‘एक ही सुसाइड करना चाहती थी फिर…’, 3 सगी बहनों के कूदने से ठीक पहले बालकनी में देखने वाले चश्मदीद ने क्या बताया?


बहनों के कूदने से ठीक...- India TV Hindi
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बहनों के कूदने से ठीक पहले बालकनी में देखने वाले चश्मदीद ने बताई पूरी कहानी।

गाजियाबाद में 3 सगी बहनों के सुसाइड में गेमिंग थ्योरी को पुलिस ने नकारा है। डिप्रेशन की वजह से सुसाइड का शक है। पुलिस को सिस्टर्स सुसाइड मिस्ट्री को सॉल्व करना है तो सबसे पहले कुछ पहेलियों का जवाब तलाशना होगा। पहली पहेली जो तीनों सिस्टर्स ने दीवार पर लिखी है। दूसरी पहेली फर्श पर बिछी वो सात तस्वीरें हैं, तीसरी वो डायरी के पन्ने हैं जिस पर लिखा है- TRUE STORY OF LIFE..

मौत की ‘True Life Story’

यकीन मानिए ये 2026 का सबसे पेचीदा केस है और पुलिस के सामने सबसे बड़ा चैलेंज है। ”True Life Story… इस डायरी में जो कुछ भी लिखा है, उसे पढ़ लो, क्योंकि ये सब सच है।” ये 12 साल की प्राची, 14 साल की पाखी और 16 साल की निशिका के आखिरी शब्द हैं। जिस कमरे में तीनों बहने रहती थी, उसकी दीवार पर लिखा है- मेक मी अ हर्ट ब्रोकन। उसके नीचे जो लाइनें काटी गई हैं जिसमें क्रॉस मारा गया है, उसे पढ़ना सबसे जरुरी है- आई एम वेरी वेरी अलोन… ऐसा लग रहा है कि तीनों लाइनें तीनों बहनों की जिंदगी के बारे में बता रही हैं।

3 बहनें, 9वीं मंजिल, आधी रात और मौत की छलांग

जिस कमरे से तीनों बहने कूदी हैं, उसमें 6-7 फोटो बिखरी पड़ी हैं। परिवार की फोटो है, भगवान की फोटों हैं और सामने मंदिर है। एक सुसाइड नोट है जिसमें लिखा है आईएम सॉरी पापा… ऐसा लग रहा है कि कोई ऐसी बात थी जिसकी वजह से ये मौत को गले लगाने के लिए मजबूर थीं। ये सब कुछ रात के 2 से 2.30 के बीच हो रहा था। इसके बाद तीनों बहनों के गिरने की आवाज आती है। पिता तीनों बेटियों की मौत के लिए कोरियन गेम को जिम्मेदार बता रहे हैं। लेकिन कमरे में जो दिखा है, वो बहुत कुछ अलग बता रहा है। 

  • तीनों बहने पिछले 2 साल से स्कूल नहीं जा रही थीं।
  • कहा जा रहा है कि लॉकडाउन के बाद से उनका स्कूल जाना बंद था।
  • स्कूल ना जाने के पीछे लड़कियों का पढ़ाई में कमजोर होना बताया जा रहा है। लेकिन ये भी सच है कि परिवार की आर्थिक स्थिति भी बहुत कमजोर थी। 

दीवार पर लिखा हुआ था- मेक मी अ हर्ट ब्रोकन।

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दीवार पर लिखा हुआ था- मेक मी अ हर्ट ब्रोकन।

बताया जा रहा है कि गेम खेलने को लेकर परिवार के मना करने पर आत्महत्या जैसा कदम उठा लिया। सुसाइड करने के लिए तीनों बहनों ने फ्लैट के मंदिर वाले कमरे को चुना। मंदिर की खिड़की अक्सर खुली रहती थी, वहां उन्होने एक कुर्सी लगाई और एक के बाद एक नीचे छलांग लगा दी। 

चश्मदीद ने बयां की रात की खौफनाक कहानी

सोसाइटी के कुछ लोगों ने बहनों को बिल्डिंग के नीचे कूदते हुए देखा। पड़ोसियों के मुताबिक ये बहनें काफी देर तक बालकनी में थीं। तीनों में से एक ही लड़की कूदने की कोशिश कर रही थी बाकी दोनों उसे पीछे खींच रही थी मगर वो भी उसके साथ गिर गई। रात करीब 2 बजे सोसाइटी में सन्नाटा था तभी सोसाइटी में रहने वाले अरुण कुमार की नजर सामने वाले फ्लैट की नौवीं मंजिल की बालकनी पर गई। चश्मदीद अरुण कुमार ने कहा, ”देखने में ऐसा लग रहा था कि कोई बड़ा व्यक्ति बालकनी से कूदने की कोशिश कर रहा है और पीछे से उसे कोई अंदर की तरफ खींच रहा है। दूरी ज्यादा होने के कारण साफ दिखाई नहीं दे रहा था।”

‘एक बच्ची रेलिंग से नीचे उतर गई, मानो उसका मन बदल गया हो’

आगे उन्होंने बताया, हमें कुछ गड़बड़ लगी तो हम देखते रहे। कुछ ही पलों में यह साफ होने लगा कि बालकनी में तीन लोग मौजूद हैं। ऐसा लग रहा था कि दो लोग तीसरे को अपनी ओर खींच रहे हैं। तभी एक बच्ची रेलिंग से नीचे उतर गई मानो उसका मन बदल गया हो। कुछ सेकंड बाद वह बच्ची फिर रेलिंग पर चढ़ गई। इस बार उसने अपनी छोटी बहन को पीठ पर बैठाया और तीसरी बहन को अपने साथ पकड़ लिया। इतने में पहले एक बच्ची गिरी, उसके साथ दोनों और उसे पकड़ते हुए गिर गई। जब लड़कियां नीचे गिरी ही तो हम घर के अंदर गए पुलिस के साथ। वहां परिवार की कुछ फोटो कमरे पर बिखरी हुई थी, एक डायरी थी जिसमें सुसाइड नोट भी लिखा हुआ था सॉरी पापा। कुछ कोरियन भाषा में भी लिखा हुआ था।”

बच्चियों के पिता ने की है 2 शादियां

जिन बच्चियों ने सुसाइड किया है, उनके पिता ने दो शादी की है। दोनों पत्नियां सगी बहने हैं। पहली से कोई बच्चा नहीं हो रहा था तो उसकी छोटी बहन (साली) के साथ दूसरी शादी कर ली। जो दूसरी शादी हुई उससे 3 बच्चे हुए। इसी दौरान पहली पत्नी से भी 2 बच्चे हो गए। जिन 3 बहनों ने खुदकुशी की है, उनमें दो बहनें दूसरी पत्नी की जबकि एक पहली पत्नी की बेटी है। दोनों पत्नियां और बच्चे सब साथ रहते थे। तीन बच्चियां पिछले 3 साल से गेमिंग कर रही थीं और दो-ढाई साल से स्कूल भी नहीं जाती थी। बच्चियों के पिता के मुताबिक वो बार-बार कोरिया जाने की बात करती थीं, सभी कोरियन कल्चर से काफी प्रभावित थीं।

रिजर्व रहता था परिवार

जिन बच्चियों ने अपनी जान दे दी, उसका परिवार भी काफी रिजर्व रहता था। वे लोग न किसी से मिलते जुलते था और ना ही कभी किसी फंक्शन में शामिल होते थे। बच्चे भी घर से बाहर बहुत कम निकलते थे, सोसाइटी के दूसरे बच्चों से उनकी कोई बातचीत नहीं थी। 

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