
पायलटों के लिए ब्रेथ एनालाइजर टेस्ट से जुड़े नियमों को और सख्त कर दिया है। नए नियमों के तहत बार-बार उल्लंघन करने वाले पायलटों का लाइसेंस तक रद्द किया जा सकता है। एविएशन सुरक्षा नियामक नागरिक उड्डयन महानिदेशालय यानी डीजीसीए ने यह कदम उठाया है। सूत्रों के मुताबिक संशोधित नियम 9 फरवरी से लागू हो गए हैं। इसके तहत भारत में उड़ान भरने वाले विदेशी पायलटों की FATA यानी फॉरेन एयरक्रू टेम्परेरी ऑथोराइजेशन भी रद्द कर दी जाएगी, अगर वे प्री-फ्लाइट ब्रेथ एनालाइजर टेस्ट में शराब सेवन के दोषी पाए जाते हैं। ऐसे मामलों में उन्हें दोबारा अनुमति नहीं दी जाएगी।
तीन बार पॉजिटिव पाए जाने पर लाइसेंस रद्द
नए प्रावधानों के अनुसार, अगर कोई पायलट उड़ान से पहले तीन बार ब्रेथ एनालाइजर टेस्ट में पॉजिटिव पाया जाता है तो उसका लाइसेंस रद्द कर दिया जाएगा। पिछले साल सितंबर में डीजीसीए ने क्रू मेंबर्स के लिए उड़ान से पहले और बाद में मेडिकल जांच की प्रक्रिया से जुड़े सिविल एविएशन रिक्वायरमेंट में बदलाव का प्रस्ताव रखा था।
पहली बार मामूली स्तर पर पॉजिटिव
संशोधित नियमों के अनुसार, अगर पहली बार कन्फर्मेटरी ब्रेथ एनालाइजर रीडिंग 0.009% BAC (Blood Alcohol Content) या mg/dl तक पाई जाती है, तो संबंधित क्रू को ड्यूटी रोस्टर से हटा दिया जाएगा और काउंसलिंग कराई जाएगी। शेड्यूल्ड ऑपरेटर के मामले में काउंसलिंग चीफ मेडिकल ऑफिसर और चीफ ऑफ फ्लाइट सेफ्टी द्वारा की जाएगी। अन्य ऑपरेटर के मामले में यह जिम्मेदारी अकाउंटेबल मैनेजर और चीफ ऑफ फ्लाइट सेफ्टी/CFI की होगी। ऐसे सभी मामलों की सूचना DGCA को दी जाएगी, हालांकि इसे क्रू के लाइसेंस पर दर्ज नहीं किया जाएगा।
दूसरी बार पॉजिटिव पर निलंबन
अगर पायलट दूसरी बार प्री-फ्लाइट टेस्ट में पॉजिटिव पाया जाता है, या एक बार पॉजिटिव और दूसरी बार टेस्ट मिस करता है, तो उसका लाइसेंस निलंबित कर दिया जाएगा। पोस्ट-फ्लाइट ब्रेथ एनालाइजर टेस्ट में पॉजिटिव पाए जाने या टेस्ट मिस करने की स्थिति में तीन साल तक लाइसेंस/अनुमोदन निलंबित किया जा सकता है।
12 घंटे का अनिवार्य अंतराल
DGCA ने कहा कि उड़ान सुरक्षा केवल रक्त में अल्कोहल स्तर पर निर्भर नहीं करती। कई बार व्यक्ति का रक्त अल्कोहल स्तर शून्य हो सकता है, लेकिन ‘हैंगओवर’ के कारण उसकी क्षमता प्रभावित रह सकती है। इसी वजह से उड़ान से पहले कम से कम 12 घंटे तक शराब से दूरी अनिवार्य है। भारी शराब सेवन के प्रभाव 48 से 72 घंटे तक भी रह सकते हैं। एयरलाइंस अपने सेफ्टी मैनेजमेंट सिस्टम के तहत इससे भी सख्त नियम लागू कर सकती हैं।
विदेश से आने वाली उड़ानों पर नियम
भारत से बाहर से आने वाली उड़ानों के लिए यह नियम भारत में लैंडिंग के बाद लागू होगा। वहीं, जो उड़ानें विदेश से आकर भारत में ट्रांजिट करती हैं, उनके लिए ऑपरेटर को प्रस्थान स्थल पर प्री-फ्लाइट मेडिकल सुविधा सुनिश्चित करनी होगी। अगर कोई क्रू मेंबर प्री-फ्लाइट ब्रेथ एनालाइजर टेस्ट के बिना उड़ान संचालित करता है, तो एयरलाइन के चीफ ऑफ ऑपरेशंस और संबंधित क्रू को पहले लैंडिंग पोर्ट पर पोस्ट-फ्लाइट टेस्ट कराना होगा। अगर रिपोर्ट नेगेटिव आती है, तो उसे आगे की उड़ानों के लिए अनुमति दी जा सकती है और इसकी जानकारी DGCA को देनी होगी।
