दिल्ली में जमीन के नीचे फर्राटा भरेंगी गाड़ियां, इन इलाकों में बन रही 5 किमी लंबी हाईटेक टनल


delhi underground tunnel
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जाम से बचने के लिए लिए दिल्ली में अंडरग्राउंड टनल बनाई जाएगी।

दिल्ली वालों को सड़कों पर रोज-रोज के ट्रैफिक जाम से छुटकारा मिलने वाला है। एयरपोर्ट के रूट पर ट्रैफिक कंजेशन को कम करने के लिए केंद्र सरकार ने एक महत्वपूर्ण परियोजना को पिछले हफ्ते हरी झंडी दी है। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने रविवार को बताया कि केंद्र सरकार ने राजधानी दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों में यातायात सुगमता और प्रदूषण नियंत्रण के उद्देश्य से 24,000 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी है। इन प्रोजेक्ट्स में महिपालपुर के शिव मूर्ति क्षेत्र (द्वारका एक्सप्रेसवे) से नेल्सन मंडेला रोड (वसंत कुंज) तक 5 किलोमीटर लंबी सुरंग का निर्माण भी शामिल है।

सुरंग बनाने में कितनी आएगी लागत?

सीएम रेखा ने कहा कि यह सुरंग राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) द्वारा लगभग 3,500 करोड़ रुपये की लागत से बनाई जाएगी। इन परियोजनाओं को हाल ही में केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी के साथ हुई बैठक में स्वीकृति मिली है।  

इन अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस होगी सुरंग-

  1. दो भूमिगत सुरंग बनाई जाएगी जिनमें प्रत्येक में तीन लेन होंगी, यानी कुल 6 लेनों की यह सुरंग दक्षिण दिल्ली को द्वारका और गुरुग्राम से जोड़ने के लिए एक सिग्नल-फ्री वैकल्पिक मार्ग प्रदान करेगी।
  2. सुरंग को अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस किया जाएगा जिसमें इलेक्ट्रो-मैकेनिकल सिस्टम, वेंटिलेशन, अग्निशमन व्यवस्था, CCTV निगरानी, नियंत्रण कक्ष, आपातकालीन निकासी मार्ग शामिल होंगे।
  3. यह सुरंग रंगपुरी, धौला कुआं, राव तुला राम मार्ग और नेशनल हाईवे-48 पर ट्रैफिक के दबाव को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
  4. यह सुरंग पूर्वी और मध्य दिल्ली को दिल्ली एक्सप्रेसवे, एनएच-44, एनएच-10, दिल्ली-जयपुर हाईवे (NH-48), दिल्ली-दून एक्सप्रेसवे (NH-709बी) तथा अर्बन एक्सटेंशन रोड और द्वारका एक्सप्रेसवे जैसे प्रमुख राजमार्गों से जोड़ेगी।

कब शुरू होगा काम?

सीएम रेखा गुप्ता ने इस परियोजना को ‘‘भविष्य की दिल्ली की नींव’’ करार देते हुए कहा कि यह राजधानी के बुनियादी ढांचे को नई दिशा देगी और लाखों नागरिकों को राहत प्रदान करेगी। उन्होंने बताया कि इस परियोजना को लेकर सारी तैयारियां कर ली गई हैं। तकनीकी और अन्य औपचारिक अंतिम चरण में है। उम्मीद है कि अगले साल की शुरुआत में इस परियोजना पर काम शुरू हो जाएगा।





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