
महाकाल मंदिर में दर्शन के लिए उमड़े श्रद्धालु।
विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में संध्या और शयन आरती के लिए फीस लगाने का विरोध शुरू हो गया है। आरती के लिए ऑनलाइन बुकिंग का लोग विरोध कर रहे हैं। जहां मंदिर प्रबंधन इसे व्यवस्था और ट्रांसपेरेंसी बता रहा है, वहीं विरोध कर रहे लोग सवाल उठा रहे हैं कि क्या अब बाबा के दरबार में भी जाने के लिए टिकट लगेगा।
हाल ही में महाकालेश्वर मंदिर में संध्या और शयन आरती के लिए 250 रुपये प्रति व्यक्ति फीस लागू किए जाने का फैसला किया गया था जिसके खिलाफ अब विरोध शुरू हो गया है। हिंदू संगठन इसे जजिया कर बता रहे हैं।
मंदिर कमेटी ने क्यों उठाया यह कदम?
बता दें कि श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग में दर्शन व्यवस्था को और अधिक सुलभ, पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने के लिए मंदिर प्रबंध समिति ने यह महत्वपूर्ण कदम उठाया है। डिजिटलाइजेशन की प्रक्रिया का विस्तार करते हुए, समिति ने बाबा महाकाल की ‘संध्या आरती’ और ‘शयन आरती’ की बुकिंग प्रक्रिया को पूरी तरह से ऑनलाइन करने का निर्णय लिया है। अब देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालु घर बैठे ही आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से आरती में अपना स्थान सुनिश्चित कर सकेंगे।

संध्या और शयन आरती की बुकिंग अब सिर्फ ऑनलाइन होगी।
समय और फीस की डिटेल-
श्रद्धालु श्री महाकालेश्वर मंदिर की अधिकृत वेबसाइट https://www.shrimahakaleshwar.mp.gov.in/ के माध्यम से ही बुकिंग कर सकते हैं। संध्या आरती के लिए ऑनलाइन बुकिंग प्रतिदिन दोपहर 12:00 बजे से शुरू होगी और शयन आरती के लिए ऑनलाइन बुकिंग प्रतिदिन शाम 4:00 बजे से की जा सकेगी। दोनों ही आरतियों के लिए प्रति श्रद्धालु ₹250/- का शुल्क (शीघ्र दर्शन के समान) निर्धारित किया गया है। बुकिंग की यह प्रक्रिया पूर्णतः ‘पहले आओ, पहले पाओ’ (First come, first serve) के आधार पर संचालित होगी।
आरती के लिए फीस लेना शर्म की बात- जीतू पटवारी
महाकाल में आरती के लिए फीस को लेकर सियासी घमासान भी शुरू हो गया है। कांग्रेस ने कहा है कि CM मोहन यादव के निर्देश पर हमला बोला है। प्रदेश अध्यक्ष कांग्रेस जीतू पटवारी ने कहा, ”यह संवेदनशील मामला है, आरती के लिए फीस लेना शर्म की बात है। बीजेपी का असली चेहरा सामने आ गया है। गरीब आदमी को महाकाल दर्शन के लिए पैसे देने पड़ेंगे। सीएम मोहन यादव उनके निर्देश पर यह जजिया कर लिया जा रहा है।”
महाकाल में शयन और संध्या आरती को लेकर विवाद बढ़ा तो मध्य प्रदेश सरकार का भी बयान सामने आया। मोहन यादव सरकार में शामिल मंत्री ने कहा कि वो जल्द प्रबंधन से बात कर शुल्क को हटाने की मांग करेंगे।
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