5 हजार करोड़ की लागत पर की गई। उन्होंने कहा कि यह सुरंग वन इंडिया परियोजना का हिस्सा है जहां सरकार का इरादा कश्मीर को कन्याकुमारी से जोड़ने का है।

 

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