होली पर घर-घर में खाई जाने वाली गुजिया आखिर कहां से आई? ये है फेमस होने की वजह


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होली और गुजिया

होली का त्योहार गुजिया के बिना अधूरा माना जाता है। उत्तरभारत में ज्यादातर घरों में होली पर गुजिया बनाई जाती हैं। वैसे तो होली पर एक से एक पकवान बनाए जाते हैं, लेकिन गुजिया की बात ही कुछ और है। गांव से लेकर शहरों तक हर घर में होली पर गुजिया बनाई जाती हैं। मावा, चाशनी और मैदा से बनी गुजिया मुंह में रखते ही घुल जाती है। मार्केट में कई तरह की गुजिया आपको आसानी से मिल जाएंगी। आज हम आपको गुजिया का इतिहास बताने जा रहे हैं और जानते हैं किस राज्य की गुजिया फेमस हैं?

किस राज्य की गुजिया फेमस हैं?

भारत में सबसे पहले उत्तरप्रदेश के बुंदेलखंड इलाके में बनाया गया था। धीरे-धीरे उत्तरप्रदेश के अलग अलग शहरों में गुजिया बनाई और खाई जाने लगीं। यूपी के बाद बिहार, राजस्थान, मध्यप्रदेश और देश के अन्य राज्यों में भी गुजिया मशहूर हो गई। अर्द्धचंद्राकार जैसी दिखने वाली गुजिया सभी पकवानों की रानी है। बच्चे लेकर बड़े सभी इसे चाव से खाते हैं।

गुजिया का इतिहास

बात करें गुजिया के इतिहास की तो इसकी शुरुआत मध्यकालीन युग से बताई जाती है। इतिहासकारों की मानें तो गुझिया की उत्पत्ति मिडिल ईस्ट के देश तुर्की से हुई है। मुगलकालीन समय में गुजिया खास व्यंजनों में शामिल हुआ करती थी। 13वीं शताब्दी में इसे गुड़ और आटे से बनाया जाता था। पहले इसे समोसे की शक्ल और फिर चंद्राकार शेप में बनाया जाने लगा।

होली में क्यों बनाई जाती है गुजिया?

होली में गुजिया बनाने का पुरान चलन है। कहा जाता है कि ब्रज में होली के त्योहार में कृष्ण भगवान को इसी मिठाई से भोज लगाया जाता है। होली पर गुजिया बनाने का चलन ब्रज से ही आया और मथुरा से लेकर वृंदावन तक होली के दिन भगवान को गुजिया से भोग लगाया जाता है और घर आए मेहमानों को गुजिया खिलाई जाती है। हालांकि अब मिठाई की दुकान पर आपको हमेशा गुजिया मिल जाएंगी।

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