सुपरस्टार एक्ट्रेस के प्यार में पड़कर की दूसरी शादी, चंद सालों में हुई पत्नी की मौत, 15 दिन के बेटे को छोड़ लौटा पहली बीवी के पास


Raj Babbar Smita Patil
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राज बब्बर और स्मिता पाटिल।

भारतीय सिनेमा के दिग्गज अभिनेता और वरिष्ठ राजनेता राज बब्बर आज 23 जून को अपना 73वां जन्मदिन मना रहे हैं। अपने सशक्त अभिनय, सामाजिक सरोकार और निजी जीवन की चर्चाओं के लिए पहचाने जाने वाले राज बब्बर ने दशकों तक दर्शकों के दिलों पर राज किया है। आइए उनके इस खास दिन पर उनके जीवन और करियर पर एक नजर डालते हैं। राज बब्बर का जन्म 23 जून 1952 को उत्तर प्रदेश के टूंडला (फिरोजाबाद) में हुआ था। बचपन से ही अभिनय में रुचि रखने वाले राज बब्बर ने प्रारंभिक शिक्षा के बाद दिल्ली का रुख किया और प्रतिष्ठित नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा (NSD) में दाखिला लिया। यहीं से उन्होंने रंगमंच की बारीकियां सीखीं और थिएटर से अपने अभिनय करियर की नींव रखी।

इन फिल्मों ने दिलाई पहचान

साल 1977 में उन्होंने फिल्म ‘किस्सा कुर्सी का’ से अपने सिने करियर की शुरुआत की। हालांकि उन्हें असली पहचान मिली 1980 में रिलीज हुई फिल्म ‘इंसाफ का तराजू’ से, जिसमें उनके निगेटिव किरदार को काफी सराहा गया। राज बब्बर ने अपने करियर में नायक, खलनायक और चरित्र भूमिकाएं निभाकर खुद को हरफनमौला कलाकार के रूप में स्थापित किया। उनकी प्रमुख फिल्मों में ‘प्रेम गीत’, ‘उमराव जान’, ‘मजदूर’, ‘निकाह’, ‘अगर तुम न होते’, ‘घायल’, ‘आज की आवाज’, ‘मेहंदी’ और ‘हकीकत’ शामिल हैं। साथ ही उन्होंने ‘महाभारत’, ‘महाराजा रणजीत सिंह’ और ‘बहादुर शाह जफर’ जैसे टेलीविजन धारावाहिकों में भी अहम भूमिकाएं निभाईं।

राज बब्बर और स्मिता पाटिल की प्रेम कहानी

राज बब्बर की निजी जिंदगी हमेशा सुर्खियों में रही है। साल 1982 में फिल्म ‘भीगी पलकें’ की शूटिंग के दौरान उनकी मुलाकात अभिनेत्री स्मिता पाटिल से हुई, जो जल्द ही प्रेम संबंध में बदल गई। हालांकि उस वक्त राज पहले से शादीशुदा थे। बाद में उन्होंने पत्नी नादिरा को छोड़कर स्मिता के साथ रहने का फैसला किया, जो सामाजिक आलोचना का कारण भी बना। राज और स्मिता ने शादी की और उन्हें एक बेटा हुआ, जिसका नाम है प्रतीक बब्बर। दुर्भाग्यवश बेटे के जन्म के महज 15 दिन बाद ही स्मिता पाटिल का निधन हो गया। इस हादसे ने राज बब्बर को अंदर तक तोड़ दिया। कुछ समय बाद वह नादिरा के पास वापस लौट आए।

सिनेमा से संसद तक

राज बब्बर ने 1989 में राजनीति में कदम रखा और जनता दल के साथ अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत की। बाद में वह कांग्रेस पार्टी में शामिल हो गए। उन्होंने तीन बार लोकसभा और दो बार राज्यसभा में बतौर सांसद प्रतिनिधित्व किया। वे उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष भी रह चुके हैं। राज बब्बर की जिंदगी एक ऐसा सफर है, जिसमें संघर्ष, सफलता, प्रेम, नुकसान और सामाजिक सेवा – सब कुछ है। एक अभिनेता के तौर पर उन्होंने जहां परदे पर जटिल किरदारों को जीवंत किया, वहीं एक नेता के रूप में जनता की सेवा का भी संकल्प निभाया। उनके जन्मदिन पर उन्हें शुभकामनाएं और उनके प्रेरणादायक जीवन को सलाम।

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