
इंडिया टीवी के चेयरमैन एवं एडिटर-इन-चीफ रजत शर्मा।
पाकिस्तान के वज़ीर-ए-आज़म शहबाज शरीफ ने भारत को धमकी दी है। शहबाज शरीफ ने कहा कि अगर भारत ने पाकिस्तान को उसके हक़ का पानी नहीं दिया तो जंग होगी और अंजाम बुरा होगा। इस्लामाबाद में एक समारोह को संबोधित करते हुए शहबाज़ शरीफ ने कहा, “दुश्मन पाकिस्तान से पानी की एक बूंद भी नहीं छीन सकता। अगर आपने ऐसा करने की कोशिश की, तो हम आपको ऐसा सबक सिखाएंगे जिसे आप कभी नहीं भूलेंगे।”
इस समारोह में पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली ज़रदारी, तमाम मंत्री, पूर्व प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ और आर्मी चीफ आसिम मुनीर मौजूद थे। ऑपरेशन सिन्दूर में बुरी तरह मार खाने के बाद, अपने एयरबेस और फाइटर जेट तबाह करवाने के बाद भी जनरल मुनीर ने इस बार पाकिस्तान के स्वतंत्रता दिवस की थीम ऑपरेशन बुनियान उन मरसूस पर रखा है। जनरल मुनीर पाकिस्तानी आवाम की आंखों में धूल झोंकने के लिए बड़ी बेशर्मी से पाकिस्तान की जीत के दावे कर रहे हैं। इसीलिए बुधवार को पाकिस्तानी वायु सेना ने चीन से मिले JF-17 लड़ाकू विमानों का flypast पेश किया।
पाकिस्तान के हुक्मरान बार-बार भारत को जंग की धमकी क्यों दे रहे हैं? पाकिस्तान के छोटे से लेकर बड़े नेता तक, सांसदों से लेकर दहशतगर्द तंजीमों के मुखिया तक, सब जनरल मुनीर की लाइन पर चल रहे हैं। कोई एटम बम गिराने की धमकी दे रहा है, कोई भारत का नामोनिशान मिटाने का दावा कर रहा है, कोई हिन्दुओं को खत्म करने की कसम खा रहा है। बुधवार को सिंध सूबे के हैदराबाद शहर में बिलावल की पार्टी के मेयर ने भारत के खिलाफ जहर उगला और भारत को, हिंदुओं को धमकियां दी।
ऐसा लगता है कि पाकिस्तान के नेताओं में भारत को धमकी देने की होड़ लगी हुई है। जंग के मैदान में शिकस्त खाने के बाद पाकिस्तान का हर लीडर बयानवीर बना हुआ है। शहबाज़ शरीफ़ की गीदड़भभकी का जवाब दिया भारत में AIMIM चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने। ओवैसी ने कहा कि पाकिस्तान की धमकियों से भारत को कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता, जो शहबाज़ शरीफ़ ख़ुद ये क़बूल कर चुके हैं कि भारत ने मिसाइल मार-मारकर पाकिस्तान की मिट्टी पलीद कर दी, अब वही शहबाज़ किस मुंह से भारत को धमका रहे हैं?
