‘2026 में सीएम नहीं बन पाएंगी ममता’, TMC से सस्पेंड होने के बाद हुमायूं कबीर की धमकी


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मुख्यमंत्री ममता बनर्जी।

पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले में बाबरी मस्जिद बनाने पर अड़े निलंबित विधायक हुमायूं कबीर के निशाने पर अब मुख्यमंत्री ममता बनर्जी हैं। विधायक हुमायूं कबीर ने धमकी देते हुए कहा कि मैं उन्हें चुनौती दे रहा हूं, 2026 में वह मुख्यमंत्री पद की शपथ नहीं लेंगी और उन्हें पूर्व मुख्यमंत्री बना दिया जाएगा। टीएमसी से सस्पेंड किए गए विधायक ने कहा, ”मुर्शिदाबाद में और कौन वादे करेगा, हुमायूं कबीर को कौन रोक सकता है? मैं उन्हें चुनौती दे रहा हूं। 2026 में वह मुख्यमंत्री नहीं बनेंगी। मुख्यमंत्री को पूर्व मुख्यमंत्री होना चाहिए। 2026 में वह मुख्यमंत्री पद की शपथ नहीं लेंगी और उन्हें पूर्व मुख्यमंत्री बना दिया जाएगा।” 

हाईकोर्ट ने नहीं दिया मामले में दखल 

वहीं, आपको बता दें कि हुमायूं कबीर द्वारा बाबरी मस्जिद निर्माण के प्रस्ताव के खिलाफ एक जनहित याचिका (PIL) पर आज कलकत्ता हाइकोर्ट में सुनवाई होनी थी। विधायक हुमायूं कबीर द्वारा बाबरी मस्जिद निर्माण के प्रस्ताव के खिलाफ मुख्य न्यायाधीश की बेंच में एक PIL दायर की गई है। लेकिन कोर्ट ने इस मामले में दखल नहीं दिया। चीफ जस्टिस की डिवीजन बेंच ने शांति बनाए रखने की जिम्मेदारी राज्य पर छोड़ दी है। वहीं, राज्य ने कानून-व्यवस्था की स्थिति को कंट्रोल करने के लिए जरूरी फोर्स तैनात कर दी है। पहले से ही सेंट्रल फोर्स की 19 कंपनियां वहां तैनात हैं।  

बाबरी मस्जिद बनाने का किया है ऐलान

जान लें कि हाल में विधायक हुमायूं कबीर ने ऐलान किया था कि वह मुर्शिदाबाद में बाबरी मस्जिद जरूर बनवाएंगे। चाहे इसके लिए उनको तृणमूल कांग्रेस से इस्तीफा ही क्यों ना देना पड़ जाए। बाद में इस मुद्दे को पश्चिम बंगाल में विपक्षी पार्टी बीजेपी ने लपक लिया और सीएम ममता बनर्जी व उनकी पार्टी को घेर लिया। इसके बाद गुरुवार को उन्हें सस्पेंड कर दिया गया। साथ ही टीएमसी ने हुमायूं कबीर के बाबरी मस्जिद को लेकर दिए गए बयान से किनारा कर लिया।  

कौन हैं हुमायूं कबीर?

बता दें कि कांग्रेस, टीएमसी, भाजपा और फिर वापस टीएमसी में शामिल हुए हुमायूं कबीर कई बार दलबदल कर चुके हैं। उन्होंने जिला अधिकारियों को चुनौती दी थी और उन पर ‘आरएसएस के एजेंट’ के रूप में काम करने का आरोप लगाया था। 6 दिसंबर का मस्जिद के शिलान्यास का चयन राजनीतिक संदेश के तौर पर देखा जा रहा था। उसी दिन 1992 में बाबरी मस्जिद को गिरा दिया गया था। टीएमसी इस दिन को ‘संघर्ष दिवस’ के रूप में मनाती है। पश्चिम बंगाल सरकार ने इस साल 6 दिसंबर को अवकाश भी घोषित किया है। 

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