
विक्रम भट्ट।
फिल्म निर्माता विक्रम भट्ट एक फिल्म प्रोजेक्ट से जुड़ी कथित धोखाधड़ी के मामले में विवादों में घिर गए हैं। उदयपुर में उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज होने के बाद यह मामला सुर्खियों में आया है और इसकी जांच अभी भी जारी है। यह मामला उदयपुर के भूपालपुरा पुलिस स्टेशन में दर्ज किया गया है। एएनआई के अनुसार पुलिस अधीक्षक योगेश गोयल ने पुष्टि की है कि उदयपुर के डॉ. अजय मुर्डिया ने विक्रम भट्ट के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। शिकायतकर्ता डॉ. मुर्डिया ने आरोप लगाया है कि उन्होंने अपनी दिवंगत पत्नी की स्मृति में विक्रम भट्ट की कंपनी के साथ फिल्म के निर्माण के लिए एक डील की थी।
शिकायतकर्ता डॉ. अजय मुर्डिया के आरोप
इस समझौते के तहत, शिकायतकर्ता ने विक्रम भट्ट की कंपनी को एक निश्चित राशि का भुगतान किया और चार फिल्मों के निर्माण का अनुबंध किया। हालांकि उनका आरोप है कि प्रोडक्शन हाउस अनुबंध के अनुसार फिल्मों का निर्माण करने में विफल रहा। इसके अलावा जो दो फिल्में बन भी गईं, उनका श्रेय सही तरीके से नहीं दिया गया। सबसे गंभीर आरोप यह है कि सबसे अधिक बजट वाली फिल्म का निर्माण कभी शुरू ही नहीं हुआ। पुलिस अधीक्षक गोयल ने कहा है कि जांच चल रही है और उचित कार्रवाई की जाएगी।
विक्रम भट्ट का आरोपों का खंडन
विक्रम भट्ट ने इन सभी आरोपों का स्पष्ट रूप से खंडन किया है। उन्होंने कहा है कि राजस्थान पुलिस को गुमराह किया जा रहा है। उन्होंने एएनआई को बताया कि उनके पास इस संबंध में न तो कोई पत्र है, न कोई नोटिस। भट्ट ने ₹200 करोड़ के लालच में ₹30 करोड़ के घोटाले के दावे पर सवाल उठाते हुए इसे फर्जी करार दिया है। उन्होंने यह भी पूछा कि अगर उन्होंने शिकायतकर्ता को बेवकूफ बनाया होता, तो वे उनके साथ तीसरी फिल्म क्यों बनाते। पलटवार करते हुए भट्ट ने दावा किया है कि शिकायतकर्ताओं ने उनके कर्मचारियों को भुगतान नहीं किया और उनके पास इस बात के प्रमाण ईमेल और अनुबंधों में मौजूद हैं।
कैसे शुरू हुआ पूरा मामला?
डॉ. अजय मुर्डिया का फिल्मी सफर एक श्रद्धांजलि से शुरू हुआ। अपनी पत्नी इंदिरा मुर्डिया की पुण्यतिथि पर अनुप जलोटा का कार्यक्रम आयोजित करने के बाद दिनेश कटारिया ने उन्हें विक्रम भट्ट से मिलवाया। विक्रम ने बायोपिक और एक ऐतिहासिक फिल्म ‘महाराणा-रण’ बनाने का प्रस्ताव दिया। 40 करोड़ के टर्म शीट के बाद 4 फिल्मों के लिए 47 करोड़ का नया समझौता हुआ। इंदिरा इंटरप्राइजेज के स्थान पर इंदिरा एंटरटेनमेंट एलएलपी का गठन हुआ। इसमें अजय मुर्डिया 50 प्रतिशत, श्वेताम्भरी भट्ट 50 प्रतिशत के भागीदार बने, समस्त वैंडरो व खर्चों का भुगतान उन्हें सीधे ही इंदिरा एंटरटेनमेंट के द्वारा किया जाना तय हुआ जो श्वेताम्भरी भट्ट व दिनेश कटारिया (इंदिरा एण्टरटेनमेन्ट) दोनों के अनुमोदन पर भुगतान होता था। विक्रम, श्वेताम्भरी भट्ट, दिनेश कटारिया व महबूब आदि ने षड्यंत्रपूर्वक फर्जी बिल, ओवर वैल्यूड बिल तथा फर्जी व्यक्तियों के वाउचर्स तैयार कर आपसी मिली भगत कर बेईमानी से अनुमोदन कर इंदिरा एंटरटेनमेंट से लगभग 44 करोड़ रुपये भुगतान करवा कर सम्बंधित भुगतान प्राप्त कर्ताओं के पास मामूली राशि रखकर लगभग 30 करोड़ रुपए उनसे लेकर हड़प लिए।
दर्ज हुआ मामला
इन आरोपियों के खिलाफ यह मुकदमा भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) 2023 की धाराएं 318 (4), 316 (2), 336 (3), 340 (2), और 61 (2) में दर्ज किया गया है। धोखाधड़ी सहित अन्य संगीन धाराओं में 7 साल के कारावास सहित जुर्माने व अन्य से दंडित करने का प्रावधान है। डॉ. मुर्डिया ने मांग की है कि इन आरोपियों को उनके अपराध के लिए दंडित किया जाए और फिल्म निर्माण से जुड़ी सभी संपत्तियां- स्क्रिप्ट, फुटेज, म्यूजिक मास्टर, हार्ड ड्राइव्स, आईपीआर आदि- इंदिरा एंटरटेनमेंट को लौटाई जाएं।
विक्रम भट्ट का करियर और हालिया काम
विक्रम भट्ट ने कई सालों से फिल्म उद्योग में सक्रिय हैं और कई सफल फिल्मों में निर्माता और निर्देशक रहे हैं। उन्होंने 1998 में ‘मदहोश’ के साथ निर्देशन में कदम रखा। उन्हें ‘गुलाम’ जैसी थ्रिलर और ‘राज’ तथा ‘1920’ सीरीज जैसी हॉरर फिल्मों के निर्देशन के लिए जाना जाता है। उनकी सबसे हालिया फिल्म ‘तुमको मेरी कसम’, जो इंदिरा आईवीएफ के संस्थापक की बायोपिक थी, शिकायतकर्ता डॉ. अजय मुर्डिया द्वारा निर्मित की गई थी।
रिपोर्ट – भगवान प्रजापत
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