
धर्मेंद्र
89 वर्षीय सुपरस्टार धर्मेंद्र अपनी स्वास्थ्य समस्याओं के कारण सुर्खियां बटोर रहे हैं। बीते दिनों बीमारी के चलते उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था। जहां उनका इलाज किया गया और ठीक होने के बाद फिर से घर भेज दिया है। ऐसे में हम उस फिल्म पर एक नजर डालते हैं जिसने धर्मेंद्र को रातोंरात सुपरस्टार बना दिया। उनकी पहली बड़ी सफलता जिसने उनके करियर को बदल दिया – 1966 की रोमांटिक ड्रामा फिल्म – फूल और पत्थर। ये फिल्म 50 हफ्तों तक सिनेमाघरों में चलती रही थी।
खूंखार गैंगस्टर की थी कहानी
यह फिल्म शाका नामक एक खूंखार गैंगस्टर की कहानी है, जिसकी जिंदगी में एक अप्रत्याशित मोड़ तब आता है जब उसे परिवार द्वारा छोड़ी गई विधवा शांति देवी के लिए दया आती है। निर्देशक ओपी रल्हन ने सबसे पहले सुनील दत्त को फूल और पत्थर फिल्म ऑफर की थी, लेकिन उन्होंने इसके बोल्ड थीम के कारण इसे अस्वीकार कर दिया। फिर धर्मेंद्र ने शाका की जगह शांति की भूमिका मीना कुमारी से ले ली।
14 अगस्त को हुई थी रिलीज
14 अगस्त 1966 को स्वतंत्रता दिवस के सप्ताहांत पर रिलीज हुई, फूल और पत्थर ने तुरंत सफलता हासिल की। यह धर्मेंद्र के करियर का एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुई क्योंकि यह रोमांटिक ड्रामा 50 हफ्तोंसे ज़्यादा समय तक सिनेमाघरों में चला। मीना कुमारी के साथ उनकी केमिस्ट्री को बेहद पसंद किया गया और दोनों ने चंदन का पालना, मझली दीदी और बहारों की मंजिल में साथ काम किया। फूल और पत्थर का तमिल में एम. जी. रामचंद्रन के साथ ओली विलक्कू, तेलुगु में एन. टी. रामाराव के साथ निंदू मनसुलु और मलयालम में जयन के साथ पुथिया वेलिचम के नाम से भी रीमेक किया गया।
ये थी फिल्म की स्टारकास्ट
ओपी रल्हन निर्देशित इस फिल्म ने वसंत बोरकर (सर्वश्रेष्ठ संपादन) और शांति दास (सर्वश्रेष्ठ कला निर्देशन) के लिए दो फिल्मफेयर पुरस्कार भी जीते। इस ब्लॉकबस्टर फिल्म में धर्मेंद्र और मीना कुमारी के अलावा शशिकला, जीवन, ललिता पवार, मदन पुरी, टुन टुन, लीला चिटनिस, सुंदर और इफ्तिखार जैसे अन्य कलाकार भी थे।
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