
लालू प्रसाद, आरजेडी सुप्रीमो
पटना: लालू पुत्र मोह में फंस गए हैं। बिहार विधानसभा चुनाव में राष्ट्रीय जनता दल की करारी हार और रोहिणी के आरोपों से मुंह मोड़ते हुए उन्होंने एक बार फिर अपने छोटे बेटे तेजस्वी यादव पर भरोसा जताया है। विधायक दल की बैठक में लालू ने तेजस्वी यादव के बारे में कहा कि यही वर्तमान और भविष्य के नेता हैं। उन्होंने तेजस्वी यादव को आशीर्वाद देते हुए कहा कि वे बेहतर ढंग से पार्टी को भी चला रहे हैं, संगठन को भी मजूबत कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि तेजस्वी मेहनत कर रहे हैं, पार्टी का वोट बेस भी बढ़ा है। इस दौरान राबड़ी देवी भी मौजूद थीं। इस बैठक में एक प्रस्ताव पारित कर सर्वसम्मति से तेजस्वी यादव को विधायक दल का नेता चुन लिया गया।
किसी और विकल्प पर क्यों नहीं सोचते लालू?
हालांकि, यह फैसला अप्रत्याशित नहीं था। क्योंकि लालू ने अतीत में भी जो फैसले लिए वह परिवारवाद की राजनीति को पुष्ट करता है। जब चारा घोटाले में जेल गए तब उन्होंने पार्टी में कई काबिल नेताओं को दरकिनार कर सत्ता राबड़ी देवी को सौंपी थी। ऐसे में इतनी बड़ी हार पर भी लालू तेजस्वी से यह जिम्मेदारी वापस लेने का साहस नहीं दिखा पाते। पुत्र मोह में बंधे लालू ने परिवार के अंदर के कलह को भी दरकिनार करते हुए एक बार फिर यह संदेश दे दिया है कि उनका असली उत्तराधिकारी तेजस्वी यादव ही हैं।
सर्वसम्मति से तेजस्वी विधायक दल के नेता चुने गए
बता दें कि आरजेडी के नवनिर्वाचित विधायकों ने सोमवार को सर्वसम्मति से तेजस्वी यादव को विधायक दल का नेता चुन लिया। विधानसभा चुनाव में राजद 143 सीट पर मैदान में थी लेकिन 25 सीट पर ही जीत दर्ज कर पाई। राजद प्रवक्ता शक्ति सिंह ने बताया, “नवनिर्वाचित विधायकों ने सर्वसम्मति से तेजस्वी यादव को विधायक दल का नेता चुना।” बैठक में पार्टी अध्यक्ष लालू प्रसाद, राबड़ी देवी, मीसा भारती और जगदानंद सिंह सहित पार्टी के शीर्ष नेता मौजूद थे।
चुनाव में अप्रत्याशित हार कारणों की विस्तृत समीक्षा
हाल में संपन्न हुए चुनावों में महागठबंधन की ओर से तेजस्वी मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार थे। उन्होंने शीर्ष नेताओं और विधायकों के साथ चुनाव में अप्रत्याशित हार के कारणों की विस्तृत समीक्षा की। यह बैठक एक पोलो रोड स्थित उनके सरकारी आवास पर हुई, जहां निर्वाचित विधायकों के साथ-साथ हारे प्रत्याशियों ने भी चुनावी परिस्थितियों की वास्तविक तस्वीर सामने रखी। पार्टी सूत्रों के अनुसार, तेजस्वी यादव ने सभी हारे उम्मीदवारों से व्यक्तिगत तौर पर सुझाव भी लिया। उन्होंने बताया कि समीक्षा का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना है कि गलती कहां हुई-क्या संगठन कमजोर पड़ा, बूथ प्रबंधन ढीला रहा, या चुनावी संदेश जनता तक प्रभावी ढंग से नहीं पहुंच पाया।
