सोने-चांदी की कीमतें हुईं बेकाबू, जानें कहां तक पहुंच सकते हैं दाम, एक्सपर्ट से जानें अभी खरीदारी करें या नहीं


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Photo:PIXABAY चांदी में 136 डॉलर के अपसाइड टारगेट अभी भी संभव

Gold and Silver Price Outlook: साल 2025 के बाद साल 2026 में भी सोने और चांदी की कीमतों में रिकॉर्ड-तोड़ तेजी का सिलसिला लगातार जारी है। इसी बीच, मंगलवार को सोने और चांदी की कीमतों ने तेजी का नया रिकॉर्ड बना दिया। दिल्ली के सर्राफा बाजार में आज चांदी की कीमतें 40,500 रुपये (12.3 प्रतिशत) की रिकॉर्ड तेजी के साथ 3,70,000 रुपये प्रति किलोग्राम के नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई। पिछले हफ्ते शुक्रवार को चांदी का भाव 3,29,500 रुपये प्रति किलोग्राम पर बंद हुआ था। चांदी की कीमतों में इससे पहले कभी भी एक दिन में 40,500 रुपये की तेजी नहीं आई थी और न ही इसकी कीमतें 3,70,000 रुपये प्रति किलोग्राम के जादूई आंकड़े तक पहुंची थी।

सर्राफा बाजार में 1,66,000 रुपये पर पहुंचा सोने का भाव

चांदी के अलावा, आज दिल्ली के सर्राफा बाजार में 99.9 प्रतिशत शुद्धता वाले सोने की कीमतें भी 7300 रुपये (4.6 प्रतिशत) बढ़कर 1,66,000 रुपये प्रति 10 ग्राम के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गई। पिछले हफ्ते शुक्रवार को सोना 1,58,700 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ था। एक्सपर्ट्स का मानना है कि बढ़ते भू-राजनीतिक और व्यापारिक तनाव के बीच निवेशकों की मजबूत मांग और वैश्विक तेजी के कारण दोनों कीमती धातुएं रिकॉर्ड-तोड़ तेजी के साथ रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गई हैं। देश के जाने-माने बुलियन मार्केट एक्सपर्ट और केडिया एडवाइजरी के डायरेक्टर अजय केडिया ने सोने और चांदी की कीमतों में आगे होने वाले अनुमानित उतार-चढ़ाव को लेकर इंडिया टीवी पैसा के साथ खास जानकारी शेयर की।

नई इन्वेस्टिंग के लिए रिस्क-रिवॉर्ड आकर्षक नहीं

अजय केडिया ने कहा, ”2026 को देखते हुए, सोने और चांदी का आउटलुक मोटे तौर पर बुलिश बना हुआ है, लेकिन टेक्निकली रिस्की है। खास बात ये है कि 2026 एक बड़े स्ट्रक्चरल अपट्रेंड के अंदर एक साइक्लिकल बुलिश फेज होने की संभावना है, न कि नया लॉन्ग-टर्म खरीदारी का मौका। मौजूदा लेवल पर, आगे की तेजी का अनुमान ज्यादातर एक नंबर गेम बन जाता है, क्योंकि नई इन्वेस्टिंग के लिए रिस्क-रिवॉर्ड आकर्षक नहीं है। यहां से, बुलियन को एक ट्रेडिंग मौके के तौर पर देखा जाना चाहिए, न कि इन्वेस्टमेंट थीम के तौर पर। लॉन्ग-टर्म इन्वेस्टिंग के लिए वैल्यूएशन में ठहराव और अच्छे एंट्री जोन की जरूरत होती है और पिछले दो सालों के शानदार रिटर्न के बाद ये दोनों ही खत्म हो गए हैं।”

कहां तक पहुंच सकती हैं सोने की कीमतें

उन्होंने आगे कहा, ”टेक्निकली, सोने के लिए अगला बड़ा फिबोनाची (Fibonacci) एक्सटेंशन 5900 डॉलर के पास है और बीच में 5360 डॉलर के आसपास रेजिस्टेंस है। RSI जैसे मोमेंटम इंडिकेटर 92 के पास होने से मीन रिवर्जन पक्का है। जियोपॉलिटिकल या लिक्विडिटी से जुड़े फैक्टर्स में कोई भी नरमी आने पर शुरुआत में सोना 4150 डॉलर की तरफ करेक्ट हो सकता है और शायद 3600 डॉलर के बेसलाइन की तरफ और भी ज्यादा गिरावट आ सकती है।” भारतीय बाजार को लेकर उन्होंने बताया कि इस साल सोने की कीमतें 1.86 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम तक पहुंच सकती हैं। अजय केडिया के मुताबिक, सोने के भाव में करेक्शन आया तो इसे 1.30 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास सपोर्ट मिल सकता है। अगर कीमतें इससे भी नीचे गिरीं तो ये 1.16 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम तक भी जा सकता है।

चांदी में 136 डॉलर के अपसाइड टारगेट अभी भी संभव

अजय केडिया ने चांदी को लेकर कहा, ”सिल्वर में सप्लाई की कमी, ETF इनफ्लो और फैमिली ऑफिस और म्यूचुअल फंड के बीच फाइनेंशियल एसेट के तौर पर इसकी बढ़ती भूमिका की वजह से बहुत ज्यादा उतार-चढ़ाव जारी है, जिसे 90 से 48 तक गिरने वाले गोल्ड-सिल्वर रेश्यो से और मजबूती मिली है। 50 डॉलर से 110 डॉलर तक दोगुना होने के बाद, चांदी में 116 डॉलर और 136 डॉलर के अपसाइड टारगेट अभी भी संभव हैं। हालांकि, 50% रिट्रेसमेंट 72 डॉलर को फेयर-वैल्यू जोन बताता है, जिसमें खराब-से-खराब हालात में भी 52 डॉलर के ब्रेकआउट लेवल को टेस्ट कर सकते हैं।” MCX पर चांदी के आउटलुक को लेकर केडिया एडवाइजरी के डायरेक्टर अजय केडिया ने कहा कि इस साल चांदी की कीमतें 4.30 लाख रुपये प्रति किलोग्राम तक भी पहुंच सकती हैं। हालांकि, उन्होंने ये भी बताया कि जब इसकी कीमतों में करेक्शन आएगा तो इसे 2.25 लाख रुपये के लेवल पर सपोर्ट मिल सकता है। अगर कीमतें इसके नीचे गईं तो ये 1.65 लाख रुपये प्रति किलो तक भी पहुंच सकता है।

एक्सपर्ट ने कहा कि 2026 में कमोडिटीज अब सिर्फ एसेट नहीं बल्कि स्ट्रेटेजिक इंस्ट्रूमेंट हैं। ट्रेंड ऊपर की ओर बना हुआ है, लेकिन सप्लाई की कमी से होने वाली तेजी के बीच डिसिप्लिन, रिस्क मैनेजमेंट और मजबूती आने पर बेचना, मोमेंटम का पीछा करने से ज्यादा जरूरी है।

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