मकर संक्रांति, खिचड़ी, उत्तरायण और पोंगल में क्या अंतर है? जानें अलग-अलग राज्यों में कैसे मनाते हैं ये त्यौहार?


मकर संक्रांति और पोंगल में अंतर- India TV Hindi
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मकर संक्रांति और पोंगल में अंतर

देशभर में 14 और 15 जनवरी के दिन मकर संक्रांति का त्योहार मनाया जाएगा। इस दिन देश के अलग-अलग राज्यों में, खिचड़ी, उत्तरायण, लोहड़ी और पोंगल जैसे त्योहार भी सेलिब्रेट किए जाते हैं। भले इन त्योहारों के नाम अलग अलग हैं लेकिन ये सभी त्यौहार असल में एक ही त्योहार हैं। फर्क है तो बस नाम, परंपरा और तरीके का, जो राज्यों के हिसाब से बदल जाता है। चलिए जानते हैं इनके बीच का अंतर और इन्हें कैसे मनाया जाता है?

मकर संक्रांति, खिचड़ी, उत्तरायण और पोंगल के बीच क्या है अंतर?

  • मकर संक्रांति: मकर संक्रांति तब मनाया जाता है जब सूर्य मकर राशि में प्रवेश करता है। आमतौर पर यह त्यौहार 14 या 15 जनवरी को आता है। इसे फसल कटाई का पर्व माना जाता है। इस दिन से दिन बड़े और रातें छोटी होने लगती हैं।

  • उत्तरायण: उत्तरायण कोई त्योहार नहीं, बल्कि सूर्य की दिशा है। जब सूर्य दक्षिण से उत्तर की ओर गमन करता है, उसे उत्तरायण कहते हैं। यानी इस दिन से  दिन बड़े और रातें छोटी होने लगती हैं ।इसे शुभ समय माना जाता है, इसलिए कई धार्मिक कार्य इसी दौरान किए जाते हैं। गुजरात और राजस्थान में इसी नाम से यह त्योहार मनाया जाता है।

  • खिचड़ी: उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड में मकर संक्रांति को खिचड़ी कहा जाता है। इस दिन चावल और उड़द के दाल की खिचड़ी बनाई जाती है और दही चूड़ा का सेवन भी किया जाता है। प्रयागराज में इस दिन खिचड़ी का मेला लगता है।

  • पोंगल: तमिलनाडु में मकर संक्रांति को पोंगल कहा जाता है। यह 4 दिन का त्योहार होता है।इस दिन नए चावल, दूध और गुड़ से मीठा चावल बनाया जाता है। साथ ही सूर्य देव और प्रकृति का धन्यवाद किया जाता है।

अलग-अलग राज्यों में कैसे मनाते हैं?

 गुजरात और राजस्थान में उत्तरायण के दिन पतंगबाजी की जाती है। यहां काइट फेस्टिवल बड़े पैमाने पर मनाया जाता है। महाराष्ट्र में मकर संक्रांति के दिन लोगों में तिल-गुड़ बांटकर इस त्योहारा को मनाया जाता है। पंजाब में मकर संक्रांति से एक दिन पहले लोहड़ी मनाया जाता है। लोहड़ी के दिन आग जलाई जाती है और उसमें मूंगफली फेका जाता है साथ ही लोग खूब नाचते गाते हैं। तमिलनाडु में पोंगल चार दिनों तक मनाया जाता है जिसमें सूर्य देव, प्रकृति और फसलों की पूजा की जाती है और जल्लीकट्टू जैसे खेल भी खेले जाते हैं।  

 

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