‘आप की अदालत’ में स्मृति ईरानी ने कहा, “हां, मैंने रेखा गुप्ता और देवेंद्र फडणवीस से कहा था कि एक दिन आप मुख्यमंत्री बनेंगे”


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‘आप की अदालत’ में स्मृति ईरानी

Aap Ki Adalat: पूर्व केंद्रीय मंत्री और अभिनेत्री स्मृति ईरानी ने यह माना कि उन्होंने एक बार रेखा गुप्ता और देवेंद्र फडणवीस दोनों से कहा था कि वे एक दिन मुख्यमंत्री बनेंगे। इंडिया टीवी पर ‘आप की अदालत’ शो में रजत शर्मा के सवालों का जवाब देते हुए स्मृति ईरानी ने खुलासा किया: “रेखा और मैं 15 साल बतौर कार्यकर्ता एक साथ काम करते रहे और उसका कभी स्वभाव नहीं रहा कि मुझे ये चाहिए या मुझे यहां पहुंचना है। उसका स्वभाव हमेशा रहा कि अरे दीदी ये कार्यक्रम मिला है। उसका संचालन कैसे करना है। मेरी अपनी इच्छा थी कि रेखा संगठन के किसी पद पर विद्यमान हो तो वानीती श्रीनिवासन हमारी महिला मोर्चा की राष्ट्रीय अध्यक्ष रहीं। मैं और वानीति 2007 से एक साथ काम कर रहे थे। एक महीने तक मैं वनिती से रेखा को कोई पद देने के लिए कह रही थी। एक दिन मैंने उनसे कहा, एक दिन ये दिल्ली की मुख्यमंत्री होगी, तो रेखा ने अपना सर पीट लिया। दीदी क्या बोल रही हो? मैंने वनिती से कहा- बोल रही हूं न रेखा को पद दे दो। जिस दिन रेखा ने (मुख्यमंत्री पद की) शपथ उन्होंने कहा, ‘दीदी, क्या आप आएंगी?’ दीदी के तौर पर मेरा काम पूरा हो गया। दीदी का काम यहीं तक था।”

फडणवीस के लिए सीएम पद की भविष्यवाणी पर स्मृति ईरानी ने कहा: ” वो मेरे मुंह से निकल गया था। मैं और देवेंद्र किसी फ्लाइट पर चढ़ रहे थे शायद। और क्या 27 साल 28 साल के होंगे। और तब महाराष्ट्र में दिग्गज नेता प्रमोद महाजन जी, गोपीनाथ मुंडे जी, नितिन जी इन सब का दबदबा हमने देखा। हमने उनके नेतृत्व में काम किया है। मैंने कहा कि देवेंद्र एक दिन मुख्यमंत्री बनेगा और देवेंद्र ने मुझे कहा पागल है क्या? इतने बड़े बड़े लोगों की छाया में हम काम कर रहे हैं। मैंने कहा क्या पता… बना तो? तो मैंने कहा ना बीजेपी में एक दूसरे के प्रति अपने लिए नहीं, अपने सहयोगियों के प्रति यह भाव रखना कि हमारा जो होगा देखा जाएगा। तुम कुछ बनो।”

कांग्रेस 15 साल तक विपक्ष में रहेगी

स्मृति ईरानी के “क्योंकि सास भी कभी बहू थी” में काम करने की घोषणा के बाद कांग्रेस द्वारा एक्स हैंडल पर उन्हें “गुड लक” कहने पर, स्मृति ईरानी ने जवाब दिया: “एक वक्त वह भी था जब कांग्रेस पूछती थी कि “स्मृति कौन है?” और आज उनके ऑफिशियल हैंडल से “गुड लक” कहा जाना। तो जो दुश्मन को भी “गुड लक” बोलने को मजबूर कर दे। सोचिए हिंदुस्तान की उस औरत का जज्बा कैसा होगा।”

रजत शर्मा: किसी ने तो यह भी लिखा है कि टीवी पर वापस आ गईं। “लौट के बुद्धू घर को आए। “

स्मृति ईरानी: ” पता नहीं कि वह किसे बुद्धू कह रहे हैं, जो क्षमतावान हो और 25 साल मीडिया और टेलीविजन के साथ साथ पॉलिटिक्स में अपनी पैठ रखता हो। जो जमीन से आता हो, अपनी मेहनत से अपनी किस्मत चमकाता हो, जो विषम परिस्थितियों में भी कहीं न कहीं राष्ट्र के सम्मान में अपनी सेवा देता हो। अगर कांग्रेस के बुद्धिजीवियों को मैं बुद्धू लगती हूं तो मैं बुद्धू ही सही। मैंने फर्श से अर्श तक इस देश को, समाज को देखा है। जो मेहनतकश हैं, सामान्य परिवारों से आते हैं और जो महिला है, अगर कांग्रेस पार्टी को ऐसे लोग बेवकूफ लगते हैं तो वह जाने। शायद इसीलिए अब और 15 साल विपक्ष में रहेंगे।

रजत शर्मा: शायद कांग्रेस को लगा होगा कि अमेठी में स्मृति ईरानी की हार हो गई। अब तो पॉलिटिकल करियर खत्म हो गया है?

स्मृति ईरानी: अमेठी में हार तो 2014 में भी हुई थी। शायद वह भूल गए। मैं 2004 में भी चांदनी चौक से चुनाव हार गई थी। और आप सोचिए अगर 2004 का लोकसभा चुनाव मैं चांदनी चौक से जीत जाती तो क्या मैं स्मृति ईरानी बन पाती जो आज ‘आप की अदालत’ में बैठी है? तो मेरी किस्मत हमेशा जीत ने नहीं लिखी है। कई बार मैंने अपनी हार से भी अपनी किस्मत को नए अंदाज में लिखा है।

रजत शर्मा: आपकी पार्टी के लोगों का कन्फ्यूजन शायद दूर कर दें। वे कह रहे हैं “अभी ना जाओ छोड़ कर, अभी तो दिल भरा नहीं…..”?

स्मृति ईरानी: “मेरी पार्टी में कन्फ्यूजन नहीं है। कॉन्फिडेंस है स्मृति ईरानी को लेकर कि जब-जब समाज और राष्ट्र के सामने कोई चुनौती आएगी, जब-जब पार्टी के माध्यम से राष्ट्र की, समाज की सेवा का कोई भी मौका आएगा और जब-जब स्मृति को हम कहेंगे, वह अपनी रिस्पांसिबिलिटी का निर्वहन करेगी।

नितिन गडकरी मुझे ‘बुढ़िया’ समझते थे

स्मृति ईरानी ने खुलासा किया कि कैसे वरिष्ठ भाजपा नेता नितिन गडकरी ने 2003 में “क्योंकि सास..” धारावाहिक देखकर उन्हें ‘बुढ़िया’ समझा था। उन्होंने महाराष्ट्र के भाजपा नेताओं से पूछा कि उन्हें भाजपा युवा मोर्चा का उपाध्यक्ष क्यों बनाया गया।

स्मृति ईरानी ने कहा: “मैं 2003 में युवा मोर्चा में उपाध्यक्ष बनी थी। उस समय युवा मोर्चे के दूसरे उपाध्यक्ष थे आज के महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस। परभनी से सुजीत सिंह ठाकुर मेरे अध्यक्ष थे और दो महामंत्री थे जो आज महाराष्ट्र में एमएलसी हैं। तो नितिन जी ने सबको बुलाया और कहा तुम्हारा दिमाग खराब हो गया है? उस बूढ़ी औरत को तुमने युवा मोर्चा में पदाधिकारी बनाया है। तो इन सब को जाकर नितिन जी को बोलना पड़ा कि वह पात्र है तुलसी का जो 60 साल की है। यह स्मृति है जो 25 साल की है। तब नितिन जी ने कहा कि ठीक है वरना युवा मोर्चा में 60 साल के लोग क्या कर रहे हैं।”

