
अमेरिका ने भारत को उन देशों की लिस्ट में रखा है जिस पर ‘डिस्काउंटेड रेसिप्रोकल टैरिफ’ लगाया गया है।
अमेरिका ने अपने सबसे बड़े कारोबारी पार्टनर देशों में से खास भारत पर 26 प्रतिशत की पारस्परिक टैरिफ लगाने का ऐलान कर दिया है। लेकिन आपको बता दें, भारत अमेरिका से इसके ठीक विपरीत और दोगुना यानी 52 प्रतिशत टैरिफ वसूलता है। इस आप ऐसे समझ सकते हैं को अमेरिका ने भारत को 50 प्रतिशत का डिस्काउंट दिया है, अन्यथा अमेरिका भी भारत पर 52 प्रतिशत टैरिफ लगा सकता था। यहां समझ लें कि टैरिफ किसी देश से आयात किए जाने वाले प्रोडक्ट्स पर लगने वाला शुल्क है। शुल्क का भुगतान सामान आयात करने वाली कंपनी अपने देश की सरकार को करती है। अमेरिका ने भारत को उन देशों की लिस्ट में रखा है जिस पर ‘डिस्काउंटेड रेसिप्रोकल टैरिफ’ लगाया गया है। व्हाइट हाउस ने ऐसे 100 देशों की लिस्ट जारी की है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन का मानना है कि अमेरिकी वस्तुओं पर भारत ज्यादा आयात शुल्क वसूलता है, ऐसे में अब देश के व्यापार घाटे को कम करने और मैनुफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए यह कदम उठाना जरूरी था।
भारत को लेकर ट्रम्प ने कही है ये बात
भारत को लेकर डोनाल्ड ट्रम्प ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा भी है कि भारत, बहुत, बहुत सख्त है। प्रधानमंत्री (नरेन्द्र मोदी) अभी-अभी यहां से गए हैं। वह मेरे बहुत अच्छे दोस्त हैं, लेकिन मैंने कहा कि आप मेरे दोस्त हैं, लेकिन आप हमारे साथ सही व्यवहार नहीं कर रहे हैं। वे हमसे 52 प्रतिशत शुल्क लेते हैं। आपको समझना होगा, हमने उनसे सालों-साल और दशकों तक कुछ भी शुल्क नहीं लिया।
भारत पर टैरिफ लागू होने के मायने
भारत में पारस्परिक टैरिफ लागू होने के बाद अब 9 अप्रैल से अमेरिका में प्रवेश करने वाले सभी भारतीय सामानों पर कम से कम 26% शुल्क लागू हो जाएगा। इससे कारोबारियों को नुकसान का आकलन करने में परेशानी होगी। भारत के साथ अमेरिका का व्यापार घाटा 46 अरब डॉलर है। ट्रम्प ने यह स्पष्ट कर दिया है कि ये टैरिफ तब तक जारी रहेंगे जब तक कि इस परेशानी का हल नहीं हो जाता। ट्रम्प ने कहा कि अमेरिका अबतक अन्य देशों से मोटरसाइकिल पर केवल 2.4 प्रतिशत शुल्क लेता है। भारत हमसे 70 प्रतिशत शुल्क लेता है। इस टैरिफ के बाद एक बात स्पष्ट है कि भारत चाहे अमेरिका से कुछ भी आयात करेगा, नया टैरिफ चुकाना ही होगा।
व्हाइट हाउस में 2 अप्रैल को टैरिफ की घोषणा करने के मौके पर मौजूद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प।
अमेरिका भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार रहा
वित्त वर्ष 2021-22 से 2023-24 तक अमेरिका भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार था। भारत के कुल माल निर्यात में अमेरिका की हिस्सेदारी करीब 18 प्रतिशत, आयात में 6.22 प्रतिशत और द्विपक्षीय व्यापार में 10.73 प्रतिशत है। अमेरिका के साथ भारत का 2023-24 में माल के मामले में व्यापार अधिशेष (आयात और निर्यात के बीच का अंतर) 35.32 अरब अमेरिकी डॉलर है। यह 2022-23 में 27.7 अरब अमेरिकी डॉलर, 2021-22 में 32.85 अरब अमेरिकी डॉलर, 2020-21 में 22.73 अरब अमेरिकी डॉलर और 2019-20 में 17.26 अरब अमेरिकी डॉलर था।
भारत पर क्या हो सकता है असर
पीटीआई के मुताबिक, कृषि अर्थशास्त्री अशोक गुलाटी ने गुरुवार को कहा कि भारत नए घोषित शुल्क के बावजूद अमेरिका को अपने कृषि निर्यात को बनाए रख सकता है या बढ़ा भी सकता है, क्योंकि प्रतिस्पर्धी देशों को और भी अधिक शुल्क का सामना करना पड़ रहा है। गुलाटी ने कहा कि क्षेत्रीय प्रतिस्पर्धियों पर लगाए गए उच्च शुल्कों से इसकी तुलना की जाए तो भारतीय वस्तुओं पर ट्रंप के 26 प्रतिशत शुल्क का समुद्री खाद्य और चावल जैसे प्रमुख कृषि निर्यात पर सीमित प्रभाव पड़ेगा। कुछ एक्सपर्ट्स का यह भी मानना है कि कृषि, मशीनरी, फार्मा, इलेक्ट्रिकल, रासायनिक क्षेत्र पर भी इसका असर देखने को मिल सकता है।
भारत कर रहा है जवाबी शुल्क के प्रभाव का विश्लेषण
वाणिज्य मंत्रालय अमेरिका द्वारा भारत से आयात पर लगाए गए 26 प्रतिशत के जवाबी शुल्क के प्रभाव का विश्लेषण कर रहा है। पीटीआई के मुताबिक, एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने आज यह जानकारी दी। अधिकारी ने बताया कि अमेरिका में सभी आयात पर एक समान 10 प्रतिशत का शुल्क पांच अप्रैल से और शेष 16 प्रतिशत शुल्क 10 अप्रैल से लागू होगा। उन्होंने कहा कि एक प्रावधान है कि अगर कोई देश अमेरिका की चिंताओं का समाधान करता है, तो डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन उस देश के खिलाफ शुल्क कम करने पर विचार कर सकता है। भारत पहले से ही अमेरिका के साथ द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर बातचीत कर रहा है।