
पद्मश्री ‘वनजीवी’ रामैया।
हैदराबाद: तेलंगाना के खम्मम जिले के रेड्डीपल्ली गांव में शनिवार को पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित पर्यावरणविद ‘वनजीवी’ रामैया का 87 वर्ष की आयु में निधन हो गया। रामैया को खम्मम जिले में ‘चेट्टू (वृक्ष) रामैया’ और ‘हरित योद्धा’ के नाम से भी जाना जाता था। उनते परिवार से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, उन्हें अपने पैतृक घर में दिल का दौरा पड़ा था। रमैया के निधन की खबर से पूरे तेलंगाना सहित देशभर में शोक की लहर दौड़ गई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी, आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू सहित कई नेताओं ने उनके निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया है।
लगाए थे एक करोड़ से ज्यादा पौधे
रामैया ने अपने जीवनकाल में एक करोड़ से ज्यादा पौधे लगाए। औपचारिक शिक्षा नहीं प्राप्त करने के बावजूद, पेशे से कुम्हार रामैया ने पौधरोपण को अपने जीवन का मिशन बनाया और उनकी पत्नी जनम्मा ने भी इसमें उनका पूरा साथ दिया। गरीबी के बावजूद, उन्होंने 5 दशकों से अधिक समय तक पर्यावरण संरक्षण के लिए अथक प्रयास किए। वह जब भी घर से बाहर निकलते, गले में एक बोर्ड लटकाते थे, जिस पर लिखा होता था, ‘वृक्षो रक्षति रक्षितः’ (वृक्षों को बचाओ, तो वृक्ष तुम्हें बचाएंगे)। उनके इस समर्पण के लिए 2017 में उन्हें पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।
पीएम मोदी ने दी रामैया को श्रद्धांजलि
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘एक्स’ पर रामैया श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा, ‘दरिपल्ली रामैया गारू को संपोषणीयता के हिमायती के रूप में याद किया जाएगा। उन्होंने अपना जीवन लाखों पेड़ लगाने और उनकी सुरक्षा के लिए समर्पित कर दिया। उनके अथक प्रयासों में प्रकृति के प्रति गहरा प्रेम और भावी पीढ़ियों के प्रति चिंता झलकती है। उनका काम हमारे युवाओं को हरित ग्रह बनाने के उनके प्रयास के कारण प्रेरित करता रहेगा। इस दुख की घड़ी में मेरी संवेदनाएं उनके परिवार और प्रशंसकों के साथ हैं।’
‘रामैया ने पूरे समाज को प्रभावित किया’
तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने रामैया के निधन को समाज के लिए ‘अपूरणीय क्षति’ बताया। उन्होंने कहा, ‘रामैया ने अकेले वृक्षारोपण की शुरुआत की और पूरे समाज को प्रभावित किया। पर्यावरण संरक्षण के लिए उनका समर्पण युवाओं के लिए प्रेरणा है।’ रेड्डी ने शोक संतप्त परिवार के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की। आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने कहा, ‘एक करोड़ पौधे लगाने में रामैया का योगदान प्रेरणा का स्रोत है। उनका निधन पर्यावरण संरक्षण आंदोलन के लिए अपूरणीय क्षति है।’