
राजपाल यादव।
राजपाल यादव की कानूनी परेशानियों के बीच फिल्म इंडस्ट्री से उन्हें मिल रहे समर्थन की तस्वीर अब और साफ होती दिख रही है। उनके मैनेजर गोल्डी ने हाल ही में बताया कि कई बड़े नाम उनके साथ खड़े हुए हैं और आर्थिक व पेशेवर स्तर पर मदद का भरोसा दिया है। इसी बीच उनके चेक बाउंस केस को लेकर भी बड़ी अपडेट सामने आई है। एक्टर की रिहाई को लेकर भी उनके मैनेजर ने बात की और बताया कि जल्द ही वो जेल से बाहर आ जाएंगे। कोर्ट में इस मामले पर सुनवाई होने वाली है।
राजपाल को मिल रही मदद
गोल्डी ने कहा, ‘बहुत से लोग राजपाल यादव की मदद के लिए आगे आए हैं। सोनू सूद, सलमान खान और अजय देवगन जैसे एक्टर ने अपना सपोर्ट दिया है। मैं अभी डेविड धवन के साथ कॉल पर था – उन्होंने भी मदद की। रतन जैन, वरुण धवन… इस बार कई लोग उनकी मदद के लिए आगे आ रहे हैं, जिसकी राजपाल ने बहुत तारीफ की है।’ मैनेजर ने यह तो स्पष्ट किया कि इंडस्ट्री के कई लोग सक्रिय रूप से सहयोग कर रहे हैं, लेकिन उन्होंने इस सवाल पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया कि क्या राजपाल ने सरेंडर से पहले खुद किसी से मदद मांगी थी। हालांकि उन्होंने यह जरूर कहा कि मुश्किल समय में इंडस्ट्री ने एकजुटता दिखाई।
कब होगी सुनवाई?
उन्होंने आगे कहा, ‘सबने कमिटमेंट्स किए हैं, लेकिन ऐसे ट्रांजैक्शन रातों-रात नहीं होते। मेंटली, परिवार को मजबूत रहना होगा। राजपाल भाई खुद बहुत मजबूत हैं और यह मजबूती परिवार में है। घर पर भी कई सेलिब्रेशन्स हैं और फरवरी के आखिर में फैमिली फंक्शन्स हैं। हर कोई चाहता है कि राजपाल भाई तब तक बाहर आ जाएं। उम्मीद है, वह कल तक रिहा हो जाएंगे।’ गोल्डी ने यह भी जानकारी दी कि राजपाल यादव की बेल हियरिंग अगले दिन निर्धारित है और उन्हें उम्मीद है कि अदालत से जमानत मिल जाएगी, जिससे वह रिहा हो सकेंगे।
कर्ज विवाद की पृष्ठभूमि
यह मामला 2010 में शुरू हुआ था, जब राजपाल यादव ने अपनी डायरेक्टोरियल डेब्यू फिल्म ‘अता पता लापता’ (2012) के निर्माण के लिए दिल्ली स्थित मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड से ₹5 करोड़ का कर्ज लिया था। फिल्म के बॉक्स ऑफिस पर असफल रहने के बाद वह ऋण चुकाने में असमर्थ रहे, जिसके चलते मामला कानूनी विवाद में बदल गया। अप्रैल 2018 में एक मजिस्ट्रेट कोर्ट ने राजपाल यादव और उनकी पत्नी राधा यादव को नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट की धारा 138 के तहत दोषी ठहराया। उनके द्वारा जारी किए गए सात चेक बाउंस हो गए थे, जिसके आधार पर उन्हें छह महीने की साधारण कारावास की सजा सुनाई गई।
बकाया राशि और कोर्ट की कार्यवाही
जून 2024 में दिल्ली हाई कोर्ट ने उनकी सजा को सस्पेंड करते हुए उन्हें बकाया राशि चुकाने के लिए वास्तविक प्रयास दिखाने का निर्देश दिया। इस बीच ब्याज और अन्य कारणों से बकाया रकम बढ़कर लगभग ₹9 करोड़ तक पहुंच गई थी। अक्टूबर 2025 तक राजपाल यादव ₹75 लाख जमा कर चुके थे, लेकिन अदालत ने पाया कि कुल बकाया का बड़ा हिस्सा अभी भी बाकी है। फरवरी 2025 में जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने उन्हें सरेंडर करने का आदेश दिया। राजपाल की ओर से बकाया चुकाने के लिए एक और सप्ताह की मोहलत मांगने वाली आखिरी अर्जी भी खारिज कर दी गई, जिसके बाद उन्हें हिरासत में ले लिया गया।
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