‘लाड़की बहिन’ बनकर उड़ाए करोड़ों रुपये! 12 हजार से ज्यादा मर्द निकाल ले गए महिलाओं की स्कीम का पैसा


लाड़की बहिन योजना में...- India TV Paisa

Photo:CANVA लाड़की बहिन योजना में घोटाला

Ladki Bahin Yojana: महिला सशक्तिकरण और आर्थिक मदद के लिए राज्य सरकारों और केंद्र सरकार द्वारा चलाई जाने वाली योजनाओं में से एक है मुख्यमंत्री माझी लाड़की बहिन योजना। यह योजना सिर्फ 21 से 65 साल तक की महिलाओं के लिए है, जिसमें पात्र महिलाओं को हर महीने 1500 रुपये की आर्थिक सहायता दी जाती है। लेकिन इस योजना में एक बड़ा घोटाला सामने आया है, जिसने महाराष्ट्र सरकार और जनता दोनों के होश उड़ा दिए हैं।

लाइव मिंट में छपी खबर के अनुसार, एक RTI के खुलासे में यह सामने आया कि इस योजना का फायदा 12,431 पुरुषों ने महिलाओं के रूप में आकर उठाया। इसके अलावा, 77,980 अपात्र महिलाओं को भी योजना का लाभ मिल गया। इस घोटाले से सरकार को कुल 164.52 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ, जिसमें पुरुषों को दिए गए 24.24 करोड़ रुपये और अपात्र महिलाओं को 12 महीने तक दिया गया 140.28 करोड़ रुपये शामिल है।

सरकारी कर्मचारियों की भी मिली सहभागिता

घोटाले में सिर्फ लाभार्थी ही नहीं, बल्कि सरकारी कर्मचारी भी शामिल पाए गए। आरटीआई के मुताबिक, लगभग 2,400 कर्मचारियों ने इस योजना में गड़बड़ी की। इनमें आयुर्वेद निदेशालय के 817, जिला परिषद् के 1183, समाज कल्याण विभाग के 219 और कृषि विभाग के 128 कर्मचारी शामिल हैं।

सरकार ने उठाए कदम

जांच के बाद इन अपात्र पुरुषों और महिलाओं को लाभार्थियों की लिस्ट से हटा दिया गया है। हालांकि, इनसे वसूली या कोई अन्य कार्रवाई अभी तक स्पष्ट नहीं हुई है। सरकार का कहना है कि यह घोटाला हिमखंड का सिरा मात्र है और आगे की जांच से और भी बड़े पैमाने पर गड़बड़ी सामने आ सकती है।

लाड़की बहिन योजना का लाभ कौन उठा सकता है?

  • यह योजना केवल 21-65 साल की उम्र की महिलाओं के लिए है।
  • महिलाओं को महाराष्ट्र की निवासी होना आवश्यक है।
  • ऑनलाइन आवेदन अनिवार्य है।
  • विवाहित, अविवाहित और तलाकशुदा महिलाएं आवेदन कर सकती हैं।
  • परिवार की सालाना आय 2.5 लाख रुपये से अधिक नहीं होनी चाहिए।
  • कोई अन्य सरकारी योजना का लाभ लेने वाली महिला इस योजना का फायदा नहीं उठा सकती।

आपको बता दें कि वर्तमान में लगभग 2.41 करोड़ महिलाएं इस योजना का लाभ उठा रही हैं, जिससे सरकार पर हर महीने लगभग 3,700 करोड़ रुपये का वित्तीय बोझ पड़ता है। अधिकारी चेतावनी दे रहे हैं कि जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ेगी, योजना के गलत इस्तेमाल का आंकड़ा और बढ़ सकता है।

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