Rajat Sharma’s Blog | नीतीश या तेजस्वी: चुनावी दौड़ में आगे कौन?


Rajat Sharma Blog, Rajat Sharma Blog Latest, Rajat Sharma- India TV Hindi
Image Source : INDIA TV
इंडिया टीवी के चेयरमैन एवं एडिटर-इन-चीफ रजत शर्मा।

बिहार की चुनाव रैलियों में गुरुवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भविष्यवाणी की। कहा, इस बार बिहार में NDA की ऐतिहासिक जीत होगी और जंगलराज वालों की ऐतिहासिक हार होगी, RJD और कांग्रेस को अब तक की सबसे कम सीटें मिलेंगी। मोदी ने तेजस्वी यादव और राहुल गांधी पर करारे वार किये। मोदी ने कहा कि जमानत पर छूटे दो युवराज बिहार के लोगों से झूठे वादे करने में जुटे हैं, उन्हें गालियां दे रहे हैं, छठ मैया का कठोर व्रत करने वाली महिलाओं को ड्रामेबाज बता रहे हैं, ऐसे लोगों को बिहार के लोग सबक सिखाएंगे।

मोदी ने कहा कि कट्टा, कटुता, क्रूरता, कुशासन और करप्शन वाली RJD के नेता जब सुशासन की बात करते हैं तो हंसी आती है, उनके प्रचार में जो गाने चल रहे हैं, उन गानों को सुनकर ही RJD के चरित्र का अंदाजा हो जाता है।

गुरुवार को राबड़ी देवी भी प्रचार के लिए निकलीं, राघोपुर में अपने बेटे तेजस्वी के लिए वोट मांगे, लेकिन लालू के दूसरे बेटे तेजप्रताप को RJD के कार्यकर्ताओं ने दौड़ाया, तेजप्रताप के सामने तेजस्वी जिंदाबाद के नारे लगाए। जीतनराम मांझी की पार्टी के उम्मीदवार पर कातिलाना हमला हुआ, मोकामा में चुनाव के दौरान पहली हत्या हो गई, जनसुराज के समर्थक को गोली मार दी गई।

मोदी ने महागठबंधन की तुलना तेल और पानी से क्यों की, इसका एक उदाहरण गुरुवार को देखने को मिला। मुकेश सहनी तेजस्वी को दरभंगा की गौड़ा बौराम सीट पर प्रचार के लिए ले गए थे, वहां मुकेश सहनी के भाई संतोष सहनी महागठबंधन के उम्मीदवार हैं और RJD के टिकट पर अफजल खान भी मैदान में है। तेजस्वी की मुश्किल ये है कि अफजल खान के बारे में सख्त लफ्ज़ों का इस्तेमाल करके मुस्लिम वोटर्स को नाराज नहीं कर सकते और खामोश रहकर मल्लाह वोटर्स की नाराज़गी मोल नहीं ले सकते। इसलिए तेजस्वी ने बीच का रास्ता निकाला।

तेजस्वी ने गठबंधन की मजबूरियों का हवाला दिया, कहा, अफजल खान अच्छे नेता हैं, चुनाव के बाद उनके सम्मान का पूरा ख्याल रखा जाएगा, लेकिन इस बार RJD के समर्थक संतोष सहनी को वोट दें। इस तरह का झगड़ा एक सीट पर नहीं हैं। RJD के 27 नेता बागी उम्मीदवार के तौर पर मैदान में हैं, जिन्हें तेजस्वी पार्टी से निकाल चुके हैं। बुधवार को RJD ने बगावत करने वाले दस नेताओं को पार्टी से बाहर किया।

इसी तरह दस सीटों पर कांग्रेस के बागी उम्मीदवार मैदान में हैं। उन्हें भी पार्टी से निकाला गया है। 12 सीटें ऐसी हैं, जहां महागठबंधन में शामिल पार्टियों के उम्मीदवारों के बीच दोस्ताना मुकाबला हो रहा है। तेजस्वी और राहुल किस किस को समझाएंगे। बुधवार को राहुल ने तेजस्वी के साथ साझा रैलियां की थी लेकिन गुरुवार को दोनों अलग अलग प्रचार के लिए निकले। तेजस्वी ने दस छोटी सभाएं की। तेजस्वी की लाइन भी राहुल से अलग है। वह न अडानी-अंबानी की बात करते हैं, न मोदी पर व्यक्तिगत वार करते हैं, न वोट चोरी का मुद्दा उठाते हैं, न उन्होंने छठ पर बयान को लेकर राहुल का बचाव किया।

तेजस्वी के निशाने पर अमित शाह हैं। चूंकि अमित शाह ने दावा किया कि इस बार RJD कांग्रेस का डब्बा गोल हो जाएगा तो जवाब में तेजस्वी ने कहा अमित शाह से वो डरने वाले नहीं हैं, 14 तारीख को पता लग जाएगा कि बिहार से किसकी विदाई होगी। तेजस्वी ने कहा कि ये बिहार है और कोई बिहारी किसी बाहरी से नहीं डरता। इसमें कोई शक नहीं कि तेजस्वी का एक बड़ा support base है, उनकी सभाओं में जो भीड़ आती है उनमें उत्साह दिखाई देता है। तेजस्वी ने भी इस बार महागठबंधन का सारा भार अपने कंधों पर लिया हुआ है। वह अपने लिए वोट मांगते हैं।

