
प्रदर्शनकारियों ने गाड़ियों में आग लगाई
झारखंड के बोकारो में कई संघठनों ने बंद का ऐलान किया है। ऐसे में प्रशासन ने कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए पूरे चास अनुमंडल में धारा 163 लागू कर दी है। वहीं, बोकारो से कांग्रेस विधायक श्वेता सिंह को पुलिस ने हिरासत में ले लिया है। देर रात पुलिस ने एक्शन लेते हुए बोकारो स्टील प्लांट के सभी गेटों को खाली कराया। बोकारो में विस्थापितों पर लाठी चार्ज के बाद एक व्यक्ति की मौत हो गई थी। इसके बाद से यहां हालात तनावपूर्ण हैं। विस्थापितों की सभी मांगे मान ली गई हैं, लेकिन बवाल थमने का नाम नहीं ले रहा है।
चास अनुमंडल पदाधिकारी प्रांजल ढ़ांडा ने क्षेत्र में धारा 163 लागू करने का पत्र जारी किया। इसके अनुसार 5 या उससे ज्यादा लोग किसी भी स्थान पर एकत्रित नहीं हो सकते या साथ में नहीं घूम सकते हैं। इस दौरान आग्नेयास्त्र, परंपरागत हथियार लाठी, डण्डा, भाला, तीर-धनुष, फर्सा, इत्यादि में से काई भी हथियार लेकर चलना, भ्रमण करना, प्रदर्शन करना अथवा उसका उपयोग करने की मनाही रहती है। इस दौरान कोई जूलूस, रैली, सभा, धरना एवं प्रदर्शन इत्यादि नहीं किया जा सकता है। कर्तव्यों से संबंधित व्यक्तियों, कर्मियों, प्रतिनियुक्ति पुलिस पदाधिकारी एवं दण्डाधिकारियों पर यह आदेश लागू नहीं होगा। अगले आदेश तक चास में धारा 163 लागू रहेगी।
श्वेता सिंह हिरासत में
देर रात बोकारो में प्रशासन और पुलिस की संयुक्त कार्रवाई के तहत विधायक श्वेता सिंह को बोकारो स्टील प्लांट के मुख्य द्वार पर चल रहे धरने से हिरासत में ले लिया गया। उपायुक्त विजया जाधव के नेतृत्व में हुई इस कार्रवाई के बाद उन्हें सर्किट हाउस में स्थानांतरित किया गया। करीब 30 घंटे से बंद स्टील प्लांट का मुख्य मार्ग सहित प्लांट के सभी मार्गों को अब फिर से चालू कर दिया गया है और कर्मचारी आवाजाही कर पा रहे हैं। साथ ही एडीएम बिल्डिंग के समीप जाम भी हटा लिया गया है। डीसी विजया जाधव और एसपी ने आम लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है और चेताया है कि जो कोई भी कानून व्यवस्था भंग करेगा, उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।
क्या है मामला?
झारखंड के बोकारो स्टील प्लांट में गुरुवार (3 अप्रैल) को नियोजन की मांग कर रहे विस्थापितों पर सीआईएसएफ ने लाठीचार्ज किया था। जिसमें एक युवक की मौत हो गई और करीब आधा दर्जन घायल हुए, जिसमें महिलाएं भी शामिल हैं। इस घटना के बाद उग्र विस्थापितों ने तीन हाइवा को आग के हवाले कर दिया और बोकारो स्टील प्लांट के सभी गेट को पूरी तरह से जाम कर दिया। ये वो विस्थापित हैं, जिनकी जमीन बोकारो स्टील प्लांट के निर्माण के दौरान अधिग्रहण की गई थी।
1962 में बोकरो स्टील प्लांट के लिए जमीन अधिग्रहण के समय करीब 64 मौजा के गांवों की जमीन ली गई थी। इन गांवों में रहने वाले लोगों को दूसरी जगहों पर बसाया गया। इसके साथ ही पहले चतुर्थ वर्ग में विस्थापितों की सीधी बहाली होती थी, लेकिन बाद में परिवर्तन किया गया। बोकारो स्टील प्लांट ने करीब चार साल पहले तीन हजार विस्थापितों को प्लांट में अप्रेंटिस करवाया गया था, जिसमें से कुछ को नियोजन भी दिया गया। बाकी बचे विस्थापित समय समय पर आंदोलन करते रहे।
अपने पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत गुरुवार को सुबह से ही विस्थापित प्लांट के एडीएम के गेट के पास जमे हुए थे। सुबह से ही मामला गर्म था, जहां देर शाम होते होते सुरक्षा में तैनात सीआईएसएफ के जवानों ने लाठी चार्ज कर दिया, जिससे एक विस्थापित युवक 26 वर्षीय प्रेम महतो की मौत हो गई और आधा दर्जन लोग घायल हो गए। युवक की मौत के बाद बवाल बढ़ गया। ऐसे में प्रदर्शनकारियों की सभी मांगें मान ली गईं और मृतक के परिवार को मुआवजे का ऐलान किया गया। इसके बाद भी धरना नहीं रुका तो पुलिस ने कांग्रेस विधायक को हिरासत में लिया है।
(बोकारो से मृत्युंजय मिश्रा की रिपोर्ट)