
Foreign policy analyst Michael Rubin At Congressional Briefing
वॉशिंगटन: बांग्लादेश में 24 घंटे से भी कम समय में आम चुनाव होने वाले हैं। चुनाव सले पहले कैपिटल हिल पर जरूरी कांग्रेसनल ब्रीफिंग ने इस बात पर जोर दिया कि मौजूदा मोहम्मद यूनुस के शासन में हिंदू और दूसरे धार्मिक अल्पसंख्यकों पर जुल्म तेजी से बढ़ रहा है, इससे 12 फरवरी के वोट की वैधता पर सवाल उठ रहे हैं। कैपिटल हिल अमेरिका की सरकार के केंद्र के रूप में प्रसिद्ध है, जहां अमेरिकी कांग्रेस, सर्वोच्च न्यायालय , कांग्रेस पुस्तकालय और अन्य कई महत्वपूर्ण संस्थान स्थित हैं।
बांग्लादेशी हिंदू समुदाय के सदस्य हुए शामिल
यह ब्रीफिंग रेबर्न हाउस ऑफिस बिल्डिंग में HinduACTion और Coalition of Hindus of North America (CoHNA) ने होस्ट की थी। इसमें 100 से अधिक लोग शामिल हुए, जिनमें कांग्रेसनल स्टाफ, डिप्लोमैट, पत्रकार, शिक्षाविद और विदेश में रहने वाले बांग्लादेशी हिंदू समुदाय के सदस्य शामिल थे। बांग्लादेश के चुनाव से पहले हुई इस बैठक से पता चलता है कि कट्टरपंथ का उभरना क्षेत्र और मानवाधिकारों के लिए संकट में बदल रहा है।
‘इनटॉलेरेंस में डूबा बांग्लादेश’
ब्रीफिंग में मुख्य भाषण देते हुए, फॉरेन पॉलिसी एनालिस्ट माइकल रुबिन ने चेतावनी दी कि धार्मिक आजादी अक्सर किसी देश के डेमोक्रेटिक पतन का सबसे पहला संकेत होती है। रुबिन ने कहा, “धार्मिक आजादी हमेशा कोयले की खान में कैनरी की तरह होती है।” उन्होंने पाकिस्तान के साथ तुलना करते हुए मौजूद लोगों को याद दिलाया कि बांग्लादेश पूरी तरह से इनटॉलेरेंस में डूब गया है।

Hindu In Bangladesh
रुबिन ने कि 1971 के जेनोसाइड का किया जिक्र
रुबिन ने पाकिस्तान आर्मी और जमात-ए-इस्लामी के द्वारा किए गए 1971 के जेनोसाइड का भी जfक्र किया। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश उस हिंसा के पीछे की आइडियोलॉजी का सामना करने में नाकाम रहने पर इतिहास दोहराने का रिस्क उठा रहा है। उन्होंने कहा, “अगर आप जेनोसाइड को हरा देते हैं लेकिन उसे सपोर्ट करने वाली आइडियोलॉजी को नहीं हराते हैं, तो यह फिर से उभरेगा।” उन्होंने बांग्लादेश के लिए इस समय को वेकअप कॉल बताया।
‘चुनाव को फ्री एंड फेयर नहीं माना जा सकता’
ब्रीफिंग रिप्रेजेंटेटिव टॉम बैरेट जिन्हें युद्ध का अनुभव है, ने धर्म से जुड़ी हिंसा की निंदा की और नैतिक स्पष्टता की जरूरत पर जोर दिया। रिप्रेजेंटेटिव सुहास सुब्रमण्यम ने हिंदुओं पर बढ़ते हमलों की ओर इशारा किया और आने वाले चुनावों की आलोचना करते हुए उन्हें बुनियादी तौर पर गलत बताया। अवामी लीग पर बैन को लेकर नाराजगी जताते हुए सुब्रमण्यम ने कहा कि काम बातों से ज्यादा बोलते हैं। उन्होंने कहा कि चुनाव को फ्री एंड फेयर नहीं माना जा सकता है।
‘चुनाव जो नाटक से कहीं ज्यादा हो’
ब्रीफिंग खत्म करते हुए, HinduACTion की कम्युनिकेशंस डायरेक्टर एडेल नाजेरियन ने इस मुद्दे को नैतिक और स्ट्रेटेजिक दोनों तरह से बताया। उन्होंने कहा, “शांति का मतलब लड़ाई का ना होना नहीं है। शांति का मतलब है इज्जत, बराबर सुरक्षा और एक ऐसा चुनाव जो सिर्फ नाटक से कहीं ज्यादा हो।” अब ऐसे में कैपिटल हिल से मैसेज साफ है कि चुप रहे तो कीमत देश की माइनॉरिटीज और खुद इलाके की स्टेबिलिटी को चुकानी पड़ सकती है।
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