बिहार: NDA गठबंधन में सीट बंटवारे पर फंसा पेंच, दिल्ली रवाना हुए धर्मेंद्र प्रधान, चिराग पासवान से करेंगे मीटिंग


Dharmendra Pradhan- India TV Hindi
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धर्मेंद्र प्रधान

पटना: बिहार में विधानसभा चुनावों की घोषणा हो चुकी है लेकिन NDA में सीट शेयरिंग को लेकर पेंच फंस गया है। इस मामले को सुलझाने के लिए बीजेपी के बिहार चुनाव प्रभारी धर्मेंद्र प्रधान, बिहार से दिल्ली के लिए रवाना हो गए हैं। वह दिल्ली में लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के अध्यक्ष चिराग पासवान से मुलाकात करेंगे।

क्यों फंसा है पेंच?

मिली जानकारी के मुताबिक, ज्यादा सीटों की मांग को लेकर चिराग पासवान और हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (हम) प्रमुख जीतन राम मांझी के बीच पेंच फंसा हुआ है। इसी मामले को सुलझाने के लिए धर्मेंद्र प्रधान दिल्ली में चिराग पासवान से मुलाकात करेंगे।

बिहार में कब से हैं विधानसभा चुनाव?

चुनाव आयोग ने आज बिहार के विधानसभा चुनाव के लिए तारीखों का ऐलान कर दिया। चुनाव आयोग ने बताया कि बिहार में 2 फेस में विधानसभा चुनाव होंगे, जिसमें पहले फेज में 6 नवंबर और दूसरे फेज में 11 नवंबर  को वोटिंग होगी। 14 नवंबर को चुनाव के नतीजे आ जाएंगे। 

बिहार में कितनी है वोटरों की संख्या?

चुनाव आयोग के मुताबिक, बिहार में कुल वोटरों की संख्या 7,43,55,976 है, जिसमें जनरल वोटर 7,41,92,357 हैं और सर्विस वोटर 1,63,619 हैं। बिहार में 18 से 19 साल के युवा वोटरों की संख्या 14,01,150 है। बिहार में कुल दिव्यांगजन मतदाताओं की संख्या 7,20,709 है। कुल थर्ड जेंडर 1,725 हैं। कुल वरिष्ठ नागरिकों (85+) की संख्या 4,03,985 है।

बिहार में क्या है सीटों का गणित?

चुनाव आयोग के मुताबिक, बिहार में 243 सीटों पर विधानसभा चुनाव होंगे, जिसमें 38 सीटें एससी के लिए 2 सीटें एसटी के लिए रिजर्व हैं। 6 नवंबर को बिहार में 121 सीटों पर चुनाव होगा और 11 नवंबर को 122 सीटों पर चुनाव होगा। ऐसे में एनडीए के सामने ये एक बड़ी चुनौती है कि वह अपने घटक दलों को कितनी सीटें दे। चिराग पासवान और जीतन राम मांझी अपनी-अपनी पार्टी के लिए जितनी सीटें मांग रहे हैं, उसी बात को लेकर पार्टी हाईकमान सोच में पड़ गया है। सीट बंटवारे के इस पेंच को सुलझाना इतना आसान नहीं है क्योंकि बिहार में चिराग पासवान की पार्टी के पास अच्छे-खासे वोटर हैं, वहीं मांझी भी बिहार के पुराने मंझे हुए नेता हैं। दोनों में से किसी को भी नाराज करना हाईकमान के लिए नुकसान साबित हो सकता है।





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