रियल एस्टेट बाजार में सुस्ती है। घरों की बिक्री लगातार गिर रही है। इस बीच एक चौंकाने वाली रिपोर्ट आई है कि 50 लाख से कम कीमत के घरों की बिक्री 9% गिरी है। संपत्ति सलाहकार फर्म नाइट फ्रैंक इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, इस साल जनवरी-मार्च में देश के 8 प्रमुख शहरों में 50 लाख रुपये से कम कीमत वाले घरों की बिक्री में गिरावट आई है। रिपोर्ट में घरों के सुस्त मांग के पीछे ऊंची कीमतों, ऊंची ब्याज दरों और कम आपूर्ति को बताया गया है। हालांकि, रियल्टी एक्सपर्ट का कहना है कि इसकी एक मात्र वजह सस्ते घरों की आपूर्ति में बड़ी गिरावट है। कोविड के बाद से डेवलपर्स सिर्फ लग्जरी या महंगे घरों पर फोकस कर रहे हैं। सस्ते घर बना ही नहीं रहे हैं। इसके चलते मार्केट में विकल्प की भारी कमी है।
पिछले 4 साल में घरों की कीमत अनाप-शनाप तरीके से बढ़ी है। इसके चलते अफोर्डेबल हाउस भी अब करोड़ के हो गए हैं। इसके चलते ये घर अब मिडिल क्लास के बजट के बाहर निकल गए हैं। बहुत सारे लोग चाहकर भी अपना घर नहीं खरीद पा रहे हैं। इसका असर रियल्टी मार्केट पर दिखाई दे रह है। घरों की मांग लगातार गिर रही है। अगर समय रहते सस्ते घरों की सप्लाई नहीं बढ़ी है तो एक बार फिर रियल एस्टेट सेक्टर मंदी की चपेट में जा सकता है।
महंगे घरों की भी मांग तेजी से घटी
सलाहकार फर्म ने कहा कि उच्च कीमतों और उच्च ब्याज दरों के कारण इस किफायती आवास खंड के खरीदार बाजार से दूर रहे। इसके अलावा घरों की आपूर्ति में सुस्ती ने भी बिक्री की मात्रा को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। जनवरी-मार्च की अवधि में प्रीमियम और लक्जरी खंडों में अधिक दिलचस्पी देखी गई। इसके उलट एक-दो करोड़ रुपये की कीमत वाले घरों की बिक्री में दो प्रतिशत की मामूली वृद्धि के साथ 22,330 इकाई रही। इस अवधि में इन शहरों में घरों की कुल बिक्री दो प्रतिशत बढ़कर 88,274 इकाई हो गई।
इन 8 शहरों का आंकड़ा लिया गया
रिपोर्ट के आंकड़ों से पता चला है कि देश के आठ प्रमुख शहरों में 50 लाख रुपये से कम कीमत वाले घरों की बिक्री नौ प्रतिशत घटकर 21,010 इकाई रह गई। रिपोर्ट के मुताबिक, उच्च मूल्य वर्ग में बिक्री बाजार की वृद्धि को बढ़ावा दे रही है, लेकिन 50 लाख से एक करोड़ रुपये और 50 लाख रुपये से कम कीमत की श्रेणियों में सालाना आधार पर क्रमशः छह प्रतिशत और नौ प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। दरअसल इस तिमाही में घर खरीदारों का ध्यान प्रीमियम श्रेणी पर रहा। नाइट फ्रैंक इंडिया ने यह रिपोर्ट दिल्ली-एनसीआर, मुंबई महानगर क्षेत्र (एमएमआर), कोलकाता, चेन्नई, पुणे, हैदराबाद, बेंगलुरु और अहमदाबाद के बाजारों से हासिल आंकड़ों पर जारी की है।