तेजस्वी ने मोकामा में जन सुराज पार्टी के समर्थक की हत्या का जिक्र किया। कहा, मोदी तीस साल पुरानी बातों का जिक्र कर रहे हैं, लेकिन तीस मिनट पहले मोकामा जो हुआ, वो मोदी को दिखाई नहीं देता। मोकामा की घटना इस बात का सबूत है कि बिहार के चुनाव में आज भी दोनाली बंदूक का असर बाकी है। आज भी कट्टा चलाने वाले चुनाव में प्रासंगिक हैं, हालांकि ये पहले के मुकाबले कम हुआ है।

मैंने वो जमाना देखा है जब बाहुबली ठेका लेकर पार्टियों के लिए बूथ लूटते थे। सबको पता होता था कि किस इलाके में किस गैंग का दबदबा है।ये गैंग और बाहुबली जाति के आधार पर बंटे रहते थे।बिहार के चुनाव में बाहुबलियों का असर आज भी दिखाई देता है, बस उनकी तादाद कम हुई है और इस बार नई बात ये है कि बाहुबली खुद चुनाव लड़ने की बजाय अपने बेटे-बेटियों,पत्नी या रिश्तेदार को चुनाव लड़वाने में लगे हैं।

बिहार का चुनाव बाकी राज्यों से काफी अलग है। यहां आज भी एक-एक विधानसभा क्षेत्र में जातियों का बोलबाला है। सीमांचल इलाकों में धर्म के नाम पर clearcut divide है। नीतीश कुमार के स्वास्थ्य को लेकर सवाल उठाए गए हैं और तेजस्वी की विरासत पर जंगल राज और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप हैं। प्रशांत किशोर एक नई सोच लेकर आए हैं,लेकिन उनकी पार्टी अभी नयी है। औवैसी भी इस चुनाव में एक बड़ा फैक्टर बन गए हैं। इसीलिए इस चुनाव के बारे में अंदाजा लगाना मुश्किल है लेकिन रिपोर्टर्स के माध्यम से अब तक जो फीडबैक मिला है इसके मुताबिक NDA को edge है, मोदी-नीतीश के combination का पलड़ा भारी है।

वंदे मातरम् गाने पर ऐतराज क्यों?

महाराष्ट्र सरकार के एक फैसले को लेकर  जम कर सियासत हुई। 31 अक्टूबर को वंदे मातरम की रचना के डेढ़ सौ साल पूरे हो गये, इसलिए देवेन्द्र फडणवीस की सरकार ने 31 अक्टूबर से 7 नवंबर तक महाराष्ट्र के सारे स्कूलों में रोज़ वंदे मातरम् के सामूहिक गायन का आदेश दिया है। आमतौर पर वंदे मातरम् के सिर्फ दो पद गाए जाते हैं लेकिन महाराष्ट्र के स्कूलों में बच्चे पूरा राष्ट्रगीत गाएंगे। जैसे ही सरकार का ये आदेश जारी हुआ तो विरोध शुरू हो गया। समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के नेताओं के अलावा मौलानाओं ने वंदे मातरम् को इस्लाम के खिलाफ बताया।

समाजवादी पार्टी के विधायक रईस शेख ने आदेश को रद्द करने की मांग की, आरोप लगाया कि सरकार RSS का एजेंडा स्कूलों में लागू करने की कोशिश कर रही है। मौलाना ऐजाज़ कश्मीरी ने कहा कि इस्लाम में अल्लाह के अलावा किसी की इबादत की इजाज़त नहीं है, इसलिए मुस्लिम बच्चों को वंदे मातरम् गाने के लिए मजबूर न किया जाए। समाजवादी पार्टी के नेता अबु आजमी ने कहा कि सरकार का आदेश मज़हब में दखलंदाज़ी है, यह संविधान विरोधी है, सरकार का आदेश वैसा ही है जैसे किसी हिन्दू से अल्लाह हू अकबर का नारा लगाने को कहा जाए।

राज्य के मंत्री  मंगल प्रभात लोढ़ा ने कहा कि वंदे मातरम देशभक्ति का गीत है, इसका धर्म से कोई लेना देना नहीं है, जो लोग इस आदेश को मज़हबी रंग देने की कोशिश कर रहे हैं, उनके खिलाफ देशद्रोह का केस दर्ज होना चाहिए। ये सही है कि वंदे मातरम् राष्ट्र की वंदना है, मातृभूमि का सम्मान है। हमारे यहां तो कहा गया है, ‘जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी’। मां और मातृभूमि को स्वर्ग से भी बेहतर बताया गया है, इसीलिए किसी को इनका सम्मान करने में, गीत गाने में कोई समस्या नहीं होनी चाहिए।

कुछ लोगों ने इसे ख्वामख्वाह हिंदू और मुसलमान का मसला बना दिया है। दूसरी तरफ इसमें जबरदस्ती करने की भी कोई जरूरत नहीं। अगर कोई न गाए तो उसके खिलाफ केस करने की भी कोई ज़रूरत नहीं। (रजत शर्मा)

देखें: ‘आज की बात, रजत शर्मा के साथ’ 30 अक्टूबर, 2025 का पूरा एपिसोड

Latest India News





Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *