
इंडिया टीवी के चेयरमैन एवं एडिटर-इन-चीफ रजत शर्मा।
वक्फ संशोधन बिल पर सरकार और विपक्षी दलों के बीच जंग छिड़ चुकी है। सरकार इसे पास कराने की कोशिश करेगी, हालांकि राहुल की कांग्रेस, ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस, अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी, एम. के. स्टालिन की DMK, लालू यादव की RJD, हेमंत सोरेन की JMM, उद्धव की शिवसेना, शरद पवार की NCP, चन्द्रशेखर राव की BRS से लेकर असदुद्दीन ओवैसी की AIMIM तक तमाम विरोधी दल बिल का विरोध कर रहे हैं। सरकार को पूरा भरोसा है कि वक्फ बिल लोकसभा में पास हो जाएगा। सरकार ने अपने सहयोगी दल JD-U, TDP के कुछ संशोधन स्वीकार किए है। वक्फ कानून में संशोधन को देखने के तीन नजरिए हैं। पहला तो सरकार का, जिसे लगता है कि कुछ गिने चुने लोगों ने वक्फ की प्रॉपर्टीज पर कब्जा करके मोटा माल बनाया, अब इस लूट को रोकने की जरूरत है। दूसरा पक्ष मौलाना मौलवियों का है जिन्हें लगता है कि कानून में बदलाव होगा तो संपत्तियां उनके हाथों से निकल जाएंगी, इसीलिए वो लोगों को ये कहकर डरा रहे हैं कि मुसलमानों की मस्जिदों और कब्रिस्तानों पर सरकार का कब्जा हो जाएगा।
तीसरा पक्ष है विपक्षी दलों का, वे जानते हैं कि वक्फ कानून में संशोधन सुधारों के लिए हैं लेकिन उनकी चिंता मुस्लिम वोट बैंक को लेकर है। वो किसी भी सूरत में मुसलमानों के साथ खड़े दिखना चाहते हैं और जब सवाल वोट बैंक का होता है तो सुधारों की कोई परवाह नहीं करता। चौथा पक्ष है बीजेपी के सहयोगी दलों का, जिनसे कहा गया है कि अगर वक्फ बिल का समर्थन किया तो वो मुसलमानों का वोट खो बैठेंगे। लेकिन चंद्रबाबू नायडू और नीतीश कुमार ऐसी बातों से बिलकुल नहीं डरे। मोटी बात ये है कि पहले वक्फ बिल को लेकर अफवाहों और अटकलों का दौर चलाया गया, मुसलमानों को डराया गया, लेकिन ये दांव नहीं चला। फिर बीजेपी के साथी दलों को डराया गया। ये भी फेल हो गया। अब लोकसभा में वक्फ संशोधन बिल पास हो जाएगा लेकिन जब इस पर जो लम्बी बहस होगी, तो सब की पोल खुल जाएगी। जनता को पता चल जाएगा कि वक्फ बिल पर कौन सा दल मुस्लिम वोटों के लिए स्टैंड ले रहा है और कौन सुधारों के लिए अड़ा हुआ है।
सड़क पर नमाज़: क्या बोले योगी
योगी आदित्यनाथ ने साफ कह दिया कि सड़कों पर नमाज की अनुमति नहीं दी जाएगी। सड़कें यातायात के लिए हैं, आम लोगों के लिए चलने के लिए हैं। योगी ने कहा कि नमाज पढ़ने के लिए मस्जिदें हैं, सड़कों पर जाम लगाने क्या मतलब है। योगी ने कहा कि सड़क पर नमाज पढ़ने की वकालत करने वालों को हिन्दुओं से अनुशासन सीखना चाहिए। योगी ने कहा कि जो लोग सड़क में नमाज पढ़ने की तुलना कांवड़ यात्रा से करते हैं, मुसलमानों के साथ भेदभाव का इल्जाम लगाते हैं, उन्हें समझना पड़ेगा कि अगर सरकार ने कांवड़ यात्रा की अनुमति दी, तो मुहर्रम के जुलूस को कभी नहीं रोका गया। महाकुंभ की सफलता के बाद योगी आदित्यनाथ का आत्मविश्वास काफी बढ़ा है। असल में उनकी नीति और नीयत बिलकुल साफ है। अगर वो सड़क पर नमाज के खिलाफ हैं तो ये कहने में हिचकिचाते नहीं हैं। अगर वो मोहर्रम के जुलूस को सुरक्षा देते हैं तो उन्हें ये कहने में भी कोई समस्या नहीं। योगी विरासत, सनातन दोनों की बात खुलकर करते हैं,उन्हें इसमें कोई दिक्कत नहीं है। अगर किसी नेता के thought process में स्पष्टता हो, तो फिर उसका विश्वास भी बढ़ता है और परफॉर्मेंस भी बेहतर होती है।
राज ठाकरे की MNS: थप्पड़ क्यों मारा?
महाराष्ट्र में राज ठाकरे के आदेश पर उनकी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने गुंडागर्दी शुरू कर दी है। राज ठाकरे ने गुड़ी पड़वा की रैली में कहा था कि महाराष्ट्र में मराठी ही चलेगी, जो लोग दूसरे राज्यों से महाराष्ट्र में आकर नौकरी कर रहे हैं, रोजगार कर रहे हैं, उन्हें मराठी में ही बात करनी चाहिए। जो मराठी नहीं बोलेगा, उसे मनसे के कार्यकर्ता सबक सिखाएंगे। इसके बाद मनसे के कार्यकर्ता काम पर लग गए। मुंबई के पवई इलाके में मनसे के कार्यकर्ताओं ने एक अपार्टमेंट के सिक्योरिटी गार्ड की पिटाई कर दी क्योंकि उसे मराठी नहीं आती थी। कार्यकर्ताओं ने सिक्योरिटी गार्ड को पीटा फिर उसका वीडियो बनाया, उससे हाथ जोड़कर माफी मंगवाई। राज ठाकरे की ओरिजनल पॉलिटिक्स इसी तरह पिटाई करने की, तोड़फोड़ करने की, उत्तर भारतीयों को डराने की थी। इससे नाम तो हुआ लेकिन वो किसी काम नहीं आए। पिछले चुनाव में एक बार फिर राज ठाकरे की पार्टी को बुरी तरह हार का सामना करना पड़ा। इसीलिए अब वो मराठी अस्मिता का सवाल उठा रहे हैं। मराठी भाषा का सम्मान होना चाहिए, मराठी मानुष का सम्मान होना चाहिए, ये महाराष्ट्र की परंपरा है लेकिन थप्पड़ मारकर, तोड़फोड़ करके आज तक कभी किसी ने सम्मान हासिल नहीं किया। जो कानून अपने हाथ में लेता है, उसका कोई सम्मान नहीं करता। (रजत शर्मा)
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