
जायेद खान
बॉलीवुड एक्टर जायेद खान आज अपना 45वां जन्मदिन मना रहे है। आज ही के दिन 1980 में जन्मे जायेद खान ने शाहरुख खान के साथ फिल्म ‘मैं हूं न’ से अपने करियर की शुरुआत की थी। इस फिल्म में जायेद खान डायरेक्टर फराह खान की फिल्म में शाहरुख खान के भाई का रोल निभाते नजर आए थे। फराह खान ने इसके साथ निर्देशन में अपनी शुरुआत की थी।
जब जायेद खान को मिला बड़ा ब्रेक
यह कहानी है फिल्म ‘मैं हूं ना’ की, जिसमें शाहरुख खान और सुष्मिता सेन जैसे बड़े सितारों ने मुख्य भूमिकाएं निभाई थीं। फिल्म का निर्देशन फराह खान ने किया था, और यह उनका डायरेक्टोरियल डेब्यू भी था। फिल्म में एक अहम किरदार था लकी का — एक कॉलेज बॉय, जो फिल्म में शाहरुख खान के छोटे भाई के रूप में नजर आता है। इस रोल के लिए शुरुआत में फराह खान की नजर बॉलीवुड के तीन सुपरस्टार्स पर थी। हाल ही में ज़ायेद खान ने इस बारे में एक खुलासा किया। उन्होंने सिद्धार्थ कनन को दिए इंटरव्यू में बताया कि सबसे पहले यह रोल ऋतिक रोशन को ऑफर किया गया था। उस दौर में ऋतिक पहले ही सुपरहिट फिल्में दे चुके थे, लेकिन किसी वजह से बात नहीं बनी। इसके बाद ये रोल सोहेल खान को ऑफर हुआ, फिर अभिषेक बच्चन को, लेकिन किसी न किसी कारण से दोनों ने भी इस ऑफर को ठुकरा दिया।
जब किस्मत ने दी दस्तक
ज़ायेद खान ने एक इंटरव्यू में बताया था कि वह उन दिनों एक गाने की शूटिंग कर रहे थे और उसके कोरियोग्राफी के लिए उन्हें फराह खान की मदद चाहिए थी। इसी सिलसिले में उन्होंने फराह को फोन किया। लेकिन बातचीत के दौरान इससे पहले कि वे अपनी बात पूरी करते, फराह खान ने उन्हें ही वो रोल ऑफर कर दिया जिसे पहले तीन बड़े स्टार्स नकार चुके थे। ज़ायेद के अनुसार, उन्होंने बिना किसी हिचकिचाहट के उस रोल को स्वीकार कर लिया। और इसके बाद जो हुआ, वो इतिहास है। फिल्म ‘मैं हूं ना’ जब रिलीज़ हुई, तो ज़ायेद खान की एक्टिंग और उनकी ऑनस्क्रीन प्रेज़ेंस को खूब सराहा गया। युवाओं के बीच वह रातों-रात एक आइकॉन बन गए।
संघर्षों से भरी रही ज़ायेद की जिंदगी
हालांकि ज़ायेद खान बॉलीवुड के मशहूर एक्टर और प्रोड्यूसर संजय खान के बेटे हैं, लेकिन उनका बचपन और शुरुआती जीवन आसान नहीं रहा। उसी इंटरव्यू में उन्होंने अपने परिवार की मुश्किलों का भी ज़िक्र किया। ज़ायेद ने बताया कि एक बार उनके पिता के शूटिंग सेट पर एक बड़ा हादसा हो गया था, जिसने उनके पूरे परिवार को झकझोर कर रख दिया। इस हादसे की वजह से परिवार की आर्थिक हालत काफी खराब हो गई थी। स्थिति इतनी बिगड़ गई थी कि उन्हें अपना घर तक गिरवी रखना पड़ा और गाड़ियों को बेचकर ऑटो रिक्शा खरीदना पड़ा, ताकि घर का खर्च चलाया जा सके। ज़ायेद बताते हैं कि उस समय उनका परिवार बेहद कठिन दौर से गुजर रहा था, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। उन्होंने मेहनत की, संघर्ष किया और धीरे-धीरे इंडस्ट्री में अपनी पहचान बनानी शुरू की।
मेहनत से मिली नई पहचान
ज़ायेद खान ने अपने अभिनय और मेहनत के बल पर न केवल अपने परिवार को फिर से आर्थिक स्थिरता दिलाई, बल्कि खुद को भी एक बेहतर अभिनेता के रूप में साबित किया। ‘मैं हूं ना’ के बाद उन्होंने कई फिल्मों में काम किया और दर्शकों के बीच अपनी जगह बनाने में कामयाब रहे। इस कहानी से एक बात साफ होती है — कभी-कभी जो मौके हमें अचानक मिलते हैं, वो हमारी जिंदगी की दिशा पूरी तरह से बदल सकते हैं। ज़ायेद खान की कहानी इस बात की मिसाल है कि अगर हौसला हो और मेहनत करने का जज्बा हो, तो कितनी भी बड़ी बाधाएं क्यों न हों, सफलता जरूर मिलती है।
