
सांकेतिक फोटो
अगर आप भी मेडिकल फील्ड के छात्र हैं और अपने करियर को इस क्षेत्र में (BPT- बैचलर ऑफ फिजियोथेरेपी और BOT- बैचलर ऑफ ऑक्यूपेशनल थेरेपी) ही आगे ले जाने के इच्छुक हैं तो ये खबर आपके लिए है। नीट यूजी की परीक्षा के जरिए अब देश में BPT- बैचलर ऑफ फिजियोथेरेपी और BOT- बैचलर ऑफ ऑक्यूपेशनल थेरेपी के कोर्सेज में भी दाखिला मिलेगा। इस संबंध में राष्ट्रीय सहबद्ध और स्वास्थ्य देख रेख वृत्ति आयोग (National Commission for Allied and Healthcare Profession) ने आधिकारिक वेबसाइट पर एक नोटिस जारी कर जानकारी साझा की है। इच्छुक कैंडिडेट्स आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर नोटिस को चेक कर सकते हैं।
नेशनल कमीशन फॉर अलाइड एंड हेल्थकेयर प्रोफेशन की ओर से जारी किए गए नोटिस में बीपीटी और बीओटी कोर्सेज के दाखिले के लिए एडमिशन एलिजिबिलिटी क्राइटेरिया भी बताया गया है। तो आइए इस खबर के जरिए जानते हैं कि इन दोनों कोर्सेज का एडमिशन एलिजिबिलिटी क्राइटेरिया क्या है। इसके साथ ही यह जानेंगे कि बीपीटी और बीओटी कोर्सेज किसलिए होते हैं। तो चलिए जानते हैं।
बीपीटी और बीओटी कोर्सेज का एडमिशन एलिजिबिलिटी क्राइटेरिया
बैचलर ऑफ फिजियोथेरेपी (BPT) और बैचलर ऑफ ऑक्यूपेशनल थेरेपी (BOT) में दाखिले के लिए एलिजिबिलिटी क्राइटेरिया को आप नीचे दिए गए बिंदुओं के माध्यम से समझ सकते हैं।
- कैंडिडेट को फिजिक्स, केमिस्ट्री और बायोलॉजी (या बॉटनी और जूलॉजी) के साथ सीनियर सेकेंडरी (10+2) या उसके बराबर 50% एग्रीगेट नंबरों के साथ इंग्लिश पास होना चाहिए। हालांकि, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, या अन्य पिछड़ा वर्ग (NCL) के कैंडिडेट के लिए, फिजिक्स, केमिस्ट्री और बायोलॉजी में मिले कम से कम नंबर क्वालिफाइंग एग्जाम में 50% के बजाय 40% होंगे। अनारक्षित और जनरल-EWS कैंडिडेट के लिए PwBD/PWD कैंडिडेट के लिए फिजिक्स, केमिस्ट्री और बायोलॉजी (या बॉटनी और जूलॉजी) में मिले कम से कम नंबर 50% के बजाय 40% होंगे। सभी कैटेगरी के लिए इंग्लिश पास होना जरूरी है।
- कैंडिडेट को एडमिशन के एकेडमिक साल के लिए नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) द्वारा आयोजित नेशनल एलिजिबिलिटी एंट्रेंस टेस्ट (NEET) में शामिल होना होगा। हालांकि, एप्लीकेशन एडमिशन के लिए कोई मिनिमम क्वालिफाइंग मार्क्स या कट-ऑफ परसेंटाइल की जरूरत नहीं होगी।
- एडमिशन, एडमिशन के एकेडमिक साल के NEET मेरिट/मार्क्स (एप्लीकेशन के लिए कोई कट-ऑफ मार्क्स या कट-ऑफ परसेंटाइल नहीं) के आधार पर होगा।
- करिकुलम गाइडलाइंस के अनुसार डिसेबिलिटी / फिजिकल फिटनेस क्राइटेरिया।
सीएम स्टालिन ने क्यों किया विरोध?
बता दें कि हाल में ही तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने नीट को बीपीटी और बीओटी प्रवेश से अलग रखे जाने की बात कही की थी। इस संबंध में उन्होंने पीएम मोदी को एक पत्र भी लिखा था। सीएम स्टालिन पीएम मोदी से आग्रह किया था कि वह यह सुनिश्चित करें कि बीपीटी और बीओटी प्रवेश से नीट को अलग रखा जाए और कहा कि प्रवेश संबंधी तौर-तरीके राज्यों के अधिकार क्षेत्र में ही रहने चाहिए। उन्होंने तर्क दिया कि नीट में मात्र उपस्थित होना योग्यता का मानदंड तय करना तर्कसंगत नहीं है।
अपने लेटर में उन्होंने लिखा था, “केवल उपस्थिति अनिवार्य करने का कोई अकादमिक औचित्य नहीं है और ऐसा प्रतीत होता है कि इसे समाज में नीट को सामान्य बनाने और उसका विस्तार करने के लिए ही बनाया गया है। इससे अंततः देश के लाखों लोगों को कोचिंग लेने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।”
सीएम ने पत्र में कहा था, “इस मुद्दे की गंभीरता को देखते हुए, मैं आपके व्यक्तिगत हस्तक्षेप की उम्मीद करता हूं।” उन्होंने दावा किया कि राज्यों से, जो संवैधानिक रूप से स्वास्थ्य और शिक्षा दोनों क्षेत्रों के प्रभारी हैं, इस नवीनतम कदम पर परामर्श नहीं किया गया। स्टालिन ने कहा, “यह हमें बिल्कुल भी स्वीकार्य नहीं है।”
