ऐश्वर्या राय को टक्कर देकर बनी ग्लैमरस हसीना, फिर बॉलीवुड से हुआ ऐसा मोह भंग, अब अपनाया संन्यासी जीवन और बनी बौद्ध भिक्षु


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Image Source : BARKHAMADAN17/INSTAGRAM
बरखा मदान।

बॉलीवुड की चमकती दुनिया हर किसी को अपनी ओर खींचती है। ग्लैमर, शोहरत और फैंस का प्यार अक्सर किसी के जीवन की दिशा पूरी तरह बदल देता है। लेकिन इसी जगमगाती गलियों में कुछ कलाकार ऐसे भी होते हैं, जो बाहरी रोशनी के बीच भीतरी प्रकाश की तलाश में निकल पड़ते हैं। ऐसी ही एक अभिनेत्री की कहानी है, जिसने न सिर्फ ग्लैमर से भरी जिंदगी को अपनी मर्जी से अलविदा कहा, बल्कि फिल्म इंडस्ट्री को पूरी तरह छोड़कर धर्म और साधना का रास्ता चुन लिया। कभी रेड कार्पेट पर नजर आने वाली यह एक्ट्रेस आज संयम, मौन और आत्मिक शांति से भरा जीवन जी रही है। हम बात कर रहे हैं बरखा मदान की।

ऐश्वर्या के साथ की मॉडलिंग

बरखा मदान का सफर ग्लैमर की दुनिया से शुरू हुआ था। कभी रैंप की चमक-दमक में कदम रखने वाली इस लड़की ने मिस इंडिया जैसे प्रतिष्ठित मंच पर सुष्मिता सेन और ऐश्वर्या राय जैसी सुंदरियों के साथ हिस्सा लिया। 1994 की मिस इंडिया प्रतियोगिता में उन्होंने ‘मिस टूरिज्म इंडिया’ का खिताब जीता और मलेशिया में आयोजित अंतरराष्ट्रीय सौंदर्य प्रतियोगिता में तीसरा स्थान हासिल किया। वे एक उभरती हुई मॉडल थीं और आत्मविश्वास से भरी हुई थीं।

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फिल्मों की एंट्री

मॉडलिंग के बाद बरखा ने बॉलीवुड में कदम रखा। 1996 में आई सुपरहिट फिल्म ‘खिलाड़ियों का खिलाड़ी’ में उन्होंने अक्षय कुमार, रेखा और रवीना टंडन जैसे सितारों के साथ स्क्रीन साझा की। 2003 में राम गोपाल वर्मा की फिल्म ‘भूत’ में उनका किरदार मंजीत इतना प्रभावशाली था कि दर्शक सिहर उठे। टीवी पर भी उनकी मौजूदगी मजबूत रही, वे ‘न्याय’, ‘1857 क्रांति’ (जहां उन्होंने रानी लक्ष्मीबाई की भूमिका निभाई) और ‘सात फेरे’ जैसे लोकप्रिय शोज में नजर आईं। करियर लगातार आगे बढ़ रहा था, लेकिन उनके मन में एक गहरी थकान और बोझिलपन पनपने लगा था।

बरखा के मन में उठे सवाल

बाहरी दुनिया में जितनी सफलता मिल रही थी, भीतर उतनी ही बेचैनी बढ़ रही थी। बरखा अक्सर खुद से सवाल करतीं, “क्या जीवन सिर्फ इतना ही है?” सितारों और शोहरत के बीच रहते हुए भी वे अकेलापन महसूस करती थीं। वह उस खालीपन को भरने की कोशिश कर रही थीं, जिसे न पैसा पूरा कर पा रहा था, न नाम। इसी दौर में उन्होंने अपनी आत्मा की आवाज सुननी शुरू की। वे पहले से ही दलाई लामा की शिक्षाओं से प्रभावित थीं। धीरे-धीरे, पढ़ी जाने वाली किताबें उनके भीतर बदलाव की राह बनाने लगीं।

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बरखा ने बदल दिया नाम

आखिरकार 2012 में बरखा मदान ने वह निर्णय लिया जो बहुत कम लोग लेने का साहस करते हैं। उन्होंने मायानगरी को अलविदा कहा और बौद्ध भिक्षुणी बनने का मार्ग चुना। अपने पुराने जीवन, पहचान और ग्लैमर को पीछे छोड़ते हुए उन्होंने नया नाम अपनाया ग्यालटेन समतेन*। यह सिर्फ नाम बदलना नहीं था, बल्कि जीवन की दिशा पूरी तरह मोड़ देने वाला कदम था। अब वे हिमालय की शांत वादियों में रहती हैं, जहां स्क्रिप्ट, कैमरा और डायलॉग की जगह ध्यान, सेवा और आत्म-अन्वेषण ने ले ली है।

अब जीती हैं ऐसा जीवन

आज ग्यालटेन समतेन सरल और संयम से भरा जीवन जी रही हैं। कभी रैंप पर रोशनी में नहाने वाली यह महिला अब बौद्ध परंपराओं की शरण में है। उन्हें न मेकअप का मोह है, न रंग-बिरंगे कपड़ों का आकर्षण। वे बौद्ध भिक्षुणियों वाले साधारण वस्त्र पहनती हैं और सादगी ही उनकी पहचान बन चुकी है। सोशल मीडिया पर वे सक्रिय हैं, जहां वे अपनी जिंदगी से जुड़े अपडेट साझा करती हैं और बौद्ध धर्म तथा आध्यात्मिकता के बारे में लोगों को जागरूक करती हैं। वह कई बार दलाई लामा से भी मिल चुकी हैं।

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