
अमेरिकी राष्ट्रीय आर्थिक परिषद के निदेशक Kevin Hassett
वाशिंगटन डीसी : अमेरिका द्वारा बुधवार को भारतीय वस्तुओं पर 50 प्रतिशत टैरिफ लागू करने के बाद दोनों देशों के संबंध हाल के दिनों में अपने सबसे बुरे दौर से गुजर रहे हैं। वहीं दोनों देशों के बीच बयानों का सिलसिला भी जारी है। अमेरिकी राष्ट्रीय आर्थिक परिषद के निदेशक और व्हाइट हाउस के सलाहकार केविन हैसेट ने अमेरिका और भारत के संबंधों को जटिल बताते हुए कहा है कि अगर भारत नहीं मानता है तो अमेरिका अपना रुख नरम नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि अमेरिकी उत्पादों के लिए अपने बाज़ार खोलने को लेकर भारत हठधर्मिता अपना रहा है। हैसेट ने भारत पर लगाए गए अमेरिकी टैरिफ को यूक्रेन संघर्ष को लेकर रूस पर दबाव बनाने के व्यापक जियो पॉलिटिक्स के प्रयासों से जोड़ा।
राष्ट्रपति ट्रंप नहीं देंगे रियायत
व्हाइट हाउस में एक बैठक के दौरान अमेरिकी मीडिया से बात करते हुए हैसेट ने कहा कि अगर भारत अपनी जिद से पीछे नहीं हटता है तो राष्ट्रपति ट्रंप भी कोई रियायत नहीं देंगे। उन्होंने कहा कि यह एक जटिल रिश्ता है और इसका एक हिस्सा रूस पर दबाव डालने की हमारी कोशिश से जुड़ा हुआ है, ताकि यूक्रेन-रूस को लेकर शांति समझौता हो सके और लाखों लोगों की जान बचाई जा सके। इसके साथ ही भारत का अपने बाजार खोलने में अड़ियल रवैया भी इसमें शामिल है।
रूस से तेल की खरीद बनी भारी टैरिफ की वजह?
हैसेट का यह बयान ऐसे समय में आया है जब वाशिंगटन ने भारतीय आयातों पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगा दिया है। यह टैरिफ अमेरिकी सीमा शुल्क एवं सीमा सुरक्षा (सीबीपी) द्वारा प्रकाशित एक ड्राफ्ट नोटिस के बाद लगाया गया है। नोटिस के अनुसार, ये अतिरिक्त शुल्क राष्ट्रपति के 6 अगस्त, 2025 के कार्यकारी आदेश 14329 को प्रभावी बनाने के लिए लगाए जा रहे हैं, जो भारत से आयातित वस्तुओं के आयात पर शुल्क की एक नई दर निर्धारित करता है। अमेरिका ने पहले 25 प्रतिशत का टैरिफ लगाया था जिसे बढ़ाकर 50 प्रतिशत कर दिया है। अमेरिका चाहता था कि भारत रूस से तेल नहीं खरीदे। लेकिन भारत ने अपने हितों को ख्याल रखते हुए रूस से सस्ता तेल खरीदना जारी रखा।