
अमेरिका ने अंतरराष्ट्रीय संगठनों से खींचे कदम।
वॉशिंगटन: अमेरिका ने ग्लोबल मंच पर बड़ा और विवादास्पद फैसला ले लिया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक प्रेसिडेंशियल मेमोरेंडम पर हस्ताक्षर करके अमेरिका को 66 इंटरनेशनल संगठनों से बाहर निकालने का आदेश दे दिया है। इनमें 35 Non-United Nations और संयुक्त राष्ट्र से जुड़ी 31 संस्थाएं शामिल हैं। ट्रंप प्रशासन के मुताबिक, ये संस्थाएं अब अमेरिकी राष्ट्रीय हितों, आर्थिक समृद्धि, संप्रभुता और सुरक्षा के खिलाफ काम करती हैं।
अमेरिका ने क्यों लिया इतना बड़ा फैसला?
व्हाइट हाउस के मुताबिक, जिन अंतरराष्ट्रीय संगठनों का अमेरिका मेंबर है या जिनमें आर्थिक मदद देता है, उनकी समीक्षा में पाया गया कि ये अमेरिकी टैक्सपेयर्स के पैसों का सही उपयोग नहीं करते। ये ग्लोबल एजेंडा को अमेरिका की प्राथमिकताओं से ऊपर रखते हैं।
ट्रंप प्रशासन का UN पर आरोप
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्पष्ट किया कि यह फैसला ‘American Sovereignty’ को बहाल करने के लिए लिया गया। उनका आरोप है कि कई अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं, रेडिकल क्लाइमेट पॉलिसी, ग्लोबल गवर्नेंस और Ideological Programs को बढ़ावा देती हैं, जो अमेरिका की अर्थव्यवस्था और संप्रभुता के खिलाफ हैं। इन संस्थाओं पर अमेरिकी टैक्सपेयर्स के पैसे खर्च करने के बावजूद अमेरिका को कोई बड़ा फायदा नहीं मिला।
बचने वाले पैसे का क्या करेंगे ट्रंप?
ट्रंप प्रशासन का कहना है कि इन बड़े निर्णयों से टैक्सपेयर्स के पैसे बचेंगे। उसको अब अमेरिका के इंफ्रास्ट्रक्चर, बॉर्डर सिक्योरिटी और सैन्य तैयारियों जैसे कार्यों में खर्च किया जाएगा। हालांकि, आलोचकों का मानना है कि अमेरिका के इस कदम से वैश्विक स्तर पर देशों के बीच सहयोग कम होगा। ग्लोबल सिस्टम में नई दरारें पैदा हो सकती हैं।
अमेरिका की प्राथमिकताओं पर ट्रंप का फोकस
ट्रंप प्रशासन का मानना है कि इन अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं से अमेरिका को बाहर निकालकर करदाताओं का पैसे बचाया जा सकेगा। अब वो धनराशि ‘अमेरिका फर्स्ट’ के हिसाब से खर्च की जाएगी। ये अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं, अमेरिका के हित को ध्यान में रखकर काम नहीं कर रही थीं।
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