120W Fast charger is good for 18W capacity phone know technology behind it – 120W वाले चार्जर से 18W सपोर्ट वाला फोन चार्ज करना है सुरक्षित? जानें कैसे काम करते हैं फास्ट चार्जर


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स्मार्टफोन चार्जिंग

क्या आप भी अपने 18W सपोर्ट वाले फोन को 120W वाले फास्ट चार्जर से चार्ज करते हैं? क्या ऐसा करने से फोन की बैटरी खराब होगी या ब्लास्ट होने का है खतरा? कई बार इमरजेंसी में फोन चार्ज करने के लिए यूजर्स बजट फोन को फास्ट चार्जर से चार्ज करते हैं। कई बार आपके मन में भी ऐसे ख्याल आ रहे होंगे कि फास्ट चार्जर की वजह से फोन में कहीं आग न लग जाए या फिर बैटरी न खराब हो जाए? हम आपको इन दिनों आने वाले स्मार्टफोन चार्जर की टेक्नोलॉजी के बारे में बताने जा रहे हैं। कैसे तेज चार्जर से भी कम चार्जिंग क्षमता वाले फोन को चार्ज करने पर आपका फोन सुरक्षित रहता है?

क्या फास्ट चार्जर है सुरक्षित?

अगर, आप अपने 18W चार्जिंग कैपेसिटी वाले फोन को 80, 100 या 120W वाले चार्जर से चार्ज करते हैं तो आपको घबराने की जरूरत नहीं है। आपके फोन में ब्लास्ट नहीं होगा और बैटरी भी खराब नहीं होगी। ऐसा स्मार्टफोन के चार्जर और फोन में इस्तेमाल होने वाली चार्जिंग टेक्नोलॉजी की वजह से होता है। यह टेक्नोलॉजी बैटरी चार्जर और स्मार्टफोन की चार्जिंग कैपेसिटी को सिंक कर देता है, जिसकी वजह से फोन में उतनी ही चार्जिंग कैपेसिटी मिलती है, जितनी जरूरत होती है। इस टेक्नोलॉजी को पावर नेगोसिएशन प्रोटोकॉल (Power Negotiation Protocol) कहते हैं।

आसान भाषा में समझें तो यह टेक्नोलॉजी फोन के चार्जर और स्मार्टफोन के बीच एक कम्युनिकेशन स्थापित करता है, जो फोन के चार्जर से कनेक्ट होने के बाद यह बता देता है कि उसे कितने पावर की जरूरत है। इसके बाद चार्जर उतने ही पावर की सप्लाई करता है, जितनी फोन को जरूरत होती है। उदाहरण के तौर पर अगर आप किसी 18W चार्जिंग कैपेसिटी वाले फोन को 80W वाले चार्जर से चार्ज करते हैं तो फोन में 18W पावर ही सप्लाई होगी। इस टेक्नोलॉजी की वजह से फोन की बैटरी भी सुरक्षित रहेगी और उसमें ब्लास्ट भी नहीं होगा।

फोन कैसे होता है चार्ज?

इन दिनों आने वाले स्मार्टफोन में बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम दिया जाता है, जो पावर नेगोसिएशन प्रोटोकॉल पर बेस्ड होता है। यह सिस्टम चार्जिंग वोल्टेज, टेम्परेचर और करंट को कंट्रोल करता है। ऐसे में अगर किसी वजह से फोन की बैटरी गर्म होने लगती है या फिर वोल्टेज फ्लक्चुएट करता है तो यह सिस्टम चार्जिंग को बंद कर देता है। इसकी वजह से पावर नेगोसिएशन प्रोटोकॉल और बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम मिलकर फोन की चार्जिंग को कंट्रोल करते हैं और बैटरी को सुरक्षित बनाते हैं।

इन बातों का रखें ध्यान

  • एक्सपर्ट्स की मानें तो अपने स्मार्टफोन को केवल फोन के साथ आए चार्जर से ही चार्ज करना चाहिए।
  • अगर, इमरजेंसी में आपके पास चार्जर नहीं है तो उसी ब्रांड के चार्जर का इस्तेमाल करना चाहिए, जिस ब्रांड का फोन है।
  • कभी भी किसी लोकल कम्पैटिबल चार्जर का इस्तेमाल करने से बचें। इनमें एडवांस टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल नहीं होता है, जिसकी वजह से फोन की बैटरी खराब होने से लेकर उसमें ब्लास्ट होने तक का खतरा रहता है।
  • ज्यादा देर तक फोन को चार्ज पर लगाकर न रखें। ऐसा करने से फोन गर्म हो सकता है।

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