पाकिस्तान के नेता और आर्मी चीफ आसिम मुनीर आजकल इसलिए ज्यादा उछल रहे हैं क्योंकि अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने उनके कंधे पर हाथ रख दिया है। सबसे दिलचस्प बात ये है कि जो पाकिस्तान दहशतगर्दी का ग्लोबल सेंटर है, उसी पाकिस्तान के साथ अमेरिका counter terror talks कर रहा है। इस्लामाबाद में पाकिस्तान और अमेरिका के डिप्लोमैट्स ने आतंकवाद से निपटने के तौर तरीक़ों पर चर्चा की। इस मीटिंग में अमेरिकी विदेश मंत्रालय में counter terrorism के को-ऑर्डिनेटर ग्रेगरी लोगर्फो शामिल हुए। अमेरिका ने तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP), इस्लामिक स्टेट खुरासान और बलोचिस्तान लिबरेशन आर्मी से निपटने में पाकिस्तान की मदद करने का भरोसा दिया। दो दिन पहले ही अमेरिका ने बलोच लिबरेशन आर्मी की माजिद ब्रिगेड पर पाबंदी लगाई थी।
हैरानी की बात ये है कि अमेरिकी सेना के कमांडो ने ही पाकिस्तान में घुसकर ओसामा बिन लादेन को मारा था। मसूद अजहर, हाफिज सईद, ज़की उर रहमान लखवी जैसे दहशतगर्दों को अमेरिका ने ग्लोबल टेरेरिस्ट घाषित कर रखा है और ये सारे आतंकवादी पाकिस्तान में फौज की सरपरस्ती में मजे में रह रहे हैं। लेकिन हैरानी की बात ये है कि अमेरिका ने आतंकवाद के खिलाफ जंग में पाकिस्तान के रोल की तारीफ़ की है। राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने टैरिफ़ के मामले में पाकिस्तान पर मेहरबानी दिखाते हुए सिर्फ़ 19 परसेंट टैरिफ़ लगाया था और पाकिस्तान के साथ जल्दी ही ट्रेड डील साइन करने का भी एलान किया था। ट्रंप ने ये भी कहा था कि अमेरिका पाकिस्तान में तेल का भंडार explore करने जा रहा है।
अमेरिका पाकिस्तान पर आजकल मेहरबान क्यों है, भारत के साथ ट्रंप की समस्या क्या है, इसे भारत के पूर्व राजनयिक विकास स्वरूप ने अच्छे तरीके से समझाया। पहली बात, ट्रंप भारत के BRICS में सक्रिय होने से नाराज़ हैं। ट्रम्प का मानना है कि BRICS एक anti-America alliance है और BRICS डॉलर की जगह alternative currency बनाने पर आमादा है।
दूसरी बात, ट्रंप ने 34 बार कहा कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान का युद्ध रुकवाया लेकिन भारत ने इस बात को कभी स्वीकार नहीं किया। भारत ने बार-बार कहा कि उसने तो पाकिस्तानी सेना के DGMO के अनुरोध पर ceasefire किया। जाहिर है, ये बात भी ट्रंप को बुरी लगी। दूसरी तरफ पाकिस्तान ने ट्रंप को माई-बाप माना, Nobel Peace Prize के लिए ट्रंप के नाम की सिफारिश की।
तीसरी बात, ये सब ट्रंप की pressure tactics का हिस्सा है। वो भारत को अपनी शर्तों पर tariff के लिए मनवाना चाहते हैं। भारत की डेयरी, खेती और GM Crops तीन ऐसे मुद्दे हैं, जिस पर मोदी झुकने को तैयार नहीं है। ये भी ट्रंप की बेचैनी का कारण है।
ट्रंप की एक और परेशानी ये है कि अगर Alaska में ट्रंप और पुतिन की मीटिंग के दौरान कोई रास्ता निकल आता है, रूस और यूक्रेन के बीच ceasefire हो जाता है, तो ट्रंप को रूस पर लगे आर्थिक प्रतिबंध हटाने पड़ेंगे। इसके बिना पुतिन ceasefire के लिए तैयार नहीं होंगे। और अगर रूस से sanctions हट गए तो फिर ट्रंप भारत द्वारा रूस से तेल खरीदने को मुद्दा कैसे बनाएंगे? इस पर objection कैसे करेंगे?
इसीलिए कहा गया है, “इब्तिदा-ए-इश्क़ है, रोता है क्या, आगे-आगे देखिए होता है क्या”। (रजत शर्मा)
देखें: ‘आज की बात, रजत शर्मा के साथ’ 13 अगस्त, 2025 का पूरा एपिसोड