
संजय राउत
महाराष्ट्र में भाषा विवाद के बीच शिवसेना नेता संजय राउत ने सीएम देवेंद्र फडणवीस और भारतीय जनता पार्टी पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि संजय राउत महाराष्ट्र में तीन भाषा की नीति लेकर नहीं आए। बीजेपी ने इसे केंद्रीय नीति बनाया। ऐसे में उद्धव के लिए महाराष्ट्र विधानसभा में इस पर चर्चा कराना बेहद जरूरी था। अपने बयान के अंत में उन्होंने देवेंद्र फडणवीस पर निशाना साधते हुए कहा कि वह तीन बार सीएम बन चुके हैं, क्या उन्हें इतना भी नहीं पता।
प्रख्यात वैज्ञानिक डॉ. रघुनाथ अनंत माशेलकर ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को महाराष्ट्र में लागू करने का सुझाव दिया था। मासेलकर समिति ने 14 सितंबर 2021 को तत्कालीन मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को 101 पन्नों का अहवाल सौंपा। इसमें स्कूलों में पहली कक्षा से तीन भाषाओं (मराठी, हिंदी, और अंग्रेजी) को पढ़ाने की सिफारिश शामिल थी। इस अहवाल को मंत्रिमंडल में स्वीकार किया गया और इसके आधार पर कार्यान्वयन के लिए एक कार्यसमिति गठित की गई।
बीजेपी ने क्या कहा था?
महाराष्ट्र भाजपा के मुख्य प्रवक्ता केशव उपाध्याय ने कहा था कि उद्धव ठाकरे ने कार्रवाई रिपोर्ट के लिए एक समिति गठित करने का फैसला किया। यहीं से महाराष्ट्र में हिंदी थोपने की शुरुआत हुई और उद्धव के बाद मुख्यमंत्री बने देवेंद्र फडणवीस उसी रास्ते पर चलने के लिए बाध्य हुए। अब महाराष्ट्र के सभी विपक्षी दल पांच जुलाई को राज्य में हिंदी थोपने के खिलाफ प्रदर्शन करेंगे। इस प्रदर्शन में उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे साथ होंगे। वहीं, शरद पवार ने भी इस प्रदर्शन को समर्थन देने का फैसला किया है।
संजय राउत ने क्या कहा?
संजय राउत ने कहा, “झूठ बोलना भाजपा की राष्ट्रीय नीति है। ये लोग महाराष्ट्र में इसी नीति के साथ काम कर रहे हैं। अगर उद्धव ठाकरे ने वास्तव में माशेलकर समिति पर एक रिपोर्ट पेश की थी, तो उसे सार्वजनिक किया जाना चाहिए। एक समिति की रिपोर्ट जारी की गई है और कैबिनेट में रखी गई है। क्या इस पर चर्चा नहीं हो सकती? आपने कैबिनेट के साथ जबरदस्ती हिंदी पर चर्चा की। आपने ऐसा इसलिए किया क्योंकि यह एक राष्ट्रीय नीति है। यदि कोई राष्ट्रीय नीति राज्य के सामने आती है, तो उस पर चर्चा करना बहुत महत्वपूर्ण है। देवेंद्र फडणवीस तीन बार मुख्यमंत्री बन चुके हैं। क्या उन्हें इतना ज्ञान नहीं है?”
