नक्सलवाद के खिलाफ जंग में रेडियो बना बड़ा हथियार, माओवादियों को बर्बाद करने में कर रहा मदद


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Image Source : ANI
नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई में रेडियो एक बड़ा हथियार बनकर उभरा है।

बीजापुर: आज के दौर में जब पूरी दुनिया में सोशल मीडिया और मोबाइल फोन का बोलबाला बढ़ता जा रहा है, तब छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद से लड़ाई में रेडियो एक मजबूत और कारगर माध्यम बनकर उभरा है। एएनआई की रिपोर्ट के मुताबिक, बीजापुर जैसे जिलों में रेडियो सिर्फ मनोरंजन, जानकारी और शिक्षा ही नहीं देता, बल्कि दूर-दराज के संवेदनशील गांवों के लोगों की सोच को बदलने में भी बड़ी भूमिका निभा रहा है। स्थानीय भाषाओं और बोलियों में नियमित प्रसारण के जरिए रेडियो कार्यक्रम केंद्र और राज्य सरकार की कल्याणकारी योजनाओं के बारे में जानकारी फैला रहे हैं।

‘प्रोपेगैंडा का असर धीरे-धीरे कम हो रहा’

ग्रामीण इलाकों में जहां इंटरनेट की पहुंच कमजोर है और स्मार्टफोन की सुविधा सीमित है, वहां रेडियो जानकारी का भरोसेमंद और विश्वसनीय स्रोत साबित हो रहा है। कम्युनिटी रेडियो और FM स्टेशन सरकार की योजनाओं, विकास कार्यों, स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा और आजीविका के अवसरों के संदेश पहुंचा रहे हैं। राशन वितरण, आवास, स्वास्थ्य, पेंशन, रोजगार और शिक्षा से जुड़ी योजनाओं के फायदे बताने वाले कार्यक्रमों से गांव वाले अच्छी गवर्नेंस और विकास के सकारात्मक प्रभाव को समझ रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि इससे नक्सली समूहों द्वारा फैलाई जाने वाली गलत जानकारी और प्रोपेगैंडा का असर धीरे-धीरे कम हो रहा है।

रेडियो की वजह से व्यवस्था पर भरोसा बढ़ा

रेडियो प्रसारण में उन स्थानीय लोगों की सफलता की कहानियां भी शामिल की जा रही हैं, जिन्होंने सरकार की योजनाओं से फायदा उठाया है। इससे दूसरे लोग भी आगे आकर इन योजनाओं का लाभ लेने के लिए प्रोत्साहित हो रहे हैं। इंटरएक्टिव कार्यक्रम, लोक संगीत, स्थानीय खबरें और सामाजिक मुद्दों पर चर्चा से प्रशासन और स्थानीय लोगों के बीच विश्वास बढ़ा है। सुरक्षा अधिकारियों का मानना है कि रेडियो के जरिए लगातार सही जानकारी मिलने से लोगों में जागरूकता आई है और व्यवस्था पर भरोसा बढ़ा है। स्थानीय समस्याओं का समाधान करके और विकास की कहानियां बताकर रेडियो नक्सली और माओवादी विचारधारा की बर्बादी में एक गजब का माध्यम बन रहा है।





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