दिल्ली: सुसाइड करने वाले छात्र के पिता ने स्कूल पर लगाए गंभीर आरोप, सुसाइड नोट भी सामने आया


Student- India TV Hindi
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माता-पिता के साथ छात्र

दिल्ली में टीचर की प्रताड़ना से तंग आकर 10वीं के छात्र ने आत्महत्या कर ली। उसके बैग से सुसाइड नोट भी मिला है, जिसमें उसने स्कूल प्रशासन पर प्रताड़ित करने के आरोप लगाए हैं। मृतक बच्चे का परिवार महाराष्ट्र के सांगली जिले का रहने वाला है। 16 वर्षीय लड़का दिल्ली के एक प्रतिष्ठित स्कूल में पढ़ता था। उसने दिल्ली के राजेंद्र प्लेस मेट्रो स्टेशन से कूदकर जान दे दी। सुसाइड नोट में उसने तीन शिक्षकों को मानसिक प्रताड़ना के लिए जिम्मेदार ठहराया है। उसके पिता ने भी दावा किया कि वह पिछले एक साल से लगातार शिक्षक-प्रताड़ना का शिकार था।

छात्र के पिता ने बताया कि एक डांस रिहर्सल के दौरान वह गिर पड़ा, तो शिक्षक ने कहा- “रो जितना रोना है, मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता।” एक शिक्षक ने उसे धक्का भी दिया था। जब पिता ने शिकायत की, तो स्कूल प्रशासन ने आरोपों को अनदेखा कर दिया।

सुसाइड नोट में क्या लिखा?

छात्र ने सुसाइड नोट में लिखा कि मम्मी माफ कर देना। मेरी आखिरी इच्छा है कि इनपर कार्रवाई हो। उसने लिखा, “Sorry mummy… ये last time तोड़ रहा हूं। मेरी last wish है कि इनपर action लो… ताकि कोई और बच्चा मेरी तरह न करे।” उसने जरूरत पड़ने पर अपने अंगों को दान करने की भी इच्छा जताई।

मेट्रो स्टेशन पर कूदकर जान दी

16 वर्षीय छात्र ने राजेंद्र प्लेस मेट्रो स्टेशन के प्लेटफॉर्म 2 से कूदकर जान दी। पुलिस ने मौके से बैग, किताबें और सुसाइड नोट जब्त किया। इस मामले पर एफआईआर दर्ज हो चुकी है। वहीं, पुलिस की जांच जारी है। सुसाइड नोट को फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है। शिक्षकों और स्कूल प्रबंधन से पूछताछ शुरू की गई है। अब तक स्कूल की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।

छात्र के परिजन और रिश्तेदार सदमे में

सुसाइड करने वाले छात्र के परिजन और रिश्तेदार सदमे में हैं। परिजनों का कहना है कि वह पिछले 5 महीनों से तनाव में था। स्कूल में लगातार डांट, अपमान और धमकी उसे तोड़ते जा रहे थे। परिवार की मांग है कि दोषी शिक्षकों पर कड़ी कार्रवाई हो। स्कूल प्रशासन के सामने कई सवाल हैं। इनमें छात्र की शिकायतें अनसुनी करना, डांस रिहर्सल वाली घटना की जांच न कराना। स्कूल में मनोवैज्ञानिक/काउंसलर सपोर्ट सिस्टम की कमी और शिक्षकों पर विभागीय कार्रवाई शुरू न करने का मामला शामिल है।

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