Stanley Ka Dabba का क्यूट बच्चा याद है, जो कभी नहीं लाता था टिफिन, 15 साल में हो गया हैंडसम हंक, अब करता है ये काम


stanley partho gupte- India TV Hindi
Image Source : STILL FROM FILM
पार्थो गुप्ते।

2011 में जब अमोल गुप्ते की फिल्म ‘स्टेनली का डब्बा’ रिलीज हुई तो दर्शकों के दिलों में सबसे गहरी छाप छोड़ने वाला नाम था स्टेनली यानी पार्थो गुप्ते। एक मासूम चेहरा, शांत आंखें और बिना ज़्यादा संवादों के भावनाएं कह जाने वाला अभिनय, पार्थो ने बतौर बाल कलाकार ऐसा प्रभाव डाला कि वह रातों-रात हर घर में पहचाने जाने लगे। स्टेनली के रूप में उनकी भूख, अकेलापन और आत्मसम्मान ने दर्शकों की आंखें नम कर दी थीं। इस सफलता के तुरंत बाद पार्थो साकिब सलीम के साथ हवा हवाई में नजर आए, जहां उन्होंने एक बार फिर साबित किया कि उनकी एक्टिंग सिर्फ एक फिल्म तक सीमित नहीं है। लेकिन इसके बाद जब फैंस उन्हें लगातार नई फिल्मों में देखने की उम्मीद कर रहे थे, पार्थो अचानक सिल्वर स्क्रीन से गायब हो गए।

पार्थो ने बनाई शॉर्ट फिल्म

हाल ही में एक इंटरव्यू में अमोल गुप्ते ने इस गायब होने के पीछे की सच्चाई साझा की। उनके मुताबिक हवा हवाई के बाद पार्थो ने जानबूझकर एक्टर के तौर पर कोई प्रोजेक्ट नहीं लिया। ग्लैमर और तुरंत मिलने वाली लोकप्रियता से दूर रहते हुए, पार्थो ने सिनेमा को एक कला के रूप में समझने का रास्ता चुना। 2016 में उन्होंने एक फिल्ममेकर के तौर पर अपनी पहली शॉर्ट फिल्म बनाई और 2017 में दूसरी। खास बात यह रही कि इन दोनों शॉर्ट फिल्मों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहना मिली।

पार्थो क्या कर रहे हैं?

साल 2021 में अमोल गुप्ते बताते हैं कि पार्थो अमेरिका के बेहतरीन फिल्म स्कूलों में से एक में पढ़ाई किए। उनके लिए यह सिर्फ करियर नहीं, बल्कि सीखने और खुद को निखारने की प्रक्रिया है। अमोल को इस बात पर गर्व है कि पार्थो ने हवा हवाई के बाद मिलने वाले आकर्षण और कमर्शियल दबाव से खुद को दूर रखा और सिनेमा को ‘आर्ट स्कूल’ की तरह देखा। इस बीच पार्थो की लेटेस्ट तस्वीरें सोशल मीडिया पर सामने आई हैं, जिनमें वह एक हैंडसम, आत्मविश्वासी यंग मैन के रूप में नजर आते हैं। कई फैंस उन्हें पहचान ही नहीं पाए कि यही कभी स्टेनली का डब्बा का नन्हा स्टेनली था।

फेमस निर्देशक के हैं बेटे

आज भी दर्शक बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं कि पार्थो गुप्ते कब और किस रूप में बड़े पर्दे पर वापसी करेंगे, एक अभिनेता के तौर पर या एक संवेदनशील फिल्ममेकर के रूप में। बता दें, ‘स्टैनली का डब्बा’ का निर्देशन अमोल गुप्ते ने किया था और अमोल पार्थो के पिता भी हैं। वो अपने पिता के साथ ही पहली लोकप्रिय फिल्म में नजर आए थे। स्टैनली का डब्बा (2011) एक संवेदनशील और दिल को छू लेने वाली फिल्म है, जो बच्चों की दुनिया, भूख और मानवीय करुणा पर केंद्रित है।

क्या है फिल्म की कहानी?

फिल्म की कहानी एक मासूम लेकिन चुपचाप पीड़ा झेल रहे बच्चे स्टैनली डिसूजा के इर्द-गिर्द घूमती है। स्टैनली एक स्कूल में पढ़ता है और हमेशा लंच टाइम में अपने दोस्तों का खाना बड़े प्यार और उत्साह से खाता है। वह कभी अपना टिफ़िन नहीं लाता, लेकिन इस बात को बड़ी मासूमियत और चालाकी से छिपा लेता है। उसके दोस्त उसके साथ खाना शेयर करते हैं, क्योंकि उन्हें लगता है कि स्टैनली बस टिफिन लाना भूल जाता है। स्कूल में एक सख्त और स्वार्थी हिंदी टीचर वर्मा सर हैं, जिन्हें बच्चों का खाना खाने की आदत है। जब उन्हें पता चलता है कि स्टैनली कभी टिफिन नहीं लाता तो वह उसे स्कूल में खाना खाने से मना कर देते हैं और यहां तक कह देते हैं कि जब तक वह अपना डब्बा नहीं लाएगा, स्कूल नहीं आए।

धीरे-धीरे सच्चाई सामने आती है कि स्टैनली बेहद गरीब है, उसके माता-पिता नहीं हैं और वह अपने चाचा के घर रहता है, जहां उसे ठीक से खाना तक नहीं मिलता। उसका डब्बा दरअसल उसकी जिंदगी में फैली कमी और उपेक्षा का प्रतीक है। फिल्म बेहद सरल भाषा में समाज की संवेदनहीनता और बच्चों की मासूम दोस्ती को दर्शाती है और दर्शकों को सोचने पर मजबूर कर देती है।

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