
पाकिस्तान बॉर्डर पर गरजे वज्र और भीष्म
जैसलमेर: राजस्थान में युद्धाभ्यास के दौरान भारत के भीष्म और वज्र ने पलभर में दुश्मन के ठिकाने उड़ा दिए। रेगिस्तान में ‘बैटल एक्स’ युद्धाभ्यास के दौरान जब भारतीय सेना के युद्धक टैंक T-90 भीष्म और K-9 वज्र ऑटोमैटिक तोपें गरजीं तो मीलों दूर तक धरती कांप उठी। सटीक निशाना और रैपिड रेस्पांस का प्रदर्शन करते हुए सेना ने दुश्मन के ठिकानों को पलभर में तबाह कर दिया। दरअसल, भारतीय सेना की कोनार्क कोर (12 कोर) पाकिस्तान बॉर्डर के पास जैसलमेर सेक्टर के फॉरवर्ड इलाकों में युद्धाभ्यास कर रही है। बैटल एक्स डिवीजन ने एकीकृत युद्धाभ्यास से अपनी मारक क्षमता का प्रदर्शन किया। जवानों ने दिन और रात में काल्पनिक दुश्मन के ठिकानों को तबाह करने की एक्सरसाइज की।
देखें वीडियो
सैन्य अधिकारियों के अनुसार- रेगिस्तानी युद्ध में दूरी और दृश्यता हमेशा एक चुनौती होती है। ऐसे में यह अभ्यास सुनिश्चित करता है कि जैसे ही दुश्मन की हलचल का पता चले, सेना का रेस्पांस इतना तेज हो कि दुश्मन को संभलने का मौका भी न मिले। सेना के प्रवक्ता ने बताया- युद्ध के अभ्यास के दौरान ‘सेंसर टू शूटर’ लिंक को परखा गया। ड्रोन और सर्विलांस मशीनों से मिली जानकारी को कितनी तेजी से फायरिंग यूनिट तक पहुंचाया जाता है और कितनी सटीकता से टारगेट को नष्ट किया जाता है, इसका सफल प्रदर्शन हुआ।
T-90 भीष्म और K-9 वज्र का भी इस्तेमाल
युद्धाभ्यास के दौरान भारतीय सेना के मुख्य युद्धक टैंक T-90 भीष्म शामिल हुआ। साथ ही रेगिस्तान की विशेष परिस्थितियों के लिए तैयार की गई K-9 वज्र स्व-चालित तोपों ने मीलों दूर बैठे काल्पनिक दुश्मन के ठिकानों को नेस्तनाबूद कर दिया। जोधपुर मुख्यालय वाली कोनार्क कोर की इस डिवीजन को ‘बैटल एक्स’ इसलिए कहा जाता है, क्योंकि यह दुश्मन की रक्षा पंक्ति को काटने में माहिर है। युद्धाभ्यास में इंफेंट्री, आर्मर्ड (टैंक) और आर्टिलरी (तोपखाना) के बीच बेहतरीन समन्वय देखा गया। अभ्यास के दौरान जवानों ने दिखाया कि वे शून्य से नीचे के तापमान से लेकर 50 डिग्री की झुलसाने वाली गर्मी में भी अपनी मारक क्षमता को ‘परफेक्ट’ बनाए रखने में सक्षम हैं।
