
अनंत सिंह और दुलारचंद यादव।
पटना: बिहार विधानसभा चुनाव के बीच मोकामा में गुरुवार को हुई दुलारचंद यादव की हत्या ने इलाके को हिंसा की आग में झुलसाकर रख दिया है। शुरुआती पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट से सनसनीखेज खुलासा हुआ है कि दुलारचंद की मौत गोली लगने से नहीं, बल्कि शरीर पर लगी आंतरिक चोटों से हुई। बाढ़ सब-डिवीजनल अस्पताल में तीन डॉक्टरों की टीम ने शव का परीक्षण किया जिसमें पता चला कि गोली दुलारचंद यादव के पैर के आरपार हो गई थी।
‘गोली शरीर में फंसी नहीं मिली’
पोस्टमॉर्टम करने वाली टीम में शामिल डॉ. अजय कुमार ने बताया कि पैर के एंकल जॉइंट के पास गोली का निशान है, जो आर-पार हो चुकी है, लेकिन गोली शरीर में फंसी नहीं मिली। उन्होंने कहा, ‘मौत गोली से नहीं हुई। हाथ, सीना और कंधे की हड्डियों में फ्रैक्चर मिले हैं। आंतरिक चोटें गंभीर हैं, जो दबाव या भारी चीज से लगी लगती हैं। बाहर के जख्म गिरने या छटपटाहट से भी हो सकते हैं। एक्स-रे रिपोर्ट आने पर और स्पष्टता होगी। मौत की वजह गोली नहीं बल्कि अंदरूनी चोट हो सकती है।’
‘हत्या के मामले में तीन एफआईआर दर्ज हुई हैं’
दुलारचंद यादव की हत्या जनसुराज पार्टी के उम्मीदवार पीयूष प्रियदर्शी के प्रचार के दौरान तारताड़ गांव के पास हुई। दुलारचंद यादव समुदाय के प्रभावशाली नेता थे और अनंत सिंह के पुराने विरोधी माने जाते थे। पुलिस ने दुलारचंद के पोते की शिकायत पर जेडीयू प्रत्याशी अनंत सिंह, उनके भतीजों रणवीर सिंह और कर्मवीर सिंह समेत 5 लोगों के खिलाफ नामजद FIR दर्ज की है। FIR में हत्या, हत्या का प्रयास और अन्य धाराएं शामिल हैं। इलाके के एसपी विक्रम सिंह ने कहा, ‘हत्या के मामले में तीन एफआईआर दर्ज हुई हैं। एक दुलारचंद के परिवार की ओर से, जिसमें अनंत सिंह आरोपी हैं। शवयात्रा के दौरान पथराव की घटना पर दूसरी एफआईआर हुई है, जिसमें दो गिरफ्तारियां हो चुकी हैं। जांच पूरी निष्पक्षता से चल रही है।’
दुलारचंद और अनंत सिंह के समर्थकों में भिड़ंत
बता दें कि शुक्रवार सुबह मोकामा में मौत का सन्नाटा पसरा था। करीब दस बजे दुलारचंद का शव पोस्टमॉर्टम के लिए बाढ़ अस्पताल ले जाया जा रहा था। तारताड़ से अस्पताल की दूरी करीब 25 किलोमीटर है। हजारों लोगों का काफिला साथ चला। बीच-बीच में शव को श्रद्धांजलि दी जा रही थी, लेकिन रास्ते में अनंत सिंह के समर्थक और दुलारचंद के समर्थक आमने-सामने भिड़ गए। शव पर सवार ट्रैक्टर पर सवार होकर RJD उम्मीदवार वीणा देवी (बाहुबली सूरजभान सिंह की पत्नी) भी शामिल हुईं। उनके समर्थकों ने अनंत सिंह के खिलाफ नारेबाजी शुरू की, जिससे भड़कते हुए अनंत सिंह समर्थकों ने पथराव कर दिया।
वीणा देवी को गाड़ियां छोड़कर भागना पड़ा
