
तुर्कमान गेट
Explainer: भारत की राजधानी दिल्ली का तुर्कमान गेट आजकल सुर्खियों में है, क्योंकि इस गेट के पास मौजूद फैज-ए-इलाही मस्जिद के पास जब एमसीडी ने अवैध निर्माण हटाने की कार्रवाई शुरू की तो बवाल मच गया।मौके पर मौजूद अधिकारियों और पुलिस टीम पर असामाजिक तत्वों ने जमकर पत्थरबाजी की, जिसके बाद बात इतनी बढ़ गई कि वहां इकट्ठा हुई भीड़ हटाने के लिए पुलिस की तरफ से आंसू गैस के गोले छोड़े गए। इस मामले को लेकर काफी ज्यादा चर्चा है।
जानिए तुर्कमान गेट का इतिहास
मुगल बादशाह शाहजहां ने पुरानी दिल्ली में 14 अलग-अलग गेट बनवाए, तुर्कमान गेट भी इन्हीं 14 गेटों में से एक हैं। ये सभी 14 गेट दिल्ली के चारों तरफ बनाए गए थे, जिसमें अजमेरी गेट, दिल्ली गेट, लाहौरी गेट और मोरी गेट आदि शामिल हैं। इन्हीं में से एक तुर्कमान गेट है जो सूफी संत हजरत शाह तुर्कमान बयाबानी के नाम पर रखा गया है। शाह तुर्कमान की दरगाह के पास ही ये दरवाजा है और इसी वजह से इस गेट का नाम तुर्कमान गेट रखा गया है। दिल्ली का ये गेट पिछले कई दशकों से काफी मशहूर है।

तुर्कमान गेट
1976 में तोड़ी गईं थी बस्तियां
साल 1976 में भारत में इंदिरा गांधी की सरकार थी। उनके बेटे संजय गांधी ने एक दिन डीडीए अधिकारी से कहा कि वो चाहते हैं कि तुर्कमान गेट से जामा मस्जिद साफ नजर आए। इसके लिए तुर्कमान गेट के पास मौजूद बस्तियों को तोड़ना जरूरी था। उस वक्त संजय गांधी के आदेश का पालन करने के लिए डीडीए अधिकारी जगमोहन मल्होत्रा ने तुर्कमान गेट इलाके में बुलडोजर चला दिए। इस ड्राइव में कई लोगों की मौत भी हुई और दिल्ली के तुर्कमान गेट को छावनी में तब्दील कर दिया गया था और तुर्कमान गेट के आसपास बसे सैकड़ों परिवारों को मंगोलपुरी और त्रिलोकपुरी जैसी जगहों पर शिफ्ट होना पड़ा था
जामा मस्जिद के आसपास अवैध निर्माण का करें सर्वे
तुर्कमान गेट पर अतिक्रमण हटाने के बाद अब दिल्ली हाईकोर्ट ने नगर निगम को सख्त निर्देश दिए हैं कि अगले दो महीनों के भीतर ऐतिहासिक जामा मस्जिद के आसपास के पूरे इलाके का व्यापक सर्वे करें और सर्वे में कोई भी अवैध निर्माण या सार्वजनिक भूमि पर अतिक्रमण पाया जाता है, तो कानून के अनुसार उसे तुरंत हटाया जाए। यह आदेश पुरानी दिल्ली के एक स्थानीय निवासी फरहत हसन द्वारा दायर याचिका के आधार पर दिया गया है।
इस याचिका में आरोप लगाया गया कि जामा मस्जिद के गेट नंबर तीन, पांच और सात के बाहर अवैध रूप से पार्किंग और व्यावसायिक गतिविधियां चल रही हैं, इससे न केवल आम जनता को परेशानी हो रही है, बल्कि इस ऐतिहासिक धरोहर की सांस्कृतिक विरासत को भी गंभीर नुकसान पहुंच रहा है। तो जान लीजिए जामा मस्जिद कहते किसे हैं और किन मस्जिदों को दिया जाता है ये नाम…

जामा मस्जिद
जामा मस्जिद का मतलब क्या है
‘मस्जिद’ शब्द अरबी भाषा का शब्द है, जिसका मतलब है ‘इबादत करने की जगह और जामा का अर्थ है इकट्ठा करना या फिर समूह। इस तरह ‘जामा मस्जिद’ का अर्थ होता है कि वह मस्जिद जहां बड़ी संख्या में लोग साथ आकर सामूहिक नमाज अदा करते हैं, उसे ही जामा मस्जिद कहा जाता है। जामा मस्जिद नाम खासतौर पर उन मस्जिदों को दिया जाता है जहां शुक्रवार की यानी जुमा की नमाज पढ़ी जाती है, क्योंकि इस दिन मुस्लिम समुदाय एक साथ बड़ी संख्या में इकट्ठा होकर एक साथ अल्लाह की इबादत करते हैं।

जामा मस्जिद
भारत में कहां कहां हैं जामा मस्जिद
जब मुस्लिम शासकों ने बड़े शहरों में प्रमुख मस्जिदें बनवाईं, तो वे अक्सर इन्हें ‘जामा मस्जिद’ कहते थे, क्योंकि ये उस शहर की मुख्य नमाजगाह होती थीं, जहां एक साथ नमाज पढ़ी जाती थी। यही कारण है कि दिल्ली, आगरा, लखनऊ, संभल और अन्य कई शहरों में जामा मस्जिदें हैं।
दिल्ली के जामा मस्जिद का इतिहास
मुगल सम्राट शाहजहां ने 1656 में दिल्ली में जामा मस्जिद बनवाया था। दिल्ली की यह मस्जिद भारत की सबसे बड़ी और ऐतिहासिक मस्जिदों में से एक मानी जाती है। यह मस्जिद लाल पत्थरों और संगमरमर से बनी है। ये लाल किले से महज 500 मीटर की दूरी पर स्थित है जो भारत की सबसे बड़ी मस्जिद कही जाती है। इसे बनने में छह साल का समय और इसे बनाने में तब 10 लाख रुपये लगे थे। बलुआ पत्थर और सफेद संगमरमर से निर्मित इस मस्जिद में उत्तर और दक्षिण द्वारों से प्रवेश किया जा सकता है।

जामा मस्जिद
पूर्वी द्वार केवल शुक्रवार को ही खुलता है। इसके बारे में कहा जाता है कि सुल्तान इसी द्वार का प्रयोग करते थे। इसका प्रार्थना गृह बहुत ही सुंदर है। इसमें ग्यारह मेहराब हैं जिसमें बीच वाला महराब अन्य से कुछ बड़ा है। इसके ऊपर बने गुंबदों को सफेद और काले संगमरमर से सजाया गया है जो निजामुद्दीन दरगाह की याद दिलाते हैं।