राहुल गांधी

राहुल गांधी की भविष्य की राजनीतिक संभावनाओं के बारे में पूछे जाने पर, स्मृति ईरानी ने जवाब दिया: “न तो मैं राहुल गांधी हूं और न ही कोई ज्योतिषी। इसके लिए तो राहुल गांधी को ‘आप की अदालत’ में बुलाना होगा। फर्क यह है कि अगर आप एक privileged बैकग्राउंड से हैं तो आप फेलियर अफोर्ड कर सकते हैं। अगर आप privileged बैकग्राउंड से नहीं हैं तो आपको अपने आप को बार-बार relevant और re-invent करना पड़ता है। अगर आप अपने आप को relevant और re-invent नहीं करते तो राजनीति या मीडिया या समाज का कोई भी ऐसा प्रोफेशन हो, आप उसमें बेकार हो जाते हैं। तो राहुल जी पर वह burden नहीं है। उनका नाम काफी है उनके लिए। हम जैसों के लिए हर दिन संघर्ष से शुरू होता है। हर दिन नए शिखर की तलाश होती है।

‘तुलसी’ का रोल

यह पूछे जाने पर कि क्या तुलसी के रूप में उनकी छवि ने उन्हें राजनीति में मदद की, स्मृति ईरानी ने जवाब दिया: ” बिल्कुल नहीं, नुकसान हुआ, क्योंकि जब मैं राजनीति में आई, तब एक्टर्स की यह छवि थी कि वह संजीदा नहीं हैं। वह लेजिस्लेचर करना नहीं जानते। देश में कानून पारित करना नहीं जानते। अगर किसी मंत्रालय में हैं तो गंभीरता से अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन नहीं करते। समय नहीं देते, जनता से नहीं मिलते, गरीबों का काम नहीं करते।”

रजत शर्मा: मैं आपसे इसलिए पूछ रहा हूं क्योंकि सांसद और स्टार प्रचारक के रूप में हेमा मालिनी जब भी जनसभाओं में जाती हैं, तो लोग उनसे शोले का “चल धन्नो” डायलॉग सुनाने के लिए कहते हैं, और फिर वह कहती हैं, “चल धन्नो, आज तेरी बसंती की इज़्ज़त का सवाल है”। क्या लोगों ने आपसे कभी तुलसी के डायलॉग सुनाने के लिए कहा?

स्मृति ईरानी: “टीवी में कभी मेरी इज्जत का सवाल नहीं उठा। लेकिन हेमा जी का पूरा एक्टर के नाते कार्यकाल आईकॉनिक डायलॉग के लिए, आइकॉनिक फिल्म के लिए जाना जाता रहा है। आज भी उनको उसी दृष्टि से देखा जाता है क्योंकि उनकी एक अमिट छाप है देश के कल्चरल मानचित्र पर, जो मीडिया से उत्पन्न होती है। मेरे सीरियल में ऐसा कोई आइकॉनिक डायलॉग था ही नहीं। हम सामान्य परिवारों की सामान्य महिलाओं का जीवन दिखाने का प्रयास कर रहे थे ।

‘क्योंकि’…..दूसरा संस्करण

यह पूछे जाने पर कि क्या केएसबीकेबीटी-1 के पहले संस्करण (29 जुलाई से) में शामिल किरदार इस बार भी दिखाई देंगे, स्मृति ईरानी ने जवाब दिया: “उसके लिए तो आपको कटघरे में एकता कपूर को बिठाना चाहिए था। लेकिन इतना सत्य है कि चैनल हो या एकता कपूर हो, वह जानते हैं कि मेरी जीवन यात्रा पिछले ढाई दशकों में सामाजिक भी रही है और मैं चाहती हूं कि आज की जनरेशन, उनके मुद्दों को भी उठाया जाए। हमारी जनरेशन के साथ कैसे टकराव होता है, घरों में कैसे मनमुटाव होता है, कैसे यंगस्टर्स को लगता है-अरे मम्मी पापा को समझ नहीं आ रहा इंस्टाग्राम पर क्या चल रहा है? स्नैपचैट पर क्या चल रहा है, आपको क्या पता। और माता पिता की जो जिज्ञासा है या थोड़ा बहुत जो उनका डर है और हमसे बड़े जो जेनरेशन वाले हैं वे कहते हैं कि देखा, बच्चे बड़े हुए तो पता चला कितना मुश्किल होता है। तो तीन जनरेशन का कॉन्फिडेंस है, कॉन्फ्लिक्ट है और कहीं ना कहीं एक समागम है। तो मुझे लगता है वह दर्शक देखेंगे तो उन्हें अच्छा लगेगा।”

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