‘मुझे क्लीन चीट मिल चुकी है, वे इतने सालों के बाद मुझे क्यों बुला रहे हैं’, ED की पूछताछ पर बोले रॉबर्ट वाड्रा


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रॉबर्ट वाड्रा।

नई दिल्ली: प्रवर्तन निदेशालय यानी कि ED ने 2008 के हरियाणा भूमि सौदे में कथित अनियमितताओं से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग केस में गुरुवार को लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के बहनोई रॉबर्ट वाड्रा का लगातार तीसरे दिन बयान दर्ज किया। पिछले 3 दिनों में 56 साल के वाड्रा से इस मामले में करीब 16 घंटे तक पूछताछ की जा चुकी है। वाड्रा ने ED की कार्रवाई को अपने और अपने परिवार के खिलाफ ‘राजनीतिक प्रतिशोध’ करार दिया। वह अपनी पत्नी और वायनाड से सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा के साथ सुबह 11 बजे के बाद मध्य दिल्ली स्थित ED दफ्तर पहुंचे। पूछताछ के बाद वाड्रा शाम 6:15 बजे के आसपास दफ्तर से निकले।

वाड्रा को पेश होने के लिए कोई नई तारीख नहीं दी गई

ED सूत्रों ने बताया कि फिलहाल वाड्रा को पेश होने के लिए कोई नई तारीख नहीं दी गई है। फिलहाल यह भी साफ नहीं है कि उन्हें दोबारा पूछताछ के लिए बुलाया जाएगा या नहीं। सूत्रों के मुताबिक, वाड्रा से 16-17 सवाल पूछे गए और उनका बयान PMLA के तहत दर्ज किया गया। वाड्रा ने कहा, ‘मुझे इस मामले में हरियाणा सरकार और खट्टर जी (हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर) से 2019 और 2020 में क्लीनचिट मिल चुकी है। वे (ED) इतने सालों के बाद मुझे क्यों बुला रहे हैं। यह एक सियासी षडयंत्र है और इसीलिए लोगों को लगता है कि यह एजेंसियों का दुरुपयोग है।’ 

वाड्रा के खिलाफ चार्जशीट दाखिल करेगी ED: सूत्र

सूत्रों ने ‘PTI-भाषा’ को बताया कि ED जल्द ही इस मामले में वाड्रा के खिलाफ चार्जशीट दाखिल करेगी। इसके अलावा, मनी लॉन्ड्रिंग के 2 अन्य मामलों की भी जांच होगी, जिनमें कुछ संपत्तियों की कुर्की की जा सकती है। यह जांच हरियाणा के मानेसर-शिकोहपुर (अब गुरुग्राम में सेक्टर 83) में एक जमीन सौदे से जुड़ी है। फरवरी 2008 में वाड्रा से संबंधित कंपनी ‘स्काईलाइट हॉस्पिटैलिटी प्राइवेट लिमिटेड’ ने ‘ओंकारेश्वर प्रॉपर्टीज’ से 7.5 करोड़ रुपये में 3.5 एकड़ जमीन खरीदी थी। वाड्रा इस कंपनी में पहले डायरेक्टर थे। उस समय हरियाणा में भूपेंद्र सिंह हुड्डा के नेतृत्व में कांग्रेस की सरकार थी।

अशोक खेमका ने रद्द कर दिया था दाखिल खारिज

इस 3.53 एकड़ जमीन को स्काईलाइट हॉस्पिटैलिटी ने 4 साल बाद सितंबर 2012 में रियल्टी कंपनी ‘DLF’ को 58 करोड़ रुपये में बेच दिया। यह सौदा अक्टूबर 2012 में विवादों में आया जब IAS अफसर अशोक खेमका ने इसे राज्य चकबंदी अधिनियम और कुछ प्रक्रियाओं का उल्लंघन बताते हुए दाखिल खारिज रद्द कर दिया। खेमका उस समय हरियाणा के भूमि चकबंदी एवं भूमि अभिलेख महानिदेशक-सह-पंजीयन महानिरीक्षक थे। हरियाणा में उस समय विपक्ष में रही BJP ने इस मामले को लेकर गांधी परिवार पर निशाना साधा था। हरियाणा पुलिस ने 2018 में इस सौदे की जांच के लिए FIR दर्ज की थी। (भाषा)

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