
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप।
वॉशिंगटन/नई दिल्ली: अमेरिका ने भारत पर 50% का भारी-भरकम टैरिफ लगा दिया है, जो इसके किसी भी व्यापारिक साझेदार पर लगाया गया सबसे बड़ा टैरिफ है। अमेरिकी वित्तीय कंपनी जेफरीज की एक ताजा रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इस टैरिफ की असली वजह राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का भारत के प्रति ‘निजी खुन्नस’ है। भारत ने पाकिस्तान के साथ अपने पुराने विवाद, खासकर कश्मीर मुद्दे पर ट्रंप की मध्यस्थता को साफ तौर पर ठुकरा दिया था, जिससे ट्रंप का नोबेल शांति पुरस्कार जीतने का सपना चकनाचूर हो गया, और यही बात उन्हें नाराज कर गई।
ट्रंप के बयान को भारत ने किया खारिज
रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप चाहते थे कि भारत और पाकिस्तान के बीच दशकों पुरानी दुश्मनी को खत्म करने में वह अहम भूमिका निभाएं। ट्रंप, जो हमेशा से अपनी सियासी नौटंकियों के लिए मशहूर हैं, ने कई बार दावा किया कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच ‘परमाणु युद्ध’ को रोक लिया। लेकिन भारत ने साफ कर दिया कि उसने पाकिस्तान के साथ सीधे बातचीत करके ही सीजफायर किया था, न कि किसी तीसरे पक्ष की मदद से। ट्रंप के बार-बार सीजफायर का श्रेय लेने की कोशिशों के बीच भारत ने लगातार साफ किया कि सीजफायर की मांग पाकिस्तान की तरफ से हुई थी और ट्रंप की इसमें कोई भूमिका नहीं थी।
भारत के रुख ने तोड़ दिया ट्रंप का ख्वाब
भारत का रुख हमेशा से साफ रहा है कि कश्मीर जैसे संवेदनशील मसले पर वह किसी तीसरे देश की मध्यस्थता को बर्दाश्त नहीं करेगा। इस साल की शुरुआत में ट्रंप ने एक बार फिर कश्मीर मुद्दे पर मध्यस्थता की बात उठाई, जिससे भारत नाराज हो गया। जेफरीज की रिपोर्ट कहती है कि भारत ने अपनी इस ‘रेड लाइन’ को बनाए रखा, भले ही इसके लिए उसे भारी आर्थिक नुकसान का खतरा उठाना पड़ा। इससे ट्रंप के अहम को ठेस पहुंची और उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार के लिए अपनी उपलब्धि को दुनिया के सामने पेश करने का मौका नहीं मिला।
भारत-अमेरिका रिश्तों में आया तनाव
टैरिफ ने भारत और अमेरिका के रिश्तों को गहरी चोट पहुंचाई है। भारत को एशिया में चीन के खिलाफ अमेरिका का एक अहम साझेदार माना जाता है, लेकिन टैरिफ ने दोनों देशों के रिश्तों में खटास ला दी है। रिपोर्ट में एक और अहम मुद्दे का जिक्र करते हुए कहा गया है कि अमेरिका भारत के कृषि और डेयरी बाजार में ज्यादा पहुंच चाहता है, लेकिन भारत के लिए ये दोनों क्षेत्र बेहद संवेदनशील हैं। यह सेक्टर देश की 40% वर्कफोर्स को रोजगार देता है। यही वजह है कि भारत ने इन क्षेत्रों को विदेशी कंपनियों के लिए खोलने से इनकार कर दिया है, जिसके चलते मार्च से चल रही द्विपक्षीय व्यापार वार्ता भी अधर में लटक गई है।
राष्ट्रीय हितों से समझौता नहीं करेगा भारत
जेफरीज की रिपोर्ट साफ कहती है कि ट्रंप का यह कदम न सिर्फ आर्थिक बल्कि निजी और सियासी कारणों से भी प्रेरित है। भारत ने अपनी नीतियों पर अडिग रहकर यह दिखा दिया कि वह अपने राष्ट्रीय हितों से समझौता नहीं करेगा, फिर चाहे वह कश्मीर का मसला हो या किसानों का हित। लेकिन इस टकराव का असर दोनों देशों के रिश्तों और वैश्विक व्यापार पर लंबे समय तक देखने को मिल सकता है।अब सवाल यह है कि क्या भारत और अमेरिका इस तनाव को कम करने के लिए कोई नया रास्ता निकाल पाएंगे, या फिर यह खटास और गहरी होगी? इसका जवाब वक्त ही देगा।