क्या सस्ती होगी आपकी EMI? RBI की ब्याज दरों पर आज से एमपीसी की अहम बैठक, अर्थशास्त्रियों की नजरें टिकीं


भारतीय रिजर्व बैंक का कार्यालय।- India TV Paisa

Photo:PTI भारतीय रिजर्व बैंक का कार्यालय।

भारतीय रिजर्व बैंक यानी आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की मीटिंग आज, 29 सितंबर से शुरू होने जा रही है, जो 1 अक्टबर तक चलेगी। आम लोगों से लेकर बाजार विशेषज्ञों तक सभी की निगाहें इस पर टिकी हैं। सवाल बड़ा है, क्या आपकी EMI सस्ती होगी? बढ़ती महंगाई और वैश्विक आर्थिक हालात के बीच अब आरबीआई ब्याज दरों में बदलाव करेगा या नहीं, इस पर सबकी नजर है। अर्थशास्त्रियों का मानना है कि केंद्रीय बैंक फिलहाल “वेट एंड वॉच” की नीति अपना सकता है, लेकिन कुछ विशेषज्ञों को रेट कट यानी रेपो रेट में कटौती की उम्मीद भी है। बैठक के फैसले से न सिर्फ होम और ऑटो लोन लेने वालों को राहत मिल सकती है, बल्कि इसका असर शेयर बाजार और निवेशकों की रणनीतियों पर भी पड़ेगा।

क्या कहते हैं अर्थशास्त्री?

इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक, इक्रा लिमिटेड की मुख्य अर्थशास्त्री अदिति नायर की राय में मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) द्वारा 1 अक्टूबर 2025 की समीक्षा घोषणा में रेपो दर पर पहले वाली स्थिति बनाए रखने की उम्मीद है। उनका कहना है कि जीएसटी सुधारों के मांग पर सकारात्मक प्रभाव, वित्त वर्ष 2026 की पहली तिमाही में अपेक्षा से अधिक मजबूत जीडीपी वृद्धि और मुद्रास्फीति के रुझान का सपोर्ट है, जो जीएसटी सुधारों के कारण कम हुआ है, लेकिन उसके बाद ऊपर की ओर बढ़ने की उम्मीद है। 

आईडीएफसी फर्स्ट बैंक की मुख्य अर्थशास्त्री गौरा सेनगुप्ता का भी कहना है कि जीएसटी के प्रभाव और टैरिफ पर स्पष्टता की प्रतीक्षा में आरबीआई अक्टूबर में भी रुक सकता है। अर्थशास्त्रियों का मानना ​​है कि आगामी नीतिगत दर में एमपीसी अपना ‘तटस्थ’ रुख बनाए रखेगी। तटस्थ रुख का मतलब होगा कि बदलते आर्थिक आंकड़ों के आधार पर ब्याज दरें किसी भी दिशा में बढ़ सकती हैं। यहां आपको बता दें, अप्रैल-जून 2025 की तिमाही में जीडीपी वृद्धि दर पांच तिमाहियों के टॉप लेवल 7.8 प्रतिशत पर पहुंच गई, जबकि एक साल पहले इसी अवधि में यह 6.5 प्रतिशत और जनवरी-मार्च 2025 में 7.4 प्रतिशत थी।

ब्याज दरों में कटौती करना उचित और तर्कसंगत

भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) के समूह मुख्य आर्थिक सलाहकार सौम्य कांति घोष ने कहा कि ब्याज दरों में कटौती करना उचित और तर्कसंगत है, लेकिन इसके लिए आरबीआई द्वारा सोच-समझकर संवाद की आवश्यकता होगी, क्योंकि जून के बाद ब्याज दरों में कटौती की शर्तें वास्तव में अधिक ऊंची हैं। नोमुरा ने एक रिपोर्ट में कहा कि चूंकि बाजार फिलहाल अगले कुछ महीनों में केवल 10 आधार अंकों की कटौती का अनुमान लगा रहा है, इसलिए हम जोखिम/लाभ को आकर्षक मानते हैं।

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