
रूसी राष्ट्रपति ब्लादिमिर पुतिन
उत्तरी अटलांटिक महासागर में वेनेजुएला से आ रहे रूसी तेल टैंकर पर अमेरिकी सेना ने कब्जा जमा लिया है। उसके कब्जे के बाद रूस ने अमेरिका की इस कार्रवाई को खुले समंदर में स्पष्ट रूप से समुद्री डकैती करार दिया है अंतरराष्ट्रीय कानूनों के उल्लंघन का गंभीर आरोप लगाया है। रूसी संसद के ऊपरी सदन के वरिष्ठ नेता एंड्री क्लिशास ने अमेरिका पर तीखा हमला बोला और उन्होंने इस ऑपरेशन को समंदर में खुली लूट बताते हुए कहा कि अमेरिका अपने तथाकथित नियमों के तहत सीधे-सीधे अंतरराष्ट्रीय कानून को रौंद रहा है। इसके साथ ही क्लिशास ने चेतावनी दी कि इस तरह की कार्रवाइयां वैश्विक समंदरी सुरक्षा के लिए खतरनाक मिसाल कायम कर सकती हैं।
अमेरिका कई दिनों से टैंकर को कर रहा था ट्रैक
अटलांटिक महासागर में यह जब्ती तब हुई जब आइसलैंड के पास समंदर में रूसी नौसेना की एक पनडुब्बी और कई युद्धपोत तैनात थे। अमेरिकी अधिकारियों ने बताया कि इस रूसी टैंकर को पकड़ने की कवायद कई हफ्तों से चल रही थी और इसे अटलांटिक महासागर में ट्रैक किया गया था। यह टैंकर पहले ही ‘नाकाबंदी’ को चकमा देकर निकल चुका था और इसने अमेरिकी तटरक्षक बल के बार-बार दिए गए निर्देशों और जहाज पर चढ़कर जांच करने के अनुरोधों को ठुकरा दिया था। इतना ही नहीं, पकड़े जाने के डर से जहाज ने बीच समंदर में अपनी पहचान छिपाने के लिए झंडा और पंजीकरण तक बदल दिया था।
रूस ने समुद्री कानून का हवाला दिया
आधिकारिक समाचार एजेंसी तास द्वारा प्रकाशित मंत्रालय के बयान में आगे कहा गया कि “पिछले कई दिनों से अमेरिकी तटरक्षक बल का एक जहाज़ मेरिनेरा का पीछा कर रहा है, जबकि हमारा जहाज़ अमेरिकी तट से लगभग 4,000 किलोमीटर दूर है।”
जब्ती की खबर के तुरंत बाद, परिवहन मंत्रालय के बयान में कहा गया कि “किसी भी देश को अन्य देशों के अधिकार क्षेत्र में विधिवत पंजीकृत जहाजों के खिलाफ बल प्रयोग करने का अधिकार नहीं है,” और इसके लिए 1982 के संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून सम्मेलन का हवाला दिया गया।
