
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप।
वॉशिंगटन/नई दिल्ली: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में भारत पर कुल मिलाकर 50 फीसदी अतिरिक्त टैरिफ लगाने का ऐलान किया है। ट्रंप ने यूक्रेन युद्ध से अमेरिका को हो रहे भारी मुनाफे का जिक्र करते हुए भारत को युद्ध के लिए जिम्मेदार ठहराया है। हालांकि एक्सपर्ट्स का मानना है कि ये सिर्फ कहने की बातें हैं, असल वजहें कुछ और हैं। उन्होंने अमेरिका के इस कदम के पीछे 4 प्रमुख वजहें बताई हैं जिनकी वजह से ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच संबंधों में खटास देखने को मिल रही है।
एक्सपर्ट्स ने बताई ये 4 प्रमुख वजहें
एक्सपर्ट्स के मुताबिक, ट्रंप और पीएम मोदी के रिश्तों में आई तल्खी की कुछ प्रमुख वजहें कुछ इस प्रकार हैं:
- कश्मीर मसले पर असहमति: जुलाई 2019 में पाकिस्तान के तत्कालीन प्रधानमंत्री इमरान खान की अमेरिका यात्रा के दौरान ट्रंप ने दावा किया था कि प्रधानमंत्री मोदी ने उनसे कश्मीर मुद्दे पर मध्यस्थता करने को कहा था। भारत ने इस बयान का खंडन करते हुए स्पष्ट किया कि कश्मीर एक द्विपक्षीय मामला है और इसमें किसी तीसरे पक्ष की भूमिका स्वीकार्य नहीं है। ट्रंप के इस बयान से भारत नाराज हुआ, जिसने दोनों नेताओं के बीच तनाव की शुरुआत की।
- अमेरिकी चुनाव के दौरान रद्द मुलाकात: अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने ट्रंप और डेमोक्रेटिक उम्मीदवार कमला हैरिस, दोनों से मुलाकात के लिए समय मांगा था। ट्रंप ने न केवल समय दिया, बल्कि अपनी रैली में यह भी घोषणा कर दी कि मोदी उनसे मिलने आ रहे हैं। हालांकि, कमला हैरिस ने अंतिम समय में मुलाकात के लिए समय नहीं दिया। इसके बाद, मोदी ने एकतरफा मुलाकात को अनुचित मानते हुए ट्रंप के साथ भी अपनी बैठक रद्द कर दी। इस घटना ने ट्रंप को गहरा ठेस पहुंचाया।
- भारत-पाक सीजफायर पर दावों का टकराव: ट्रंप ने कई मौकों पर, कुल मिलाकर कम से कम 42 बार यह दावा किया है कि भारत और पाकिस्तान के बीच सीजफायर का फैसला उनकी मध्यस्थता का परिणाम है। दूसरी ओर, भारत ने बार-बार स्पष्ट किया है कि यह सीजफायर पाकिस्तान की पहल पर हुआ था। ट्रंप के बार-बार दावे और भारत के खंडन ने दोनों नेताओं के बीच तनाव को और गहरा दिया।
- G7 समिट और वॉशिंगटन मीटिंग का विवाद: कनाडा में आयोजित G7 समिट के दौरान ट्रंप और मोदी की मुलाकात तय थी। लेकिन, ट्रंप अचानक समिट छोड़कर अमेरिका लौट गए और उन्होंने मोदी को वॉशिंगटन आने का न्योता दिया। संयोगवश, उसी दिन पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर की ट्रंप के साथ व्हाइट हाउस में मुलाकात होने वाली थी। मोदी ने वॉशिंगटन जाने से इनकार कर दिया, जिसे ट्रंप ने व्यक्तिगत रूप से लिया।
ट्रंप की कॉल और अनजान नंबर का विवाद
जर्मनी के प्रतिष्ठित अखबार FAZ ने एक और घटना का जिक्र किया है, जिसने इस तनाव को और बढ़ाया। अखबार के मुताबिक, ट्रंप ने अपने नए कार्यकाल में 4 बार प्रधानमंत्री मोदी को फोन किया, लेकिन मोदी ने उनकी कॉल रिसीव नहीं की। इसका कारण यह बताया गया कि ट्रंप ने अपने पिछले कार्यकाल में मोदी से अपना प्राइवेट नंबर शेयर किया था। हालांकि, नए कार्यकाल में सुरक्षा कारणों से ट्रंप ने अपना फोन और नंबर बदल लिया। माना जा रहा है कि उन्होंने अपने नए नंबर से ही मोदी को कॉल किया, जो एक अनजान नंबर था। इस वजह से पीएम मोदी ने कॉल रिसीव नहीं की। एक्सपर्ट्स का मानना है कि ट्रंप ने इसे व्यक्तिगत अपमान के रूप में लिया और इसका असर टैरिफ के फैसले पर दिखाई दे रहा है।