आरोप है कि अनंत सिंह के समर्थकों ने शव ले जा रही गाड़ी पर भी पत्थर फेंके। जवाब में दुलारचंद समर्थकों ने लाठी-डंडे चलाए। पथराव से पोस्टमॉर्टम में देरी हुई और शाम करीब पांच बजे शव सौंपा गया जिसके बाद भारी सुरक्षा में अंतिम संस्कार हो गया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, दुलारचंद समर्थकों और अनंत सिंह के लोगों के बीच कई जगह झड़पें हुईं। आरजेडी उम्मीदवार वीणा देवी के काफिले की स्कॉर्पियो गाड़ी तोड़ दी गई। हालात इतने बिगड़े कि वीणा देवी को गाड़ियां छोड़कर मौके से भागना पड़ा। दुलारचंद समर्थकों का आरोप है कि अनंत सिंह को सत्ता का संरक्षण है, इसलिए वे बेखौफ होकर यादवों पर हमला करवा रहे हैं। वहीं, अनंत सिंह के समर्थक दावा कर रहे हैं कि दुलारचंद के लोग ही आक्रामक थे।
EC ने बिहार के डीजीपी से तलब की रिपोर्ट
अनंत सिंह ने हत्या में अपना और समर्थकों का हाथ होने से इनकार करते हुए सूरजभान सिंह पर आरोप लगाए हैं। दुलारचंद की हत्या पर् प्रतिक्रिया देते हुए सूरजभान सिंह ने कहा कि जो हुआ, वह दुखद है। उन्होंने कहा, ‘लोकतंत्र के लिए अच्छा नहीं। इस मर्डर की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, रिटायर्ड जज से कराई जाए। मामला गंभीर है। वर्तमान में लॉ एंड ऑर्डर की जिम्मेदारी चुनाव आयोग की है। आयोग को देखना चाहिए कि ऐसी घटना दोबारा न हो।’ वहीं, EC ने बिहार के DGP से इस पूरे मामले पर रिपोर्ट तलब की है। DGP को जल्द से जल्द चुनाव अधिकारियों को विस्तृत रिपोर्ट देने को कहा गया है।
प्रशांत किशोर, तेजस्वी यादव ने साधा निशाना
जनसुराज पार्टी प्रमुख प्रशांत किशोर ने इसे जंगलराज बताया। उन्होंने कहा, ‘लालू राज हो या नीतीश राज, जंगलराज दोनों में है। दुलारचंद की हत्या बिहार में कानून व्यवस्था की नाकामी है।’ आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने ट्वीट किया, ‘दुलारचंद की हत्या सबके सामने हुई। सबूत हैं, गवाह हैं, फिर भी आरोपी की गिरफ्तारी क्यों नहीं? सरेआम हत्या के बाद अपराधियों को संरक्षण देने वाले जंगलराज की बात कर रहे हैं। इससे बड़ी बेशर्मी क्या हो सकती है? क्या यही सुशासन है? कहां है पुलिस, कहां है कानून व्यवस्था?’
कभी लालू के करीबी थे दुलारचंद यादव
दुलारचंद, जो कभी लालू यादव के करीबी थे, लंबे समय से पीयूष प्रियदर्शी का समर्थन कर रहे थे। वे चाहते थे कि चुनाव में तेजस्वी यादव मोकामा से अनंत सिंह के खिलाफ पीयूष को टिकट दें। तेजस्वी ने पीयूष के साथ रोड शो किया, कलम बांटीं लेकिन आखिर में वीणा देवी को टिकट मिला, जिससे दुलारचंद नाराज हो गए। फिर प्रशांत किशोर ने पीयूष को जनसुराज टिकट दिया, तो दुलारचंद उनके साथ कैंपेन में लग गए। गुरुवार को चुनाव प्रचार के दौरान ही दुलारचंद यादव की हत्या हो गई।
