
भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते का पहला चरण लगभग पूरा होने वाला है। एक सरकारी अधिकारी ने सोमवार को ये जानकारी दी। अधिकारी ने बताया कि समझौते का ये हिस्सा भारत पर 25 प्रतिशत जवाबी टैरिफ और रूस से तेल खरीद को लेकर लगाए गए एक्स्ट्रा 25 प्रतिशत टैरिफ से निपटने से जुड़ा होगा। उन्होंने कहा कि भारत और अमेरिका के बाजार पहुंच संबंधी मुद्दों पर लगाए गए जवाबी टैरिफ के समाधान के लिए एक ‘पैकेज’ लगभग तैयार है और इस पर ‘‘हमें जल्द ही अंतिम निर्णय मिल जाना चाहिए।’’
भारत ने अमेरिका से एलपीजी इंपोर्ट के लिए किया समझौता
बताते चलें कि देश की सरकारी पेट्रोलियम कंपनियों ने साल 2026 में अमेरिका से लिक्विड पेट्रोलियम गैस (LPG) इंपोर्ट करने के लिए आज ही एक साल का समझौता किया है। इस कदम को अमेरिका के साथ भारत के ट्रेड सरप्लस को कम करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। ये मुद्दा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण रहा है और इसी कारण उन्होंने अमेरिका में प्रवेश करने वाले भारतीय उत्पादों पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगाया है।
2026 में अमेरिका से 22 लाख टन एलपीजी आयात करेगा भारत
सोमवार को जारी आधिकारिक बयान में कहा गया, ‘‘भारत की पब्लिक सेक्टर की पेट्रोलियम कंपनियों ने कॉन्ट्रैक्ट ईयर 2026 के लिए यूएस गल्फ कोस्ट से लगभग 22 लाख टन एलपीजी इंपोर्ट करने के लिए एक साल का संरचित अनुबंध सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है।’’
भारत पर 27 अगस्त से लागू है 50 प्रतिशत टैरिफ
बताते चलें कि डोनाल्ड ट्रंप ने इस साल जुलाई के आखिर में भारत पर 25 प्रतिशत टैरिफ लगाने की घोषणा की थी। इसके साथ ही उन्होंने रूस से कच्चा तेल खरीदने के लिए भारत पर अलग से जुर्माना लगाने की बात कही थी। जिसके बाद, ट्रंप ने रूस से कच्चा तेल खरीदने के लिए जुर्माने के रूप में भारत पर 25 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ लगा दिया था। भारत पर शुरुआती 25 प्रतिशत टैरिफ 7 अगस्त से लागू हो गया था। जबकि रूस से तेल खरीदने की वजह से 25 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ 27 अगस्त से लागू हुआ है। इसके साथ, भारतीय निर्यात पर अभी कुल 50 प्रतिशत टैरिफ लग रहा है।
पीटीआई इनपुट्स के साथ
