उत्तर प्रदेश सरकार ने पूर्व सैनिकों और दिव्यांगों को एक तोहफा दिया है। अब इन्हें स्टाम्प शुल्क में छूट मिलेगी, जो पहले से सिर्फ महिलाओं को मिलती आ रही है। यह घोषणा बीते गुरुवार को स्टाम्प और पंजीकरण विभाग की एक बैठक के दौरान की गई, जहां मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सरकारी कार्यकुशलता बढ़ाने के उद्देश्य से कई निर्देश भी जारी किए। पूर्व सैनिकों और दिव्यांगों को अब 1 करोड़ रुपये तक की संपत्ति की खरीदारी पर अब स्टांप शुल्क में 1 प्रतिशत की छूट मिलेगी।
छूट के मौजूदा नियम
नई नीति के तहत, महिलाओं के नाम पर खरीदी गई 1 करोड़ रुपये तक की संपत्ति जिसमें जमीन या घर शामिल हैं, पर अब स्टांप शुल्क में 1 प्रतिशत की छूट मिलेगी। पहले, यह लाभ 10 लाख रुपये तक की संपत्ति तक सीमित था, जिसकी अधिकतम छूट ₹10,000 थी। हालांकि, नए फैसले के साथ, यह छूट ₹1 करोड़ तक की संपत्ति तक बढ़ा दी गई है, जिससे राज्य में महिलाओं को अधिक वित्तीय लाभ सुनिश्चित हुआ है।
₹20,000 से अधिक के रजिस्ट्रेशन शुल्क का ई-भुगतान अनिवार्य
पीटीआई की खबर के मुताबिक, एक बयान में कहा गया है कि 5 जिलों में एक पायलट परियोजना के सकारात्मक परिणामों के आधार पर, मुख्यमंत्री आदित्यनाथ ने निर्देश दिया कि सभी जिलों में 20,000 रुपये से अधिक के रजिस्ट्रेशन शुल्क का ई-भुगतान अनिवार्य किया जाए। उन्होंने धोखाधड़ी पर अंकुश लगाने के लिए आधार प्रमाणीकरण को लागू करने और विकास प्राधिकरणों के आवंटियों के लिए प्रक्रियाओं को सरल बनाने हेतु एकल-खिड़की ई-पंजीकरण प्रणाली लागू करने का भी आह्वान किया।
रिक्त पदों को जल्द से जल्द भरने के निर्देश
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को रिक्त पदों को जल्द से जल्द भरने के निर्देश दिए, और स्टाम्प बिक्री के लिए और विकल्प तलाशने तथा विक्रेताओं के कमीशन को युक्तिसंगत बनाने को भी कहा। उन्होंने घोषणा की कि छोटे और मध्यम स्तर के किराये के लिए 10 साल तक के लीज एग्रीमेंट पर स्टाम्प शुल्क और पंजीकरण शुल्क माफ कर दिए जाएंगे। बैठक में स्टाम्प एवं पंजीयन मंत्री रवींद्र जायसवाल भी मौजूद थे, जहाँ डिजिटलीकरण में उल्लेखनीय प्रगति की जानकारी दी गई।
अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को बताया कि 2002 से 2017 तक पंजीकृत 99 प्रतिशत विलेखों का डिजिटलीकरण हो चुका है, जबकि वर्तमान में 98 प्रतिशत से अधिक पंजीकरण ई-स्टाम्प के माध्यम से किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि विसंगतियों को दूर करने के लिए सभी जिलों में मूल्यांकन सूचियों में संशोधन किया गया है और सुरक्षा बढ़ाने के लिए उप-पंजीयक कार्यालयों में सीसीटीवी कैमरे लगाए जा रहे हैं।