AIADMK broke ties with NDA Annamalai said I can not say anything big leaders reply । AIADMK ने NDA से तोड़ा नाता तो बिफरे अन्नामलाई, बोले-मैं चुप रहूंगा, दिल्ली में बैठे नेता देंगे इसका जवाब


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AIADMK ने छोड़ा साथ तो बिफरे अन्नामलाई

चेन्नई :  शिवसेना, अकाली दल और जेडी (यू) के बाद, एआईएडीएमके ने 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले एक बड़ा एलान किया है। एआईएडीएमके ने सोमवार को एनडीए से बाहर निकलने की घोषणा की और अपने सारे रिश्ते तोड़ लिए। यह निर्णय पिछले कुछ महीनों से चल रहा था और अन्नाद्रमुक और भाजपा नेता खुलेआम एक-दूसरे की आलोचना कर रहे थे। तमिलनाडु भाजपा अध्यक्ष के अन्नामलाई इस अलगाव में सबसे बड़ी भूमिका निभाते रहे हैं क्योंकि अन्नाद्रमुक नेताओं ने उन्हें ‘कीट’, उपद्रवी’ कहा था। अपनी यात्रा पर निकले भाजपा नेता अन्नामलाई ने तो अन्नाद्रमुक के इस फैसले पर शुरू में टिप्पणी करने से इनकार कर दिया और फिर कहा कि राष्ट्रीय नेतृत्व इसपर समय पर अपनी प्रतिक्रिया देगा।

 एआईएडीएमके के बीजेपी और एनडीए से गठबंधन तोड़ने पर तमिलनाडु बीजेपी अध्यक्ष के अन्नामलाई का कहना है, “मैं आपसे बाद में बात करूंगा, मैं यात्रा के दौरान नहीं बोलता हूं. मैं बाद में बोलूंगा.”

एआईएडीएमके प्रवक्ता शशिरेखा ने कहा कि बीजेपी के साथ गठबंधन तोड़ना एआईएडीएमके के लिए सबसे खुशी का पल है। चेन्नई में कार्यकर्ताओं ने पटाखे फोड़कर फैसले का जश्न मनाया। अन्नाद्रमुक नेता कोवई सत्यन ने कहा कि अन्नामलाई दंगा भड़काने वाले हैं और उन्होंने अन्नाद्रमुक नेताओं और संस्थापकों पर टिप्पणी करना शुरू कर दिया। अन्नाद्रमुक नेता ने कहा, यह भाजपा है जिसे तमिलनाडु में अन्नाद्रमुक की जरूरत है, न कि इसके विपरीत हमें उनकी जरूरत है।

‘बीजेपी अपने सहयोगियों का सम्मान नहीं करती’: कांग्रेस 

कांग्रेस नेता राशिद अल्वी ने कहा कि यह अच्छा कदम है कि एआईएडीएमके ने अकाली दल, शिवसेना की तरह बीजेपी से भी अपना गठबंधन तोड़ लिया है। राशिद अल्वी ने कहा, “अगर उन्होंने एनडीए और बीजेपी की विचारधारा को समझ लिया है और यह फैसला सावधानीपूर्वक विचार करने के बाद लिया है और बीजेपी के साथ कोई सौदेबाजी नहीं की है, तो यह एक अच्छा कदम है…बीजेपी अपने सहयोगियों का सम्मान नहीं करती है।”

भाजपा कम-से-कम दक्षिण में पूरी तरह से बाहर हो जाएगी। हमें उम्मीद है कि भाजपा को दिल्ली से हटाने के लिए यह एक बड़ा किरदार निभाएगा। AIADMK को मालूम पड़ा है कि वह (भाजपा) उसके लिए एक बड़ी लायबिलिटी है। वह भाजपा के साथ सिर्फ इसिलए थे क्योंकि उनको डर था कि कहीं भाजपा से बाहर आकर उन पर एजेंसियों के छापे ने पड़ने लगें। कर्नाटक में जो JDS के साथ गठबंधन हुआ है वह भी JDS के लिए खरतनाक साबित होगा।

अन्नाद्रमुक ने कहा-हमने पवित्रता से गठबंधन धर्म निभाया

AIADMK नेता कोवई सत्यन ने कहा, “गठबंधन के धर्म और पवित्रता के लिए हमने अपनी यथास्थिति बनाए रखी। अनामलाई ने हमारे नेताओं, संस्थापकों के खिलाफ बोला। वे हमारी विचारधारा की आलोचना करने लगे और कई बार हमने भाजपा के शिर्ष नेतृत्व को इस बारे में जानकारी भी दी… जहां तक तमिलनाडु की बात है तो वह भाजपा है जिसे AIADMK की जरूरत है ना कि AIADMK को भाजपा की… हम उनके सहयोगी है इसका यह मतलब नहीं कि हमारी विचारधारा भी एक जैसी है…।”

एआईएडीएमके विपक्षी गुट इंडिया में भी शामिल नहीं होगी। इसमें कहा गया है कि यह 2024 में एक अलग मोर्चे का नेतृत्व करेगा।

‘नंद्री मीनदुम वरथिर्गल’

जैसे ही एआईएडीएमके ने बड़े फैसले की घोषणा की, नंद्री मीनदुम वरथिरगल (धन्यवाद, कृपया दोबारा न आएं) ट्विटर पर ट्रेंड करने लगा।

तेजस्वी ने कहा-नहीं चलेगी तानाशाही

AIADMK के भाजपा और NDA से गठबंधन तोड़ने पर बिहार के उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने कहा, “अगर यह विकास हुआ है तो यह उन लोगों को मसला था… तमिलनाडु में कांग्रेस-DMK गठबंधन बहुत मजबूत है… NDA गठबंधन की बैठक हुई और उसमें कोई परिणाम नहीं निकला… दक्षिण भारत में बड़ा गठबंधन बाहर हुआ है। इससे भारी नुकसान भाजपा को होगा। इससे पहले महाराष्ट्र में शिवसेना हिस्सा थी, वह भी बाहर हुई। बिहार से JDU बाहर हुई, पंजाब से अकाली दल बाहर हुआ। हर जगह साफ दिख रहा है कि NDA को कुछ मतलब नहीं रह गया है। वहां एक तानाशाह बैठे हैं और दो व्यक्ति देश चला रहे हैं।”

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