बिहार चुनाव: राहुल गांधी ने अति पिछड़ा वर्ग के लिए खोला पिटारा, EBC से किए 10 वादे, जानें क्या क्या


कांग्रेस नेता राहुल गांधी- India TV Hindi
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कांग्रेस नेता राहुल गांधी

पटना: कांग्रेस ने बुधवार को नवंबर में होने वाले बिहार विधानसभा चुनाव से पहले अत्यंत पिछड़ा वर्ग (EBC) के लिए शिक्षा और रोजगार में आरक्षण पर केंद्रित 10 सूत्री कार्यक्रम की घोषणा की। इसमें वादा किया गया है कि अगर कांग्रेस राजद के नेतृत्व वाले बिहार गठबंधन के साथ मिलकर इंडिया ब्लॉक के तहत सरकार बनाती है, तो इस मेनिफेस्टो में किए गए वादे तुरंत पूरे किए जाएंगे। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने कांग्रेस कार्य समिति (सीडब्ल्यूसी) की बैठक के दौरान पटना में संकल्प पत्र जारी करते हुए जानें क्या कहा, और क्या है इस संकल्प पत्र में….

अतिपिछड़ा न्याय संकल्प

  1.  ‘अतिपिछड़ा अत्याचार निवारण अधिनियम’ पारित किया जाएगा।


     

  2. अतिपिछड़ा वर्ग के लिए पंचायत तथा नगर निकाय में वर्तमान 20% आरक्षण को बढ़ाकर 30% किया जाएगा।

     
  3.  आबादी के अनुपात में आरक्षण की 50% की सीमा को बढ़ाने हेतु, विधान मंडल पारित कानून को संविधान की नौवीं अनुसूची में शामिल करने के लिए केंद्र सरकार को भेजा जाएगा।

     
  4.  नियुक्तियों की चयन प्रक्रिया में “Not Found Suitable” (NFS) जैसी अवधारणा को अवैध घोषित किया जाएगा।

     
  5. अतिपिछड़ा वर्ग की सूची में अल्प या अति समावेशन (under- or over-inclusion) से संबंधित सभी मामलों को एक कमेटी बनाकर निष्पादित किया जाएगा।

     
  6. अतिपिछड़ा, अनुसूचित जाति, जन-जाति तथा पिछड़ा वर्ग के सभी आवासीय भूमिहीनों को शहरी क्षेत्रों में 3 डेसिमल तथा ग्रामीण क्षेत्रों में 5 डेसिमल आवासीय भूमि उपलब्ध करायी जाएगी।

     
  7. UPA सरकार द्वारा पारित ‘शिक्षा अधिकार अधिनियम’ (2010) के तहत निजी विद्यालयों में नामांकन हेतु आरक्षित सीटों का आधा हिस्सा अतिपिछड़ा, पिछड़ी जाति, अनुसूचित जाति और जन-जाति के बच्चों हेतु निर्धारित किया जाएगा।

     
  8. 25 करोड़ रुपयों तक के सरकारी ठेकों/आपूर्ति कार्यों में अतिपिछड़ा, अनुसूचित जाति, जनजाति और पिछड़ी जाति के लिए 50% आरक्षण का प्रावधान किया जाएगा।

     
  9. संविधान की धारा 15 (5) के अंतर्गत राज्य के सभी निजी शिक्षण संस्थानों के नामांकन हेतु आरक्षण लागू किया जाएगा।

     
  10. आरक्षण की देखरेख के लिए उच्च अधिकार प्राप्त आरक्षण नियामक प्राधिकरण का गठन किया जाएगा, और जातियों की आरक्षण सूची में कोई भी परिवर्तन केवल विधान मंडल की अनुमति से ही संभव होगा।

 





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