
शराब का पेग
पंकज उदास ने तो कह दिया कि ‘थोड़ी-थोड़ी पिया करो’…अब ये थोड़ी हर किसी के लिए अलग-अलग हो सकती है। कोई एक दो पेग पीकर ही नशे में झूमने लगता है तो किसी को पटियाला पेग भी नहीं चढ़ता है। जश्न हो या गम पीने वालों को तो बहाना चाहिए। लेकिन क्या आप जानते हैं जैसे शराब का पेग से क्या कनेक्शन है। शराब को पेग में ही क्यों नापते हैं और पेग का साइज 30 ml या 60 ml ही क्यों होता है। दरअसल इसके पीछे आपकी सेहत से जुड़ा राज भी है। अगर आप पीने के शौकीन हैं तो जान लें एक पेग 60ml का ही क्यों होता है?
पेग 60 ml का ही क्यों होता है?
जब आप शराब यानि अल्कोहल लेते हैं तो आपका पेट और छोटी आंतें अल्कोहल को तेजी से अब्जॉर्ब करती हैं और यह आपके खून में चला जाता है। अल्कोहल शरीर के लिए पॉइजन का काम करता है जिसे लिवर खून से छानकर तेजी से बाहर निकालने का काम करता है। लेकिन अगर आप अपने लिवर की अल्कोहल पचाने की क्षमता से ज्यादा तेजी से शराब पी रहे हैं, तो आपका ब्लड अल्कोहल लेवल (BAC) बढ़ जाता है। जिससे आपको नशा महसूस होने लगता है। सामान्य तौर पर आपका लिवर 1 घंटे में लगभग एक 60 ml तक का पेग पचा सकता है। ये अल्कोहल आमतौर पर 12 औंस बीयर, 5 औंस वाइन या 1.5 औंस शराब जितनी मात्रा में हो सकता है। यानि 1 घंटे में अगर आप 1 पेग पीते हैं तो इसे लिवर आसानी से प्रोसेस कर सकता है। इसलिए 1 पेग को 50-60 ml का ही बनाया जाता है। अगर आप 1 घंटे में 30 ml शराब पीते हैं तो इसे शरीर धीरे धीरे आसानी से पचा लेता है।
पेग कितने तरह के होते हैं?
शराब के पेग अलग-अलग कई तरह के होते हैं। इसमें 30 ml, 60 ml का पेग लोग ज्यादा पीते हैं। इसके बाद पटियाला पेग भी होता है। जो इससे भी बड़ा होता है। इसमें करीब 90 ml शराब की मात्रा होती है। पेग के अलावा शॉट्स भी लोग पीते हैं जिसमें एक झटके से लोग पूरा 1 शॉट पी जाते हैं।
शराब और पेग का कनेक्शन
शराब को मापने की इकाई डेनमार्क में मापन की ईकाई paegl से ही आई है। भारत में पेग शराब को मापने की स्टैंडर्ड यूनिट के तौर पर मान्य किया गया है। पेग शब्द का अर्थ एक कीमती शाम का गिलास है। इसके पीछे की कहानी है कि यूनाइटेड किंगडम के खदान कर्मचारियों को दिनभर काम करने के बाद शाम को एक गिलास में ब्रांडी दी जाती थी, जिसे पीने से उनकी दिनभर की थकान उतर जाती थी। ये एक गिलास उन्हें बहुत कीमती लगता था और ये लोग उस गिलास को ‘Precious Evening Glass’ कहते थे। यहीं से पेग शब्द शुरू हो गया।
