‘पुरानी इमारतें ब्रिटिश साम्राज्य का प्रतीक थीं’, सेवा तीर्थ से पहले संबोधन में बोले PM मोदी


PM मोदी ने सेवा तीर्थ और...- India TV Hindi
Image Source : NARENDRA MODI/YOUTUBE
PM मोदी ने सेवा तीर्थ और कर्तव्य भवन 1-2 का उद्घाटन किया।

Seva Teerth Inauguration: PM मोदी ने नई दिल्ली में आज (शुक्रवार को) सेवा तीर्थ का उद्घाटन किया। इस मौके पर प्रधानमंत्री ने कहा कि आज हम सभी एक नए इतिहास को बनते देख रहे हैं। 13 फरवरी का यह दिन, भारत की विकास यात्रा में एक नए आरंभ का साक्षी बन रहा है। शास्त्रों में विजया एकादशी का बहुत महत्व रहा है। इस दिन जिस संकल्प के साथ आगे बढ़ते हैं, उसमें विजय मिलती है। आज हम सभी विकसित भारत का संकल्प लेकर सेवा तीर्थ में, कर्तव्य भवन में प्रवेश कर रहे हैं। अपने लक्ष्य में विजयी होने का दैवीय आशीर्वाद हमारे साथ है।

जमीन से जुड़ा हुआ है सेवा तीर्थ

साउथ ब्लॉक और नॉर्थ ब्लॉक जैसी इमारतें, जो ब्रिटिश सोच की हुकूमत को लागू करने के लिए बनी थीं, वहीं आज सेवा तीर्थ और कर्तव्य भवन जैसे परिसर भारत की जनता की आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए बने हैं। यहां से जो फैसले होंगे, वे किसी महाराजा की सोच को नहीं, बल्कि 140 करोड़ देशवासियों की अपेक्षाओं को आगे बढ़ाने का आधार बनेंगे। इसी अमृत भावना के साथ आज मैं ये सेवा तीर्थ और कर्तव्य भवन भारत की जनता को समर्पित कर रहा हूं।

नए आरंभ का साक्षी बन रहा सेवा तीर्थ

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि सेवा तीर्थ नए आरंभ का साक्षी बन रहा है। सेवा तीर्थ जनता की अपेक्षाओं को आगे बढ़ाने का आधार होगा। जहां से देश चलता है वह जगह प्रेरणदायी होनी चाहिए। पुरानी इमारतें जर्जर हो रही थीं। वहां जगह की भी कमी थी। नॉर्थ-साउथ ब्लॉक की इमारतें देश के इतिहास का हिस्सा हैं। इसीलिए उसे म्यूजियम बनाने का फैसला किया गया है। कर्तव्य भवन के निर्माण के कर्मचारियों का समय बचेगा। इसके निर्माण में कम खर्च होगा। नॉर्थ-साउथ ब्लॉक को इस प्रकार से ऊंचा बनाया गया था कि उसकी बराबरी कोई ना कर सके, लेकिन संयोग से सेवा तीर्थ जमीन से जुड़ा हुआ है। वह किसी पहाड़ी पर नहीं बनाया गया है।

PM मोदी ने कहा कि देशवासियों की सेवा के अटूट संकल्प और ‘नागरिक देवो भव’ की पावन भावना को साथ लेकर, आज ‘सेवा तीर्थ’ को राष्ट्र को समर्पित करने का सौभाग्य मिला। ‘सेवा तीर्थ’ कर्तव्य, करुणा और ‘राष्ट्र प्रथम’ के लिए हमारी प्रतिबद्धता का सशक्त प्रतीक है। मेरी कामना है कि यह आने वाली पीढ़ियों को निःस्वार्थ सेवा और जन-जन के कल्याण के लिए समर्पित होकर आगे बढ़ने को प्रेरित करता रहे।

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